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जीएसटी में उलझी मोदी सरकार के लिए कैसे संकट मोचक बने सुशील कुमार मोदी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जीएसटी क्रियान्वयन की उलझनों में कारोबारियों के साथ खुद भी उलझ गयी है. इसका अहसास पीएम मोदी को है, तभी उन्होंने दो दिन पहले कंपनी सेक्रेटरी के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार जीएसटी में आवश्यक बदलाव सुझावों के आधार पर करने को तैयार है.

सार्वजनिक रूप से उनका यह बयान आने के बाद आज दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक हो रही है, जिसमें बेहद स्पष्ट संकेत है कि सरकार और जीएसटी परिषद व्यापारियों को राहत देने के लिए कुछ अहम बदलाव करेगी. इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह संभावित है कि सरकार हर महीने कारोबारियों को रिटर्न भरने के बजाय तीन महीने में एक बार रिटर्न दाखिल करने के लिए कह सकती है.

दिलचस्प यह कि बिहार के उपमुख्यमंत्री व जीएसटी नेटवर्क के प्रमुख सुशील कुमार मोदी ने कल ही पटना में एक बयान जारी कर यह सलाह जीएसटी परिषद को दी. सुशील कुमार मोदी ने जीएसटी परिषद के सदस्यों को सुझाव दिया है कि रिवर्स चार्ज सिस्टम को फिलहाल लागू नहीं किया जाये और कंपाउंडिंग योजना के तहत कारोबार की सीमा 75 लाख से बढ़ा कर एक करोड़ रुपये की जाये.

दरअसल, जीएसटी की उलझी गुत्थी को सुलझाने में सुशील कुमार मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के लिए एक संकट मोचक के तौर पर उभर कर सामने आये हैं.

सुशील कुमार मोदी देश के वैसे चुनिंदा राजनेताओं में शामिल हैं, जो जीएसटी के तकनीकी पक्ष एवं बारीकी को समझते हैं. और, जमीन से जुड़े एक नेता के रूप में वे निचले स्तर पर कारोबार कर रहे व्यापारियों एवं आम जनता को इससे होने वाली सुविधा-असुविधा की भी गहरी समझ रखते हैं.

इस मामले में वे एक साथ जमीनी नेता व तकनीकीविद दोनों हैं. दरअसल बिहार में एनडीए की पूर्व सरकार में जब सुशील कुमार मोदी वित्तमंत्री थे, तब वे 2011 से 2013 तक जीएसटी के यूपीए सरकार द्वारा गठित अधिकार प्राप्त समिति के प्रमुख थे.

इस रूप में जीएसटी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में उन्होंने यूपीए सरकार को काफी सहयोग किया था. इस दौरान सुशील कुमार मोदी ने दुनिया के वैसे देशों में जहां जीएसटी लागू हुए हैं, उसका गहराई से शोध व अध्ययन किया. यह तब उनकी कार्य जिम्मेवारी का एक अहम हिस्सा था.

उन्होंने अपने कार्य को पूरी प्रमाणिकता से करने के लिए तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम से भी अच्छे कामकाजी संबंध बनाया, पर तब 2013 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा भाजपा से रिश्ते तोड़ देने के कारण सुशील कुमार मोदी को बिहार के उप मुख्यमंत्री – वित्तमंत्री पद के साथ जीएसटी के अधिकार प्राप्त समिति के प्रमुख पद से भी इस्तीफा देना पड़ा था.

साभार: प्रभात खबर

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