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पाटलिपुत्र की नगरपालिका का प्रशंसक था मेगस्थनीज़ !

ग्रीक राजदूत मेगस्थनीज़ जब पाटलिपुत्र (प्राचीन पटना) आया तो उसे यकीन ही नहीं हुआ था कि यह शहर मानव निर्मित है। उसे यह देवताओं द्वारा बनाया गया लगा था। उसने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में विस्तार के साथ मौर्यकालीन हिंदुस्तान के बारे में लिखा। इंडिका की मूल प्रति गुम हो गई। बाद के दिनों में ग्रीक और लैटिन स्रोतों से मिली सामग्री से इस पुस्तक को पूरी की गई।

मेगस्थनीज़ ने ‘इंडिका’ में तत्कालीन मौर्यकालीन साम्राज्य के शासन प्रणाली के बारे रोचक जानकारी दी है।

वह यहां के भूगोल, इतिहास, वनस्पतियों और जीव, अर्थव्यवस्था, दार्शनिकों, कारीगरों, सैन्य प्रणाली, नगर पार्षद और मूल्यांकनकर्ताओं और प्रशासन के बारे में विस्तार से लिखा है। वह यहां की उन्नत शासन प्रणाली को विस्मय के साथ देखता है। उसके लेखन में प्रशंसा का भाव है।

मेगस्थनीज़ ने पाटलिपुत्र शहर की नगरपालिका के बारे में लिखा है, ‘शहर के नगरपालिका का जिम्मा छह समितियों के पास है। प्रत्येक समिति में पांच सदस्य होते हैं। पहली समिति के पास उद्योग, शिल्पकारों और कारीगरों के देखभाल का जिम्मा है। ये निरंतर इनकी निगरानी करते रहते हैं। समय समय पर इन्हें बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है।

दूसरी समिति विदेशी पर्यटकों और व्यापारियों के देखभाल का जिम्मा लेती है। यह समिति शहर में आये हुए विदेशियों के ठहरने का इंतजाम करती है। अगर कोई विदेशी बीमार हुआ तो योग्य चिकित्सकों से उनका इलाज करवाने का काम समिति ही करती है। अगर किसी विदेशी की मृत्यु हो गई तो उस परिस्थिति में समिति के सदस्य ही उनके कफ़न और दफ़न का इंतजाम करते हैं। मृतक के पास पाई गई संपत्ति को उसके रिश्तेदारों तक पहुँचाने का काम इसी समिति के पास है।

मेगस्थनीज़ ने आगे लिखा है, ‘अगर कोई विदेशी पर्यटक या व्यापारी असुरक्षित महसूस कर रहा हो तो उसके आगे के सुरक्षित सफर का इंतजाम समिति ही करती है।

तीसरी समिति के पास शहर के लोगों के जन्म और मृत्यु का हिसाब रहता है। यह समिति शहरी आबादी में उतार चढ़ाव का हिसाब रखती है।

चौथी समिति शहर के व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करती है। समिति यह भी देखती है कि व्यापारी सही बटखरे और पैमाने का प्रयोग करते हैं या नहीं। ग्राहकों के हितों की रक्षा का जिम्मा इसी समिति के पास है।

पांचवीं समिति मुख्य रूप से उत्पादित वस्तुओं के गुणवत्ता को जांचने परखने का काम करती है। वह उनके ठीक से बिक्री का इंतजाम भी करवाती है। व्यापारियों को प्रत्येक उत्पाद के लिए लाइसेंस भी लेना होता है। बिके हुए उत्पाद के मूल्य का दसवां हिस्सा कर के रूप में उगाही का काम इसी समिति के जिम्मे है।

नगरपालिका के कूल तीस सदस्यों के पास शहर के सरकारी भवन, निजी भवन, मंदिर, बाजार और नदी के घाटों का भी जिम्मा है। समिति के सदस्य भवनों, बाजारों और घाटों के कर का निर्धारण और उसकी वसूली का काम भी करते हैं।

साभार: प्रभात खबर

 

 

 

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