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पानी, सड़क के लिए तरसते राज्य में 500 करोड़ से क्यों बन रही है म्यूजियम: न्यायालय

Patna High Courtपटना उच्च न्यायालय ने राजधानी पटना के बेली रोड पर बन रहे अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय के निर्माण पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगायी है। मुख्य न्यायाधीश एल नरसिम्हा रेडी और न्यायाधीश विकास जैन के खंडपीठ ने गुरुवार को कहा कि सरकार जब वर्ष 1928 में स्थापित पटना संग्रहालय का ठीक से रखरखाव नहीं कर पा रही है, तो 500 करोड़ की लागत से नये संग्रहालय के निर्माण की क्या जरूरत है? खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि जिलों में स्थित संग्रहालयों के रखरखाव पर सरकार पांच रुपये भी नहीं खर्च कर पाती है।

खंडपीठ ने दो सप्ताह में सरकार को यह बताने को कहा कि किस कारण से पटना में कीमती जमीन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने का फैसला लिया गया। सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे को खंडपीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी है, जिसे न्यायालय ने मांगा ही नहीं था।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने संग्रहालयों की स्थिति को लेकर तल्ख टिप्पणी भी की। न्यायालय के बार-बार सवाल किये जाने पर कि इस संग्रहालय के निर्माण का निर्णय किसलिए किया गया, अपर महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि प्रदेश में कई जगहों पर पुरातात्विक अवशेष बिखरे पड़े हैं, जिन्हें इस संग्रहालय में रखा जायेगा। इस पर न्यायालय ने कहा कि इसके लिए इतनी कीमती जमीन को ही क्यों चुना गया ? इसका जवाब सरकारी वकील नहीं दे पाये। यद्यपि, अपर प्रधान महाधिवक्ता ने कहा कि इसी साल संग्रहालय का उद्घाटन किया जायेगा।

तब न्यायालय ने टिप्पणी की कि मेरा अनुभव बता रहा है कि सरकार अगले वर्ष भी इसका उद्घाटन नहीं कर पायेगी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह धरती महान विभूतियों की जन्म और कर्म स्थली रही है। लेकिन, यहां के लोग बुनियादी चीजें पानी, सड़क आदि के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में मात्र पांच प्रतिशत लोगों की खुशी के लिए 500 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं।

न्यायालय ने यह भी कहा कि जब बिहार के पुरातत्व की बात की जा रही है, तब विदेशी कंपनी को इसके निर्माण का ठेका क्यों दिया गया? न्यायालय के सवालों का जवाब देते हुए अपर महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि 2009 में राज्य कैबिनेट की बैठक में इस संग्रहालय के निर्माण की मंजूरी दी गयी। अभी तक तीन सेक्टर का निर्माण हो चुका है। छह और सेक्टर में निर्माण होना है। इस पर न्यायालय ने कहा कि शहर को कंक्रीट के जंगल में तब्दील किया जा रहा है।

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