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एक्टीविस्ट की तरह पत्रकारिता करने वाले पत्रकार थे नीलाभ

पटना, 28 फरवरी। आज पटना में पत्रकार नीलाभ की स्मृति सभा का आयोजन ‘ टेक्नो हेराल्ड’ में किया गया। स्मृति सबहा में । सबसे पहले नीलाभ की तस्वीर पर माल्यापर्ण किया गया।

अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए साहित्यकार प्रेम कुमार मणि ने कहा ” नीलाभ इंसान के तौर पर व्याकुल थे। समाज को बेहतर बनाने के लिए साहित्य, राजनीति , पत्रकारिता के माध्यम से क्या किया जा सकता था इसकी बात सोचते थे। उनका परिवार स्वतंत्रता परिवार का परिवार था। वे सामाजिक रूप से तरक्की पसंद थे। हर विषय पर इतनी जानकारी , उतनी गहराई थी कि हैरत होती। किसानों-मज़दूरों के आंदोलन के बारे में बारीक जानकारी रखते थे ”

सामाजिक कार्यकर्ता रूपेश ने कहा ” नीलाभ पत्रकार थे। पटना में वे काफी दिनों तक रहे। सूचना के अधिकार सहित अधिकार आधारित कई आंदोलनों से जुड़े रहे। वे वामपंथी व नक्सली संगठनों से संबंधित थे। एक ऐसे समय में जब नेहरू को गले दी जा रही है उन्होंने नेहरू द्वारा स्थापित अखबार में जाने का फैसला करना कितना चुनौतीपूर्ण था इसे सहज ही समझा जा सकता है। ”

‘द हिन्दू ‘ के पत्रकार अमरनाथ तिवारी ने कहा ” नीलाभ को एकबार भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने नाश्ते पर बुलाया और अगले दिन उन्हें आउटलुक से हटा दिया गया। मैंने एक बार उनसे पूछा कि क्या पत्रकार को एक्टीविस्ट बनना चाहिए ? उन्होंने बताया कि बहुत बारीक रेखा होती है लेकिन पत्रकार अपने पेशे के प्रति ही प्रतिबद्ध रहे तो अच्छा है।”

निवेदिता झा ने कहा ” वे न्यायपूर्ण रिपोर्टिंग करने का प्रयास करते थे। ईमानदार पत्रकारिता करते रहे।”

साहित्यकार कर्मेंदु शिशिर ने कहा ” उनको मैन प्रौढ़ होते हुए देखा था। जो कुछ में जान पाया कि उनके व्यक्तित्व व सोच में मौलिकता थी। हमलोग रात-रात भर रहे लेकिन कभी भी किसी जी निंदा करते हुए नहीं देखा था। परस्पर विरोधी विचारों के समन्यव थे। एक ओर गांधी दूसरी तरफ मार्क्स की तरफ खड़ा होते थे। साहित्य में गहरी पैठ थी। मेरी इच्छा थी जी वो पत्रकारिता के बजाय साहित्य में रहे। ”

वरिष्ठ पत्रकार नवेन्दू ने कहा ” नीलाभ पढाका व अंदर से लड़ाका थे। उनकी मौत से बहुत लोग स्तब्ध हैं। वे विरोधीभासी व्यक्तित्व था उनका। हमारे जमाने में नीलाभ PUCL के एक्टीविस्ट की तरह काम करते थे। वे जनहित के लिहाज से जो चीज वाजिब लगता था उसके साथ रहते थे। पत्रकारिता में भी उन्होंने एक्टीविज़म करते रहे।”

बिहार विधानसभा के सदस्य शकील अहमद खान ने कहा ” जिस खतरनाक समय मे हम जी रहे हैं उसमें नीलाभा का जाना बहुत बड़ी क्षति है।”

पत्रकार अनिल विभाकर ने कहा ” वैचारिक प्रतिबद्धता के बावजूद बड़े सौम्य व्यक्तित्व के मालिक थे। उनका आचार, व्ययहार प्रयोगधर्मी था। अपने जीवन से वे ओरयोग करते रहे।”

भाकपा माले ( कानू सान्याल ) के नंदकिशोर सिंह ने कहा ” वे प्रगतिशील , जनवादी पत्रकार थे। संपूर्णता में जन पक्षधर पत्रकार थे। पटना में नवभारत के दौरान थे तब जुड़ाव था। फिर 1990-91 दौरान PUCL की बैठकों में वे नियमित आते थे।”

साहित्यकार शिवदयाल ने स्मृति सभा को संबोधित करते हुए कहा “नीलाभ में ठंढी पेशेवराना था। उनका अध्ययन साहित्य व सहित्यतेर दोनों था। साहित्य पर उनकी टिप्पणियां कभी कभी हैरत में डालता था।”

‘ टेक्नो हेराल्ड ‘ में आयोजित इस स्मृति सभा को संबोधित करने वालों में कवि अनिल विभाकर, भारतीय मैत्री व सांस्कृतिक संघ के प्रदेश महासचिव रवींद्र नाथ राय, प्राच्य प्रभा के संपादक विजय कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद, संस्कृतिकर्मी संतोष सहर एवं चितरंजन गगन थे।

स्मृति सभा में अंत में एक मिनट का मौन रखा गया
स्मृति सभा में शहर के पत्रकार, साहित्यकार, रंगकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोग मौजूद थे। आइए लीगों में प्रमुख थे जगजीवन राम समाज व संसदीय अध्ययन संस्थान के निदेशक श्रीकांत, रंगकर्मी अनीश अंकुर, पूर्वा भारद्वाज , जया , विनीत राय, नीरज , भाकपा (माले ) के राजा राम, ऋत्विज, रोहित , राजू, गौतम गुलाल उपस्थित थे।

स्मृति सभा का संचालन रंगकर्मी जयप्रकाश ने किया ।

विनीत कुमार की रिपोर्ट

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