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देश के वर्तमान हालात से दुखी रहते थे टॉम आल्टर

रंगकर्मियों-कलाकारों के साझा मंच ‘हिंसा के विरुद्ध संस्कृतिकर्मी और बिहार आर्ट थियेटर जे संयुक्त तत्वाधान में सुप्रसिद्ध अभिनेता टॉम अल्टर की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते प्रख्यात कवि आलोकधन्वा ने कहा ” टॉम अल्टर की जैसी हिंदी उर्दू ज़बान है वो दुर्लभ है। हम हिंदी अच्छी इसलिए नहीं बोल पाते कि हमारी उर्दू अच्छी नहीं है। टॉम अल्टर खूब पढा करते थे पढ़ना एक युद्ध की तरह है। मौलाना आज़ाद पर आधारित उनका अभिनय एक दुर्लभ अनुभव था। जिसमें नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद, सरदार पटेल को हैम नए तरीके से समझते हैं”

सुप्रसिद्ध फ़िल्म समीक्षक जय मंगल देव ने कहा ” उनके जाने से बॉलीवुड के अंग्रेज चले गए उन्होंने तीन किताबें भी लिखी जिसमें एक स्पोर्ट्स पर आधारित है उन्होंने अपना अभिनय कैरियर बॉलीवुड से ही शुरु की थी लगभग सभी कला के फिल्मों में उन्होंने काम किया। पटेल, मौलाना की भूमिका से उन्हें सराहना मिली। वो व्यक्तिगत तौर पर बेहद अनुशासित व्यक्ति थे।”

वक्तव्य देते हुए युवा रंगकर्मी जय प्रकाश ने कहा कि वो बहुत उम्दा अभिनेता थे। उनसे मेरी मुलाकात पटना में ही हुई ।बहुत दिनों तक मुझे लगता रहा कि भारतीय मूल के अभिनेता थे ही नही। उनके जाने से रंगमंच को बड़ी क्षति हुई है। वो कैंसर से पीड़ित थे और ये बात उन्होनें अपने परिवार से भी छिपाई । अंत समय में उन्हें मालूम हो चुका था कि अब मेरे पास ज्यादा समय नही है। वे अपने नाटकों के शो लगातार करवाने में लगे रहे। अंत तक वो खुद को अभिनय के समर्पित रहे।”

वयोवृद्ध रंगकर्मी अमियनाथ चटर्जी ने कहा ” वो एक अनुशासन प्रिय अभिनेता थे, एक मंचीय प्रस्तुति की बात करते हुए कहा कि किसी छात्रावास के समीप नाटक करना था कुछ शोर हो रहा जब तक शांत नही हुआ तबतक उन्होंने अपनी प्रस्तुति शुरू नही की।”

बिहार आर्ट थियेटर के गुप्तेश्वर कुमार ने कहा “अभिनय के लिए उन्हें स्वर्ण पदक भी मिला । सबने आज़मी नसीरुद्दीन शाह के सहपाठी रहे। आशिकी फ़िल्म उनकी देख रेख में बनी इसमे में अनु अग्रवाल की खूबसूरती नायिका के अनुकूल नही थी लेकिन टॉम साहब के हस्तक्षेप से उन्हें काम भी मिला और फ़िल्म सफल रही।”

संस्कृतिकर्मी अनीश अंकुर ने अपने संबोधन में कहा ” टॉम अल्टर कहा करते थे कि अभिनय सिखाया नहीं जाता खुद करके सीखना पड़ता है। एक बार उन्होंने महान अभिनेता दिलीप कुमार से पूछा कि आप इतना बढ़िया अभिनय कैसे कर लेते हैं तो जवाब मिला ‘शेरो शायरी’ यानी कविता अभिनय के लिए बेहद आवश्यक है।

अनीश अंकुर ने आगे कहा ” वे देश के हालात से बेहद दुखी रहते थे। वे कहा करते गांधी की हत्या देश में सच की हत्या थी। आज नेहरू को भला बुरा कहा जाता है ये ठीक नहीं है। आज भारत पाकिस्तान और ईरान बनने जी राह पर चल पड़ा है। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए बताया वहां एक स्पेनिश भाषा की बढ़ती से दिक्कत हो रही है जबकि हमलोग कितनी भाषाएं संभाल पा रहे हैं। ”

सुमन कुमार ने कहा ” टॉम अल्टर ने 300 से ज्यादा फिल्मों में उन्होंने काम किया। पढ़ने की ललक थी हमेशा किताब लिए रहते थे। मंच नाटक में भी जबरदस्त थे । उनके हिंदी उर्दू के उच्चारण शब्दो का भाव के साथ अद्भुत था।”

अजित कुमार ने कहा ” जब भी इस तरह की श्रद्धांजलि सभा होती है तो उसमें शामिल होना बहुत मायनों में बेहतर होता है एक साथ उस व्यक्तित्व के बारे में बहुत सारी बातें पता चलती है ,जो हम बहुत पढ़कर भी नही जान सकते। लेकिन हमारे युवा साथियों इस तरह आयोजन में शामिल न होना चिंता का विषय है।”

अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए बिहार आर्ट थियेटर के सचिव कुमार अनुपम ने कहा ” इस तरह की श्रद्धांजलि सभा एक तरह का वर्कशाप टॉम की तरह है। जिसमें बहुत सी बातें सीखने को मिलती हैं। अल्टर का जो विशाल व्यक्तित्व व बड़े अभिनेता को वो स्थान नहीं मिला जिसके वो हकदार थे।”

संदीप कुमार, विशाल तिवारी, राजन कुमार सिंह, सत्यजीत केसरी, राजू कुमार, आर नरेंद्र, संजय कांत, नंदकिशोर सिंह, सुनील कुमार, मनोज कुमार , रणविजय कुमार, गोविंद कुमार, रंजन कुमार, अरुण सिन्हा आदि मौजूद थे।

श्रद्धांजलि सभा में अंत में दो मिनट का मौन रखा गया।

मंच संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी रमेश सिंह ने किया।

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