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अनशन पर बैठी मेधा गिरफ्तार, दिया सन्देश

फोटो साभार: बीबीसी हिंदी

सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र के प्रभावितों के लिए उचित पुनर्वास की मांग को लेकर मध्यप्रदेश के धार जिले के चिखल्दा गांव में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर और उनके साथ उपवास पर बैठे अन्य लोगों को पुलिस ने आज धरना स्थल से उठाकर इंदौर, बड़वानी और धार के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया है।

.मालूम हो कि 62 वर्षीय मेधा पाटकर समेत 12 लोग सरदार सरोवर बांध के प्रभावितों की मांगों को लेकर धार ज़िले के चिखल्दा गांव में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठै थे। अनशन के 12वें दिन पुलिस ने मेधा पाटकर समेत छह लोगों को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अनशन स्थल से ज़बरदस्ती हटा दिया।

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। आंदोलन की कार्यकर्ता हिमशी सिंह का कहना है कि चिखल्दा गांव में इस वक़्त ख़ौफ का माहौल है। हिमशी सिंह ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने मेधा पाटकर को ले जाने के दौरान भारी बल प्रयोग किया जिसमें कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं।
उन्होंने मीडिया को कहा कि पुलिस जिन डंडों का इस्तेमाल कर रही थी, उसमें कीलें लगी हुई थीं।

दूसरी ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ट्वीट कर कहा, मैं संवेदनशील व्यक्ति हूँ। चिकित्सकों की सलाह पर मेधा पाटकर जी व उनके साथियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, गिरफ्तार नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि मेधा पाटकर और उनके साथियों की स्थिति हाई कीटोन और शुगर के कारण चिंतनीय थी। इनके स्वास्थ्य और जीवन के लिए हम प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए प्रदेश सरकार ने नर्मदा पंचाट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन के साथ 900 करोड़ रुपये का अतिरिक्त पैकेज देने का काम किया।

उधर, नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्रा ने अनशनकारियों पर पुलिस और प्रशासन की कावार्ई को तानाशाही बताया। उन्होंने कहा कि मेधा और अन्य लोगों को बल प्रयोग कर अनशन से उठाया गया और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराने के लिये उनकी सहमति नहीं ली गई।

अपनी गिरफ़्तारी के ठीक पहले मेधा पाटकर का संदेश जो उन्होंने अगस्त 7, 2017 की शाम 6 बजे दिया-

आज मध्य प्रदेश सरकार हमारे 12वें दिन अनशन पर बैठे हुए 12 साथियों को मात्र गिरफ़्तार करके जवाब दे रही हैं। ये कोई अहिंसक आंदोलन का जवाब नहीं है। मोदीजी के राज में शिवराज जी के राज में एक गहरा संवाद नहीं, जो हुआ उस पर जवाब नहीं, आकड़ों का खेल, कानून का उल्लंघन और केवल बल प्रयोग जो आज पुलिस लाकर और कल पानी लाकर करने की उनकी मंशा है। इसका उपयोग हम लोग इस देश में गाँधी के सपनों की हत्या मानते है, बाबा साहेब के संविधान को भी न मानने वाले, ये राज पर बैठे है।

और वह समाजों के, गायों के, किसानों के, मज़दूरों के, मछुआरों की कोई परवाह नहीं करते है। ये अब इस बात से स्पष्ट हो रहा है। उन्होंने बंदूकों से हत्या की, और यहाँ जल हत्या करने की मंशा है इसलिए हम उनके बीच में आ रहे हैं ऐसा उनका मानना है। पहले अनशन तोड़ो और फिर बात करो, यह हम कैसे मंज़ूर कर सकते है?

एक बाजू मुख्यमंत्री खुद कह रहे है कि ट्रिब्यूनल का फैसला जो कानून है, उसका अमल पूरा हो चुका है। दुसरे बाजू बोल रहे है अनशन तोड़ने के बाद चर्चा करेंगे। इसके साथ जिन मुद्दों पर सब तो रख चुके है। तो अब यह चोटी पर जाना पड़ेगा, अहिंसक आंदोलन और जवाब समाज ने देना पड़ेगा। नर्मदा घाटी के लोगों पर बहुत कहार मचाने जा रहे हैं। प्रकृति साथ दे रही है, गुजरात पानी से लबालब है, यहां पानी नही भरा है। लेकिन कल क्या होगा कौन जाने?

12 अगस्त को मोदीजी ने अगर इस मुद्दे पर महोत्सव मनाया और जश्न मनाया और वह भी साधुओं के साथ और 12 मुख्यमंत्रियों के साथ, तो उनकी सरकार और उनकी पार्टी किस प्रकार से विकास को आगे ढकेलना चाह रही है। इस देश के कोने कोने में संघर्ष पर उतरे साथी कह रहे है, वही बात फिर अधोरिखित करते है। हम इतना ही चाहते है, कि ‘नर्मदा से हो सही विकास, समर्थकों की यहीं है आस’ – यह हमारा नारा आज केवल नर्मदा घाटी के लिए नहीं है, देश में कोई भी अब विस्थापन के आधार पर विकास मान्य न करें। विकल्प वही चुनेें।
यही हम चाहते हैं।
मेधा पाटकर

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