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किसानों को सम्मान मिले, मिले सही दाम- के नारे के साथ किसान सत्याग्रह का हुआ आयोजन

17 अप्रैल, मधेपुरा। आज से 100 वर्ष पहले निलहा किसानों की दुर्दशा और उसपर हों रहे जुल्म के खिलाफ चम्पारण में गाँधी ने सत्याग्रह का बिगुल फूका, जिसके आगे अंग्रेजी हुकूमत को झुकना पड़ा यह आन्दोलन आजादी की लड़ाई में मिल का पत्थर साबित हुआ और गाँधी जी  को महत्मा बना दिया।

उसके शताब्दी वर्ष और आजादी के सात दशक हों गए फिर भी किसान बेहाल हैं। आजादी के बाद लगातार सरकारों ने किसानों की उपेक्षा की हैं जो लगातार जारी रहने के साथ ही नित्य वीभत्स होती जा रही हैं। सबसे दुखद पहलू यह भी हैं कि इस शताव्दी वर्ष के सरकारी आयोजनों में खेती व किसान के मुद्दे गायब हैं।

उक्त बाते चम्पारण सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरा होंने अवसर पर कोशी नव निर्माण मंच के आह्वान पर शुरू कोशी किसान एकता अभियान द्वारा जिले के किसानों के सवालों पर आयोजित  किसान सत्याग्रह में वक्ताओ ने कही।

वक्ताओ ने कहा कि सरकारी नीतिगत उपेक्षा से खेती किसान को खा रही हैं इसका ज्वलन्त उदाहरण किसानों की आत्महत्याए हैं। इसके बाद भी सरकारे संवेदनशील नहीं हो रही हैं। अभी एक सप्ताह भी नहीं हुए कि देश की राजधानी में अपनी मांगो के नहीं माने जाने पर तमिलनाडु के किसानो को नंगा होकर विरोध करना पड़ा।

वक्ताओ ने स्थानीय स्तर की समस्यायों रेखांकित करते हुए कहा कि खेती के उत्पाद लागत खाद बीज कीटनाशक के दाम लगातार बढ़ रहे हैं फसल लगाते समय किसानों के सस्ते ऋण की आसान व्यवस्था नहीं हैं वही उपज होने पर सरकार नीतिगत अक्षमता के कारण खरीद नहीं हो पाता है और मज़बूरी में किसानों को अपनी उपज औने पौने दामों में व्यापारियों को बेचने मजबूर होना पड़ता है।

पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील कोशी अंचल में समय समय पर आने वाली आपदाएं किसानों पर कहर बनकर टूटती हैं नतीजा हैं कि किसान साल दर साल कर्ज में डूबता जा रहा हैं कभी इसकी जमीन बिकती हैं तो कभी उत्पादन का मालिक पलायन करके मजदूरी करने पर विविश होता हैं।

विदित हों कि आज सभी सत्याग्रही मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर जमा हुए और जहाँ से किसान सत्याग्रह यात्रा निकाली गयी, जो मेन रोड होते हुए कालेज चौक, बस स्टैंड के बाद समाहरणालय धरना स्थल पहुची।

यात्रा में किसानों को सम्मान मिले, फसल का सही दाम मिले, मक्का समेत सभी फसलों का लाभकारी मूल्य तय करों, पूज्य बापू अमर रहे, सत्याग्रह शताब्दी जिंदाबाद के जोरदार नारे गूंजते रहे।

समाहरणालय के समक्ष धरना स्थल पर किसान सत्याग्रह रामजी दास की अध्यक्षता में शुरू हुआ। सत्याग्रह को अनिल यादव, श्यामसुंदर, निराला, ई0 प्रभात, अमरेन्द्र, लखनलाल दास, अनिल मेहता, रामरूप पासवान, बिजेंद्र, अरुण, नंदकिशोर, चन्द्र किशोर, मंटू, शिशुपाल, धीरेन्द्र, दुनी दत्त, भूपेंद्र कुमार, चन्दन, अजय, प्रमोद संदीप, रणवीर, रौशन, दिलीप झा, त्रिलोक, शिवनंदन मंडल, यशपाल, शम्भू, साधू साव व महेन्द्र इत्यादि ने संबोधित किया| कार्यक्रम का संचालन राजू खान ने और धन्यबाद ज्ञापन रमण सिंह ने किया| जनवादी गीत मुरली जी व अन्य साथियो ने गया।

कार्यक्रम के अंत में मक्का गेहूं धान समेत सभी फसलों के सम्मानजनक समर्थन मूल्य तय करने, सही समय पर खरीद और फ़ौरन भुगतान कराने, ससमय खाद बीज उपलब्ध कराने के साथ ही किसानों के अनुदान और किसान क्रेडिट कार्ड बनाने में जारी भ्रष्टाचार पर रोक लगाते हुए प्रक्रिया सरल करने सम्बंधित लगभग चार हजार किसानों का हस्ताक्षरयुक्त मुख्यमंत्री के नाम पांच सूत्रीय मांगपत्र, डी एम के प्रतनिधि के रूप में कृषि पदाधिकारी के माध्यम से सौपा गया।

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