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पटना की सडकों पर चलना मौत से खेलने के समान है- पैदल यात्रियों की स्थिति पर परिचर्चा सम्पन्न

सड़क पर पहला अधिकार पैदल यात्रियों का हैं फिर भी पटना की सडकों पर चलना मौत से खेलने के समान हैं| इंडियन रोड कांग्रेस की गाइड लाइन हो या अंतराष्ट्रीय गाइड लाइन या राष्ट्रीय परिवहन नीति, सभी जगह पैदल और गैर मोटर यात्रा की प्रणाली को प्राथमिकता की बाते की गयी हैं फिर भी गरिमामयी अतीत को समेटे राज्य की राजधानी में उनका अनुपालन नही होता हैं| जबकि इसके चलते रोज दुर्घटनाओं से लोग जान गवां रहे हैं विकलांग हो रहे हैं साथ ही प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा हैं ऐसे में यदि पटना को स्मार्ट बनना हैं तो साफ हवा के साथ पैदल चलने वाले लोगों की सुविधाओं की मुकम्मल गारंटी करनी होगी|

उपरोक्त बातें आई एम ए सभागार “पटना में पैदल यात्रियों की स्थिति, चुनौतियां और हमारा दायित्व” विषय पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने कही| लोगों ने शहर के रचनाकार, योजनाकारों व सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क गाड़ियों लिए हैं या आदमी के लिए? यदि आदमी के लिए हैं तो फिर सभी का फोकस गाड़ियों पर केन्द्रित क्यों हैं? बढ़ रही पटना की संरचनाओं में पैदल यात्रिओ की सुविधाएँ कहाँ दिखती हैं? यह सड़क के लोकतंत्र के खिलाफ हैं|

वक्ताओं ने पटना की सडकों पर अनेक स्थानों पर फूटपाथ नहीं होने, जहाँ हैं वहां भी अतिक्रमण, कचरा रखने विज्ञापन लगाने, उस पर मोटर साईकिल चलाने से लेकर सड़क पार करने की स्थति, छायादार स्थान नही होने, पेयजल सफाई, सार्वजिक शौचालयों की कमी, हर समय असुरक्षा इत्यादि सभी सवालों पर गंभीरता से उठाते हुए कहा कि ऐसे परिवेश में विकलांग (दिव्यांग) भी इसी सड़क पर चलेंगे किसी के सोच में ही नही हैं|

वक्ताओं ने कहा की स्मार्ट नागरिक बनाने की बाते हो रही हैं पर नागरिक सुविधाओं (सिविक फैसलीटी) के बगैर नागरिक बोध (सिविक सेन्स) नहीं आ सकता| सभी ने कहा की अवरोध मुक्त साफ सुरक्षित फूटपाथ सभी सडकों पर होना होना चाहिए| यह प्रत्येक शहरी का अधिकार हैं|

वक्ताओं ने कहा कि स्मार्ट यदि कम्फर्टेबल नहीं होगा तो कैसा स्मार्ट? सुरक्षित नहीं है तो कैसा स्मार्ट? सभी के लिए नहीं होगा तो कैसा स्मार्ट? उसमें भागीदारी नहीं होगी तो कैसा स्मार्ट? स्मार्ट की संकल्पना में उन सवालों के उत्तर आने चाहिए|

इस परिचर्चा कार्यक्रम में इंदिरा रमन उपाध्याय, नीरज, अंकित कुमार, मनीलाल, द्वारिका पासवान, मुकेश, अमित, श्यामनन्दन सिंह, उदयन राय, सावत्री देवी, शांति देवी, प्रभावती देवी आशा देवी, शम्स इत्यादि ने अपनी बाते रखी।

संचालन महेंद यादव ने किया जबकि विषय प्रवेश समनेट की स्वाति ने किया| कार्यक्रम का आयोजन पटना के पैदल यात्री किए थे| इस आयोजन में अनेक शहरों में टिकाऊ शहरी परिवहन के लिए कार्य करने वाले नेटवर्क समनेट और शक्ति का सहयोग था।

एस पी वर्मा रोड का वैकल्पिक डिजाइन भी पेश किया गया

समनेट से जुडी शहरी वास्तुकार (ARCHITECT) मधुरा कुलकर्णी ने देश और दुनिया के अनेक अनुभवों को रखते हुए कहा कि पटना में अभी तत्काल मौजूदा संसाधनों सड़क की उपलब्धता में उसका सही नियोजन करना होगा| एस पी वर्मा रोड की वैकल्पिक डिजाइन पेश करते हुए कहा की यदि ठीक से री-डिजाइन किया जाय तो पैदल चलने वाले वालों की सुरक्षित फूटपाथ के साथ वहां पार्किंग और फूटपाथी दुकानदारों को भी नियोजित किया जा सकता हैं साथ में गाड़िया भी तेजी से चलेंगी| ऐसा ही सभी सडकों पर करना चाहिए।

पैदल साईकिल यात्री मंच का हुआ गठन- कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने मिलकर पैदल साईकिल यात्री मंच का गठन किया जो लोगों के बीच इस सवालों पर जागरूकता चलाते हुए जनदवाव बनाने का कार्य करेगा साथ ही पैदल यात्रियों के लिए बने नियमों को पालन कराने की पहलकदमी भी करेगा| इसके लिए तत्कालीन 13 सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया गया जिसमें एडवोकेट मणिलाल, द्वारिका पासवान, उमा द्फ्तुअर, शम्स खान, दीपक पटेल, शशि, जौहर, सरफराज, फुरकान, आबाद व महेंद्र यादव हैं| इसके संरक्षक वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद और संयोजक उदयन राय को बनाया गया|

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