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बचपन की मधुरतम स्मृतियों में गोरैया

हर व्यक्ति के बचपन की सबसे सुखद स्मृतियों में गौरेया जरूर रहती है। सबसे पहले बच्चा इसी चिड़िया को पहचानना सीखता था। लगभग हर घर में इनका घोंसला होता था। आंगन में या छत की मुंडेर पर वे दाना चुगती थीं। बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर ये झुंड के झुंड फुदकती रहती थीं। सुबह की नींद इनकी चहचहाहट सुन कर खुलती थी ।

प्राचीन काल से ही हमारे उल्लास, स्वतंत्रता, परंपरा और संस्कृति की संवाहक वही गौरैया अब संकट में है। संख्या में लगातार गिरावट से उसके विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।

बगीचों से लेकर खेतों तक हर जगह इनकी संख्या में गिरावट को देखते हुए इनको पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजाति की रेड सूची में शामिल किया गया है।

आधुनिक घरों का निर्माण इस तरह किया जा रहा है कि उनमें पुराने घरों की तरह छज्जों, टाइलों और कोनों के लिए जगह ही नहीं है। जबकि यही स्थान गौरैयों के घोंसलों के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं।शहरीकरण के नए दौर में घरों में बगीचों के लिए स्थान नहीं है।पेट्रोल के दहन से निकलने वाला मेथिल नाइट्रेट छोटे कीटों के लिए विनाशकारी होता है, जबकि यही कीट चूजों के खाद्य पदार्थ होते हैं।मोबाइल फोन टावरों से निकलने वाली तरंगों में इतनी क्षमता होती है, जो इनके अंडों को नष्ट कर सकती है।

धीरे-धीरे गौरेयों की संख्या में कमी आती गई और आज चिड़ियों की यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है। अब जबकि गौरेया लुप्तप्राय सी हो गई है तो हमें उसकी कमी महसूस होने लगी है। अब एक चेतना जागी है कि गौरेया को बचाना कितना ज़रूरी है।

उत्तर भारत की संस्कृति में यह चिड़िया इस तरह रची बसी है कि प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा ने कहानी गौरैया में कामना की है कि हमारे शहरी जीवन को समृद्ध करने के लिए गौरैया चिड़िया फिर लौटेगी।

गौरैया को बचाने के लिए 20 मार्च 2010 को पहली बार गौरैया दिवस मनाया गया। यह पहल की थी बांबे नैचुरल हिस्ट्री सोसायटी ने। सोसायटी का नेतृत्व कभी डॉक्टर सालिम अली जैसी शख्सियत ने संभाला था। यही नहीं इस सोसायटी के 1899 में गठन के दौरान कांग्रेस के संस्थह्यपक एओ ह्यूम की भी सक्रिय भूमिका थी। बहरहाल गौरैया दिवस मनाने में इस सोसायटी के अलावा बर्ड लाइफ इंटरनेशनल दुधवा लाइव जैसे संगठनो ने बड़ा काम किया है।

आपकी जरा सी कोशिश परिंदों को जीवन दान दे सकती है। अपने घर की छत पर मुंडेर पर दाना-पानी रखिए। परिंदों को गर्मी में प्यास से दम तोड़ने से बचा लीजिए। घरों में इन्हें आशियां बनाने के लिए खुला स्थान दीजिए। आपकी ये कोशिश परिंदों के लिए संजीवनी साबित होगी। ये आपको दुआएं देंगे।

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