+91 943 029 3163 info@biharkhojkhabar.com

गुजरात के बाद अब एक और बड़ा झटक लग सकता है लालू को !

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत से राजनीति में कई नए समीकरण बनने लगे हैं। इस परिणाम का प्रभाव उन क्षेत्रीय क्षत्रपों पर ज्यादा पड़ा है, जो भाजपा की हार के बाद केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के लिए रणनीति बनाये हुए थे। इस तरह कुछ रणनीति के सूत्रधार बनने की कोशिश में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी थे। गुजरात चुनाव में कांग्रेस की हार से बिहार में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को झटका लगा है।

लालू यादव की दूसरी मुश्किलें कम होतीं नहीं दिख रहीं हैं। अब बिहार-झारखंड के बहुचर्चित चारा घोटाला के तीन मामलों में 23 दिसंबर को बड़ा फैसला आने वाला है। इनमें लालू भी आरोपी हैं। अगर लालू को कोर्ट दोषी करार देती है तो बिहार की राजनीति में इसके गहरे परिणाम तय हैं। सम्भावना इस बात की भी है कि लालू यादव के राष्‍ट्रीय जनता दल में भी उथल-पुथल मच जाए।

लालू को दोषी करार दिए जाने के बाद बिहार में कांग्रेस के साथ उनका ‘महागठबंधन’ प्रभावित हो सकता है। लालू की कांग्रेस को डॉमिनेट कर सकने की स्थिति जाती रहेगी। ऐसा इसलिए भी कि अब कांग्रेस की कमान कभी भ्रष्‍टाचार के मुद्दे पर लोकसभा में आर्डिनेंस फाड़ चुके राहुल गांधी के हाथों में है, जिन्‍हें लालू आगामी लोकसभा चुनाव में विपक्ष का नेता मानने से फिलवक्त इन्‍कार कर रहे हैं।

राजनीति के विशेषज्ञों के मुताबिक राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से बिहार के वह नेता खुश हैं, जो लालू यादव को पसंद नहीं करते। लालू यादव से खार खाए बिहार के कुछ विधायक, जो नीतीश और भाजपा से लगातार संपर्क में हैं। लालू यादव के जेल जाने की स्थिति में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं।

कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता मानते हैं कि गुजरात में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है और अब सवाल ही नहीं उठता है कि बिहार में लालू के नीचे रहकर पार्टी काम करे। जो हो गया वह हो गया, अब राहुल के नेतृत्व में ऐसा नहीं होगा।

गुजरात में कांग्रेस हार कर भी अपना कद बढ़ाने में कामयाब रही है। वह भाजपा के विकल्‍प में एक सशक्‍त पार्टी के रूप में नजर आयी है। इधर, बिहार में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक चौधरी पर नीतीश गुट की कृपा दृष्टि बनी हुई है और वह लालू के विरोधी माने जाते हैं। जबकि कार्यकारी अध्यक्ष के बारे में कहा जाता है कि वह लालू के करीबी हैं। जदयू के नेता कई बार मीडिया के सामने बयान दे चुके हैं कि कांग्रेस के कई नेता लालू में अपना भविष्य नहीं देखते, इसलिए वह कभी भी जदयू के पाले में आ सकते हैं।

Related Posts

Leave a Reply

*