+91 943 029 3163 info@biharkhojkhabar.com

आमिर खान को अपना रोल मॉडल नहीं मानती जायरा वसीम

पिछले वर्ष रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘दंगल’ के अखाड़े से निकलकर ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में गायिका बनी अभिनेत्री जायरा वसीम के अब तक के करियर में आमिर खान की अहम भूमिका रही है। लेकिन वह आमिर खान को अपना प्रेरणास्रोत तो मानती है, लेकिन उन्हें अपना आदर्श नहीं मानती और कहती है कि किसी को आदर्श मानने में यकीन नहीं रखती।

मालूम हो कि फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में जायरा का किरदार उन मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रहा है, जो इस पुरुष प्रधान समाज के समक्ष यह साबित करने की जद्दोजहद में है कि उनके सपनों की उड़ान को अब कोई रोक नहीं सकता।

दंगल गर्ल जायरा ने एक बातचीत में बताया कि सीक्रेट सुपरस्टार’ 13 साल की लड़की इंसिया की कहानी भर नहीं, बल्कि उन लाखों लड़कियों की कहानी है, जो अपने सपनों को किसी न किसी तरह से पूरा करने का प्रयास कर रही हैं।

उसने कहा कि यह फिल्म इंसिया के गायकी को लेकर उसके जुनून की कहानी है। वह चाहती है कि पूरी दुनिया को पता चले कि वह कितनी अच्छी गयिका है। इस फिल्म का संदेश महिलाओं की समाज में हकीकत को बयां करता है। दुर्भाग्यवश अभी भी समाज में यह हो रहा है।

जायरा कहती है, ‘इस फिल्म में काम करते हुए मैं काफी परेशान थी, क्योंकि मुझे पता था कि यह चीज अभी भी समाज में बहुत से लोगों के साथ हो रही है। हमें उम्मीद है कि जब यह फिल्म रिलीज होगी, तो जो संदेश हम देना चाहते हैं, वह लोगों तक जाएगा। बहुत बड़ा नहीं तो कम से कम छोटे-छोटे ही बदलाव आएं।’

फिल्म में आमिर की भूमिका और इंसिया के साथ शक्ति सिंह (आमिर खान) के कनेक्शन के बारे में पूछने पर वह बताती है कि आमिर फिल्म में बहुत महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। इंसिया के सपने उन्हीं पर निर्भर हैं।

आमिर खान जैसे सुपरस्टार के साथ दो फिल्में कर चुकीं जायरा अभी अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त नहीं है। वह तो यह भी नहीं जानती कि भविष्य में फिल्में करेगी भी या नहीं। इसकी वजह बताते हुए कहती है, ‘मैं अभी अपना फ्यूचर नहीं बता सकती, क्योंकि इसके बारे में मैं भी नहीं जानती कि आगे जाकर क्या करने वाली हूं. अभी सिर्फ वर्तमान पर ध्यान है।’

जायरा है तो महज 16 साल की, लेकिन महिला सशक्तीकरण जैसे गंभीर मुद्दों पर उसकी बेबाक राय है। वह सशक्तीकरण की परिभाषा समझाते हुए कहती है, ‘मेरी नजर में महिला सशक्तीकरण महिलाओं को उनका हक देना है। हम महिलाओं के चिर-गंभीर मुद्दों पर बात करते हैं, लेकिन उनकी बेसिक जरूरतों को नजरअंदाज करते हैं। हमें एक समाज के रूप में महिलाओं की छोटी-छोटी चीजों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उनकी छोटी चीजों पर ध्यान देंगे तो बड़ी चीजें खुद ही दुरुस्त हो जाएंगी

Related Posts

Leave a Reply

*