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चारा घोटाले का रिकार्ड तोड़ सकता है ‘सृजन घोटाला’, शक के घेरे में केंद्रीय मंत्री, सांसद और विधायक भी !

भागलपुर का सृजन घोटाला अब महाघोटाला की शक्ल ले रहा है। अविभाजित बिहार के चारा घोटाले के बाद सरकारी धन गबन करने का यह सबसे बड़ा मामला सामने आया है। शुक्रवार को और 150 करोड़ के गबन के दस्तावेज मिलते ही घोटाले का आकार 700 करोड़ तक पहुंच गया।

अब तक पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को जो साक्ष्य मिले हैं, उससे साफ है कि भागलपुर डीएम ऑफिस, ट्रेजरी, बैंक और सृजन महिला विकास सहयोग समिति के अधिकारी इस महाघोटाले में शामिल थे। केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, प्रखंड प्रमुखों और कारोबारियों की ओर भी शक की सुई घूम रही।

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम ने शुक्रवार को जिन सात लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें सेवानिवृत्त अनुमंडल अंकेक्षक सतीश चंद्र झा, सृजन महिला विकास सहयोग समिति की प्रबंधक सरिता झा, भागलपुर समाहरणालय का लिपिक प्रेम कुमार जो डीएम का स्टेनोग्र्राफर है, डीआरडीए का नाजिर राकेश यादव, जिला भू-अर्जन कार्यालय का नाजिर राकेश झा, इंडियन बैंक का क्लर्क अजय पांडेय और प्रिंटिंग प्रेस का मालिक वंशीधर झा शामिल हैं। उनसे पिछले दो दिनों से लगातार पूछताछ की जा रही थी।

वंशीधर झा ने पुलिस के सामने गबन के पूरे खेल का खुलासा कर दिया है। वंशीधर ही सरकारी बैंक खाते के पासबुक अपने प्रिंटिंग प्रेस में फर्जी ढंग से अपडेट करता था। सृजन महिला विकास सहयोग समिति की प्रमुख मनोरमा देवी की मृत्यु के बाद कामकाज संभालने वाली सरिता झा भी पुलिस की गिरफ्त में हैं।

सात लोगों की गिरफ्तारी के बाद सृजन से जुड़े नेताओं के नाम सामने आने लगे हैं। पूर्व और वर्तमान मंत्रियों, सांसदों और स्थानीय नेताओं के नाम की चर्चा है। सृजन संस्था के कार्यक्रम में यह लोग दिखते थे। सृजन की प्रमुख मनोरमा देवी के साथ भी अच्छे संबंध थे। हालांकि, जांच अधिकारियों ने इस संबंध में मुंह पर ताला लगा लिया है। सबूत हाथ लगने पर ही नेताओं के नाम खोले जाएंगे।

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