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परिचर्चा: स्वाधीनता आंदोलन की विरासत को मिटाया जा रहा है

‘भारतीय सांस्कृतिक सहयोग व मैत्री संघ’ (इसकफ़) की ओर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘स्वाधीनता आंदोलन जी विरासत एवं समकालीन भारत’ विषय पर बातचीत का आयोजन किया गया। बी.एम दास रोड स्थित मैत्री शांति भवन में आयोजित बातचीत के मुख्य वक्ता थे अवकाश प्राप्त प्रशासनिक पदाधिकारी मनोज श्रीवास्तव, शिक्षक व सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार सिंह, शिक्षाविद अनिल कुमार राय, सामाजिक कार्यकर्ता अक्षय, अवकाशप्राप्त प्रोफेसर हर्षवर्धन , इसकफ़ महासचिव रवीन्द्र नाथ राय।

सुनील कुमार सिंह ने कहा ” स्वाधीनता आंदोलन की विरासत है वैज्ञानिक चेतना का विकास , तर्क को प्रमुखता लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार विज्ञान कांग्रेस में अवैज्ञानिक बातें कर रही है। वैज्ञानिक शोधों के बजट में कटौती की जा रही है। इसके स्थान में सत्ता के सरंक्षण में अंधविश्वास, कूपमंडूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।”

इसकफ़ महासचिव रवींद्र नाथ राय ने आने विचार प्रकट करते हुए कहा ” भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत है धर्मनिरपेक्षता, साम्राज्यवाद की मुखालफत करना लेकिन नरेंद्र मोदी की नई हुकूमत ने भारत को जैसे आज के खतरनाक साम्राज्यवादी देश अमेरिका जा जूनियर पार्टनर बन चुका है। किसानों की स्थिति को इतना दुखदायी बना दिया गया है कि किसान आत्महत्या करने और उतारू है”।

शिक्षाविद अनिल कुमार राय के अनुसार ” समकालीन भारत में साम्प्रदायिक उन्माद पैदा कर आमलोगों की बुनियादी समस्याओं से ध्यान भटकाया है रहा है। किस राजाज्ञा के तहत आज संस्कृति के स्वयम्भू ठेकेदार बनकर गाय के नाम पर गरीबों की निर्ममता से हत्या की जा रही है? हिन्दू-मुस्लिम एकता की पुरानी विरासत को जान-बुझ कर नष्ट किया जा रहा है।”

चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता अक्षय के अनुसार, ” सबको शिक्षा का वादा हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने किया था लेकिन आज पूरी शिक्षा व्यवस्थित अव्यवस्था का शिकार है। निजी क्षेत्रों और कारपोरेट के हाथों शिक्षा को बेचा तो जा ही रह है भाजपा की केंद्र सरकार पाठ्यपुस्तकों में विभाजन का जहर बो रही है।इसका आगे आने वाली पीढ़ियों पर घातक प्रभाव पड़ेगा। मुसलमानों के प्रति नफरत का माहौल बनाकर एक पूरे समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।”

रिटायर्ड आई. ए.एस अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में स्वाधीनता प्राप्ति जे बाद मूल्यों में आये बदलाव की चर्चा करते हुए कहा “आखिर क्या कारण है कि जो भारत की जनता राजेन्द्र प्रसाद, गांधी और नेहरू जैसे त्यागी -तपस्वी के पीछे चला करती थी वो आज भ्र्ष्ट लोगों को समर्थन देती है।अपराधियों को चुनाव में जिताती है?” उन्होंने कई उदाहरण देते हुए बताया कि हमें यदि स्वाधीनता आंदोलन के मूल्यों की रक्षा करनी है तो ” भृष्ट लोगों को, अपराधियों को, अवैध कमाई करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करना शुरू करना होगा। हम खुद यदि ईमानदार हैं तो गलत प्रवृत्ति के लोगों के साथ चाय पीकर उन्हें प्रतिष्ठा क्यों प्रदान करते हैं? हमें अपने जीवन में भी तब्दीली लानी होगी। अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा ”

भाकपा के जिला सचिव रामलला सिंह ने हिंदुस्तान के बड़े पूंजीपतियों द्वारा बैंकों का पैसा डकार लिए जाने की घटना की चर्चा करते हुए कहा ” देश के बड़े पूंजीपतियों का नवासी हजार करोड़ रुपया मोदी सरकार ने माफ जार दिया। क्यों? क्योंकि ये उसी जे वैसे से चलने वाले सरकार है।1969 में कम्युनिस्टों के प्रभाव से 14 बैंकों का राष्ट्रीय करण किया गया ताकि बैंक गरीबों का भला करे लेकिन स्वाधीनता आंदोलन की इस विरासत को त्याग कर मोदी सरकार खुल्लम-खुल्ला कारपोरेट घरानों के हाथों खेक रही है।”

संचालन करते हुये ‘इसकफ़’ किज़िला सचिव आनंद शर्मा ने स्वाधीनता आंदोलन में कम्युनिस्टों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा ” आज़ादी की लड़ाई में कम्युनिस्टों ने बड़ी संख्या में शहादत दी, देश के लिए लड़े , कुर्बान हुए केकिन बेहद दुख की बात है कि उपनिवेशी शासकों अंग्रेजों का समर्थन करने वाली आर.एस एस आज सत्ता में है।हमें एकजुट होकर अंग्रेजों के सहयोगियों को परास्त करना है। यही समकालीन भारत में स्वाधीनता आंदोलन की विरासत को बचाने का कार्यभार है।”

बातचीत में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, राजनेता संस्कृतिकर्मी मौजूद थे।प्रमुख लोगों में अशोक कुमार सिन्हा, आफताब अहमद, छात्र नेता सुशील, राजीव ममता सिंह, जीतेन्द्र कुमार, सुशील, केदार दास श्रम व समाज अध्ययन संस्थान के अजय कुमार आदि मौजूद थे।

धन्यवाद ज्ञापन अनीश अंकुर ने किया।

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