+91 943 029 3163 info@biharkhojkhabar.com

पारम्परिक शैली के गीतों में विशेष छेड़-छाड़ उचित नहीं : विजया भारती

भोजपुरी लोकगीतों की माधुर्यता की मिसाल तो दुनिया देती है। नजरिया, डगरिया, बजरिया, चुनरिया के पुट डाले बिना शास्त्रीय संगीत भी अधूरा समझा जाता है | भोजपुरी के कुछेक शब्दों के उपयोग मात्र से शास्त्रीय संगीत तक विशिष्ट हो जाता है, वहीँ विगत कुछ वर्षों से लोकगीतों के नाम पर कर्कश, कानफोड़ू और अर्थहीन गीत-संगीत के बढ़ते प्रचलन ने उसके वास्तविक स्वरुप को बुरी तरह नुकसान पहंचाया है |

सांस्कृतिक तल पर बिहार के विविध लोकगीतों के साथ यह बहुत बड़ी दुर्घटना है | उस विषम स्थिति में लोकगीतों में श्रृंगार और संस्कार बनाये रखने वालों में चंद कलाकारों के ही नाम लिए जा सकते हैं| उनमें से एक अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध लोक गायिका विजया भारती भी हैं. अठारह भाषाओं में गाने वाली लोकगायिका विजया भारती लगातार चार सालों तक महुआ टीवी के लोकप्रिय दैनिक कार्यक्रम बिहाने बिहाने की एंकर के रूप में घर घर में जानी पहचानी जाती हैं. उनसे युवा सांस्कृतिक पत्रकार रविराज पटेल ने हाल ही में मुंबई में बातचीत की, प्रस्तुत है प्रमुख अंश :

Vijaya - Mahua2प्रश्न – आपकी पहचान बिहार की विविध और विशुद्ध लोकगीतों से है, जिसमें अधिकांश पारंपरिक है, बाज़ार से दुश्मनी है ?

उत्तर- दुश्मनी तो नहीं, पर असहज गीतों से परहेज ज़रूर है | दुश्मनी इसलिए नहीं कहूँगी कि मेरे गाये गीतों को भी किसी से कम बाज़ार नहीं मिला है | मैंने अब तक उन्हीं गीतों को सुर और स्वर दिया है, जिसमें हमारी संस्कृति, संस्कार और माटी की खुशबू है | मैं अपनी इसी विशेषता के कारण दुनिया के कई देशों से भारत की प्रतिनिधि लोकगायिका के तौर पर आमंत्रित और सम्मानित होती रही हूँ | मुझे अपनी विशुद्ध लोकगायिकी पर गर्व है |

प्रश्न – आपके विचार में भोजपुरी गीतों की वर्तमान स्थिति संतोषजनक है ?

उत्तर – बिलकुल नहीं, बहुत ही निराशजनक स्थिति है| जिस ओर आपका इशारा है, वह भोजपुरी लोकगीतों के वास्तविक स्वरुप से कोसों दूर है| उन कलाकारों को तत्काल आर्थिक लाभ ज़रूर मिल रहे हैं, पर सभ्य और शिक्षित समाज में उनका कोई सम्मान नहीं | सस्ती लोकप्रियता के लिए बढ़ रही फूहड़ता से भोजपुरी लोकगीतों को बचाना होगा |

प्रश्न – क्या आपको भी ऐसे गीतों के ऑफ़र मिले हैं, जो आज प्रचलित तो हैं, पर आपको विचलित करते हैं ?

उत्तर- हाँ कई बार मिले हैं, पर वैसे गीतों को पढ़ते ही हमने गाने से इंकार कर दिया | स्टूडियो से बिना गाये लौट भी आयी हूँ | आयोजकों से ली गयी अग्रिम राशि लौटा देना मंजूर किया, पर वैसे गाने गाकर सस्ती लोकप्रियता या धन कमाने के लालच में कभी नहीं पड़ी | मेरा कोई गीत ऐसा नहीं जो आप पूरे परिवार के साथ बैठकर न सुन सकें और जिन्हें सुनकर झूमने का मन न हो | मैंने आज तक जो भी गाया है, मर्यादा की अपने शर्तों पर ही गाया है, और वही गीत गाये, जिसके बोल अर्थपूर्ण और साफ सुथरे रहे हों | ज्यादातर गीत तो मैंने खुद ही लिखे और कंपोज किये हैं |

Vijaya - Mahua1प्रश्न – आपके विचार में पारंपरिक लोकगीतों में किस हद तक बदलाव करने की अनुमति मानी जा सकती है ?

उत्तर – जब तक परम्परा के परिवेश में गीतों के बोल या धुन उसके इर्द-गिर्द होंगे, भले आप शब्दों का चयन अपने अनुकूल कर लें, जो उसे प्रतिबिंबित करता हो, पारम्परिक गीत या लोकगीतों के दायरे में माना जा सकता है | लेकिन सच कहूँ तो पारम्परिक शैली के गीतों में विशेष छेड़-छाड़ उचित नहीं है | क्या आप रवीन्द्र संगीत के धुन को बदल सकते हैं ? फिर क्यों खामखाह खीर को खिचड़ी बनाने पर तुले हैं ?

प्रश्न – आपसे मेरी मुलाक़ात पावन पर्व छठ के मौके पर मुंबई में हो रही है, जो इस बात का द्योतक है कि हमारी परम्परा की परिधि बेहद विशाल हो चुकी है, वहीँ छठ के एलबम मॉडर्न और पॉप वर्जन में पॉपुलर हो रहे हैं, यह कैसा संकेत है ?

उत्तर – यह स्थिति सच्ची ज़रूर है, पर हमारी परम्परा पर प्रहार के रूप में | छठ कोई त्यौहार मात्र नहीं वरन एक पवित्र पर्व है, जिसमें इतने सख्त नियम हैं कि व्रती पूरी पवित्रता से निर्जला अनुष्ठान करते हैं | शायद यह हिंदू समाज का एकमात्र पर्व है, जो पवित्रतम और विशुद्ध रूप से निर्जला होता है | इस त्यौहार में भूल-चूक अक्षम्य है, ऐसी कोई चूक होने पर दंडवत व्रत करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं माना जाता| ऐसे पवित्र पर्व के गीतों को आधुनिकता के नाम पर मॉडर्न बना देना या पॉप करना, मैं तो पाप मानती हूँ |

Raviraj Patel

सिनेयात्रा के सचिव रविराज पटेल राज्य सभा टेलीविज़न के लिए भी वृत्तचित्र बनाते हैं। 

उनसे 09470402200 पर संपर्क किया जा सकता है।

Bihar Khoj Khabar
About the Author
Bihar Khoj Khabar is a premier News Portal Website. It contains news of National, International, State Label and lots More..

Related Posts

Leave a Reply

*