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तो सुनील मछुआरे बनकर रह जाते !

किस्मत के खेल निराले होते हैं। कई बार अजीबोगरीब संयोग इंसान की पूरी नियति ही बदल देती है। महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर के साथ भी किस्मत ने ऐसा ही खेल खेला था। यदि ऐन मौके पर उनके चाचा सतर्क नहीं होते तो सुनील गावस्कर महान क्रिकेटर नहीं बल्कि कहीं समंदर या नदियों में मछली पकड़ रहे होते।

यह किस्सा उस दिन का है जब सुनील गावस्कर पैदा हुए थे। उनके जन्म के बाद रिश्तेदार, परिजन सब देखने आने लगे। सबों ने बारी बारी सुनील को देखा। लेकिन उनके चाचा मौसेरकर ने उन्हें गोद में लेकर बहुत ध्यान से देखा। इस दौरान उन्होंने देखा कि सुनील के कान के पास एक छोटा-सा छेद है। यह बात उन्हें याद रह गयी।

अगले दिन जब वे फिर अपने नन्हे भतीजे से मिलने आए और उसे गोद में उठाया तो अचानक चौंक गए। दरअसल, जिस बच्चे को वे पहले दिन खिला रहे थे, वह ये नहीं था। इस बच्चे के कान के पास छोटा छेद नहीं था।

उन्होंने तुरंत अस्पताल के प्रबंधन को सूचना दी। प्रबंधन पहले तो कहने लगा कि आपको कोई गलतफहमी हुई होगी, लेकिन जब चाचा ने साफतौर पर बताया कि मैंने अच्छी तरह बच्चे के कान के पास छेद देखा था तो प्रबंधन सुनील को ढूंढने पर राजी हुआ।

थोड़ी ही देर बाद पास वाले कमरे में कान के पास छेद वाला बच्चा मिल गया। जब पड़ताल की तो पता चला कि नर्स ने गलती से सुनील को एक मछुआरे की पत्नी के पास सुला दिया था जबकि मछुआरे का बेटा सनी की मां के पास सुला दिया गया था।

निश्चित रूप से दवाई देने या अन्य किसी समय यह गलती हुई थी, मगर सुनील के चाचा की सतर्कता ने इस गलती को सुधार दिया। अगर सुनील गावस्कर के चाचा ने प्रबंधन की गलती को नहीं पकड़ा होता तो भारतीय क्रिकेट इस महान बल्लेबाज से मरहूम रह जाता।

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