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अमेरिका ले जाई गयी स्वामी सहजानन्द सरस्वती से संबंधित सामग्री आश्रम को लौटाई जाएगी

सीताराम आश्रम , बिहटा, 13 फरवरी। क्रांतिकारी किसान नेता स्वामी सहजानन्द सरस्वती की 130 वीं जयंती आज सीताराम आश्रम, बिहटा में मनाई गई। इस आयोजन में वक्ताओं ने स्वामी सहजांनाद सरस्वती के व्यक्तित्व व कृतित्व को याद करने के साथ-साथ आश्रम द्वारा स्वामी सहजानन्द के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाएं जाने तथा उनपर अब तक अप्रकाशित सामग्री को सार्वजनिक करने का फैसला लिया गया। समारोह में किसान, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता सहित स्वामी जी पर लंबे समय तक शोध करने वाले विद्वान भी मौजूद थे।

‘श्री सीताराम आश्रम ट्रस्ट ‘के सचिव डॉ सत्यजीत ने कहा ” अतीत में क्या हुआ उसमें नही जाना चाहते। पुराना जो स्कूल, औषधालय था उसकी मरम्मत करें।आने वाले बच्चों के लिए एक ऐसा म्यूजियम बने जिससे बे पुराने जमाने में खती के उपकरणों व तौर तरीकों को समझ सकें। ये आश्रम किसानों के कांफ्रेंस के लिये, किसानों को खेती संबंधी मामलों के लिए सलाह देने से सम्बंधित संस्था के रूप में विकसित होगा। ” डॉ सत्यजीत ने ये भी कहा ” दुनिया में ये सवाल जाता है कि कौन सन्यासी है जो समाजवादी बना , जो भगवान की खोज में निकला और भगवान मिला उसे किसान -मजदूर में मिला। स्वामी जी का महत्व इसी बात से पता चलता है आज सरकार को बाध्य होना पड़ा है किसानों के लिए बजट में प्रावधान करना पड़ा है।”

स्वामी सहजानन्द सरस्वती पर लगभग चार दशकों तक काम करने वाले कैलाशचन्द्र झा ने दुनिया भर में स्वामी जी पर काम करने वाले अमरीकी स्कॉलर वाल्टर हाउजर के बारे में बताते हुए कहा ” 1957 में रिसर्चर, इतिहासकार वाल्टर हाउजर ने स्वामी सहजानन्द सरस्वती पर काम करना शुरू किया। ये बात सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि लेकिन ये तथ्य है कि 1950 व 60 के दशक में कोई भी सवामी जी के बारे में ज्यादा बात न करता । चूंकि आश्रम में तब दस्तावेजी महत्व की सामग्री जैसे तैसे पड़ी थी, सुरक्षित न थी वैसे समय में वाल्टर हाउजर ने इसे संजोया और उसपर काम किया। वाल्टर हाउजर के बाद उसपर काम होना शुरू हुआ। जबसे ‘सबाल्टर्न स्टडीज ‘ पर काम होना शुरू हुआ तबसे स्वामी सहजानन्द पर चर्चा शुरू हुई। आज तो उनपर काफी रिसर्च हो रहा है ।”

कैलाशचन्द्र झा ने ये भी घोषणा की ” वाल्टर हाउजर जो सामग्री सुरक्षा व शोध के ख्याल से अमेरिका ले गए थे उसे हम फिर आए वापस लाकर सीताराम आश्रम ट्रस्ट को सौंपने जी तैयारी कर रहे हैं।”

ज्ञातव्य हो कि कैलाश चंद्र झा ने स्वामी जी की पुस्तक ‘ मेरा जीवन संघर्ष ‘ का पहली दफा अंग्रेज़ी अनुवाद किया है जिसका लोकार्पण पटना में 4 मार्च नृत्य कला मंदिर में होने जा रहा है।

बिहार राज्य अभिलेखागार के पूर्व चेयरमैन विजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा, ” हमलोगों ने हाल में स्वामी सहजांनाद सरस्वती से सम्बंधित किसान आंदोलन के दस्तावेजों का पांच खण्डों में प्रकाशन किया है । तीन खंड प्रकाशित होने को हैं। किसानों के लिए काम करने के दौरान ही उनका महात्मा गांधी से मतभेद हुआ था। 1934 में भूकंप से तबाह किसानो से लगाएं वसूलने के लिए जमींदार कोई मुरव्वत नहीं किया करते थे। जब स्वामी सहजानन्द सरस्वती ने गांधी जी आए इसकी शिकायत की तो उन्होंने जमींदारों के खिलाफ सुनने से इनकार कर दिया। जिससे स्वामी जी का गांधी जी से मोहभंग हो गया और वे अब केंद्रित होकर किसानों की समस्याओं पर काम करने लगे। ये बहुत खुशी की बात है कि स्वामी जी पर अब नए सिरे से काम हो रहा है।”

विजय कुमार ने किसान आंदोलन संबंधी अभिलेखागार की पांच खंडों वाली पुस्तकों को सीताराम आश्रम को समर्पित किया।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) के नेता सर्वोदय शर्मा ने आजादी के पूर्व कांग्रेस और किसान सभा के तनावपूर्ण रिश्तों के संबंध में कहा ” प्रख्यात कम्युनिटी नेता व केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ई.एम.एस नम्बूदिरीपाद ने अपने संस्मरणों में कहा है कि कांग्रेस के सामन्ती परस्त लोग किसान सभा की स्वतंत्र भूमिका को पसंद नही किया करते थे। ये स्वामी सहजानन्द सरस्वती ही थे जिनके नेतृत्व में कम्युनिस्ट लोगों ने किसान सभा में काम करना शुरू किया।हमें इस समय इस आश्रम की भूमिका को और सशक्त बनाने की जरूरत है। स्वामी जी से संबंधित सामग्रियों को प्रकाशित करना चाहिए।”

पटना विश्विद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर रघुनंदन शर्मा, चिकित्सक व सामाजिक कार्यकर्ता श्याम नंदन शर्मा, सीताराम ट्रस्ट के योगेंद्र शर्मा, स्वामी अग्नेयानंद चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार, संस्कृतिकर्मी अनीश अंकुर ने संबोधित किया।
संचालन पटना कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रो नवल कुशोर चौधरी जबकि अध्यक्षता , ट्रस्ट के अध्यक्ष पंचानन शर्मा ने किया।

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