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जापानी मूल के अंग्रेजी लेखक काजुओ इशिगुरो को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार

साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2017 का नोबेल पुरस्कार जापानी मूल के अंग्रेजी लेखक काजुओ इशिगुरो को दिया गया। उनके उपन्यासों में भावानात्मक बल बहुत अधिक दिखता था। उन्होंने अपनी रचनाओं में दुनिया के साथ हमारे संबंधों के भ्रम को उजागर किया है।

काजुओ इशिगुरो का जन्म आठ नवंबर 1954 को जापान के नागासाकी में हुआ था। जब वे पांच वर्ष के थे तो उनका परिवार इंग्लैंड आ गया था और वे वहीं बस गये। काजुओ ने आठ किताबें लिखीं हैं साथ ही उन्होंने टीवी और फिल्म के लिए स्क्रिप्ट भी लिखा है।

इशिगुरो ने 1978 में केंट यूनिवर्सिटी से बैचलर की डिग्री ली और पूर्व एंग्लिया यूनिवर्सिटी से क्रियेटिव राइटिंग में मास्टर्स की डिग्री ली। इशिगुरो अपने समय के प्रसिद्ध फिक्शन लेखकों में शुमार हैं।उनके चर्चित उपन्यास ‘द रिमेंस अॅाफ द डे’पर फिल्म भी बन चुकी है। यह उपन्यास 1989 में प्रकाशित हुआ था।

वर्ष 2008 में टाइम्स पत्रिका ने इन्हें ब्रिटेन के 50 सर्वश्रेष्ठ लेखकों की सूची में 32वें स्थान पर रखा था। इनका सातवां उपन्यास ‘द ब्यूरिड जाइंट’वर्ष 2015 में प्रकाशित हुआ। इन्होंने साइंस फिक्शन लिखा और पाठकों का अपनी रचनाओं से अलग दुनिया से परिचय कराया।

ब्रिटिश अखबार ‘द गार्डियन’ के मुताबिक नोबेल प्राइज देने वाली स्वीडिश एकेडमी ने इशिगुरो के नॉवेल्स को भावनात्मकता की महान ताकत बताया है। इस साल साहित्य के नोबेल के लिए माग्रेट एटवुड, गुगी वा थियोंग और हारुकी मुराकामी जैसे नाम थे। लेकिन, इशिगुरो का नाम चौंकाने वाला है।

पिछले साल जब बॉब डायलिन को ये अवॉर्ड दिया गया था काफी सवाल उठे थे। इशिगुरो ने ‘द रिमेन्स ऑफ द डे’ और ‘नेवर लेट मी गो’ जैसे मशहूर नॉवेल लिखे हैं। एकेडमी ने उनके बार में कहा- वो बहुत सावधानी और संयम से लिखते हैं। लेकिन, जो लिखना चाहते हैं वो पूरी आजादी से लिखते हैं।

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