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बहुजन चौपाल: भगवाकरण का सार्थक विकल्प सामाजिक न्याय के रास्ते ही संभव

‘यूरोप के विकास के मूल में फ्रांसीसी राज्य क्रांति थी। पूरी दुनिया के शोषितों, उत्पीड़ितों को इस क्रांति ने समता, बंधुत्व और आजादी दी। इसी नारे से यूरोप का विकास हुआ। धर्म की मौजूदगी के बावजूद पब्लिक स्फियर से वहां धर्म के हस्तक्षेप को सीमित किया गया। किसी की निजी जिंदगी में धर्म का हस्तक्षेप अलग बात है, लेकिन सामाजिक जीवन में धर्म के हस्तक्षेप को यूरोप ने रोका। लेकिन भारत में समाजवादी सरकारों ने इस हस्तक्षेप को नहीं रोका।

’यह उद्गार वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने पटना में आयोजित एक बहुजन चौपाल में साझा की। चिरंतन विद्रोही नक्षत्र मालाकार की स्मृति को समर्पित भारत का भगवाकरण और सामाजिक न्याय की चुनौतियां विषयक इस सेमिनार का आयोजन बिहार, यूपी के उन युवा एक्टिविस्टों ने किया था जिनमें से अधिकांश अरसे से समाज निर्माण की दिषा में इन्वाॅल्व हैं और जो दक्षिणपंथ के फैलते प्रसार से लगातार जदोजहद करते रहे हैं।

दो सत्रों में विभक्त इस सेमिनार में देश भर के चर्चित एक्टिविस्ट, लेखक एवं पत्रकारों ने हिस्सा लिया। बागडोर और मित्र संगठन न्याय मंच, सोशलिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया एवं बुद्ध-अंबेडकर फाउंडेशन की संयुक्त पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम के पहले सत्र की अध्यक्षता ईश्वरी प्रसाद ने और दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रो. ओपी जायसवाल ने की।

उर्मिलेश ने कहा कि बुद्धिजम के पहले और बाद में भी भारत के कुलीनतंत्र ने यहां के कल्चर को नेस्तनाबूद किया। अपने दर्शन को बहुजन समाज पर थोपा। इस तरह का हमला पूरी दुनिया में आपको नहीं दिखेगा। ब्राहणवादी संस्कृति ने पुस्तकालयों और संस्थाओं को नष्ट किया और वे आज भी कर रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाए कि क्या हम जाति को खत्म कर लेंगे? आज के हिन्दुत्व को बनाए रखते हुए जाति को खत्म नहीं किया जा सकता। जिस सोच, संरचना से जाति पैदा हुई है उस धार्मिक सोच, संरचना को बरकार रखते हुए इसे खत्म नहीं किया जा सकता। इन कर्मकांडों के खिलाफ सामाजिक न्याय आंदोलन खड़ा हो जाए तो बहुत बड़ा परिवर्तन हो जाए। धर्म आपकी राजनीति और जीवन के सभी स्तरों को प्रभावित करती है। जरूरत इस बात की है कि सभी दलित, सामाजिक आंदोेलन इन कर्मकांडों को रिजेक्ट करें।

उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व की ताकतें सबसे कम पढ़ी-लिखी हैं। उन्होंने अपनी किताबों को भी नहीं पढ़ी। उन्होंने कहा कि आर.एस.एस और भाजपा अज्ञान का अथाह सागर है। आश्चर्य है कि इतने अज्ञानी लोग ज्ञानियों से भरे भारत को डिक्टेट कर रहे हैं। यह भारत में ही संभव है।

उर्मिलेश ने कहा कि क्रिष्चियनिटी, इस्लाम, बौद्ध और हिन्दुत्व जिसे मैं ब्राहण धर्म कहता हूं। इन तीनों में कर्मकांड हैं, प्रचंड मूर्खताएं हैं, तीनों में डिसक्रिमिनेशन है, लेकिन हिन्दू धर्म में इन सबसे बढ़कर पाखंड हैं। वे चाहते हैं कि उनके मंदिरों के निर्माण के लिए मस्जिदों को तोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि हिन्दुत्वादी शक्तियां पहले कांग्रेस मुक्त भारत, फिर विपक्ष मुक्त भारत और अब मीडिया मुक्त भारत की बात कर रही हैं। आज देश भर में 350 चैनल हैं जिसमें से 20 रास्ट्रीय हैं। ये हमारे, आपके घरों में घुसकर बीवी बच्चों का दिमाग बदल दे रहे हैं। मनुष्य होने की, उनके ज्ञानी बनने की तमाम संभावनाएं नष्ट कर उन्हें हिंदुत्व का रोबोट बना रहे हैं। वे ऐसी मीडिया चाहते हैं जो भजनमंडली की तरह उनके लिए काम करे। बहुजन जातियों के लोगों को वे गुंडे की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके सिरफिरे को इकट्ठा करके मुसलमानों के खिलाफ खड़े कर रहे हैं। अल्पजन उनको छोड़कर कहीं नहीं जाएगा। बहुजन से वे रिश्ता बनाते हैं तो उनकी बड़ी सफलता है। इनकी देशभक्ति और राष्ट्रवाद को चैलेंज किया जाना चाहिए। ये रेलवे स्टेषन, हवाई जहाज को बेच रहे हैं। अस्पताल बेच रहे हैं। शहर की बगल की जमीनों को कौड़ी के मोल निजी हाथों में बेच रहे हैं। 23 रेलवे स्टेषन हाल में बिक चुके हैं। अस्पताल, विद्यालय, वि.वि. इन सबों का तेजी से निजीकरण कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि शिक्षा में बहुजन समाज के लड़के आगे बढ़ें। मीडिया में जाएं। अगर यही रफ्तार निजीकरण की रही तो बहुजन के बच्चे पढ़ने लायक नहीं रहेंगे।

बिहार की चर्चा करते हुए उर्मिलेश ने कहा कि लालू और नीतीश सत्ता में बैठे सामाजिक न्याय के आखिरी शहंशाह हैं। अगर नहीं जागे आप तो 2020 में कर्पूरी, मंडल सभी परंपरा नष्ट हो जाएगी। भगवा राज्य में स्कूल, काॅलेज और वि.वि. को गरीबों से छिना जा रहा है। फीसें बढाई जा रही हैं। इसको चैलेंज करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि नए ढंग के नए प्रतिरोध आंदोलन निजीकरण के खिलाफ खड़े करने होंगे। ब्राहणवादी कर्मकांडों के खिलाफ अभियान चलाएं। रिजर्वेषन की लड़ाई को री-एसर्ट करें। निजीकरण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करें और प्राइवेट क्षेत्र में आरक्षण की लड़ाई को मजबूत करें। 7-8 सालों में सरकार ने रेलवे, अस्पताल आदि कई क्षेत्रों का तेजी से निजीकरण किया, लेकिन अपने यहां उसके खिलाफ कोई आंदोलन नहीं हुआ। जबकि अर्जेटीना में इसके खिलाफ बड़े आंदोलन हुए।उन्होंने माना कि आज कष्मीर के खिलाफ पूरे देश को खड़ा किया जा रहा है। ये इतने मूर्ख, काहिल लोग हैं कि अपना इतिहास भी नहीं देखते। शेख अब्दुला नहीं होते तो कश्मीर भारत का अंग नहीं होता।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे बागडोर के संयोजक संतोष यादव ने कहा किआर.एस.एस वर्णाश्रम धर्म की कोख से निकला है। भाजपा भारत की 70 सालों की उपब्धियों को पलटना चाहती है। वह भारत के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक को हिंदू रिपब्लिक बनाना चाहती है। जाति जनगणना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जाति का सवाल चेतना का सवाल है यह जनगणना हर हाल में होनी चाहिए।

उन्होंने इस देश के एक हजार काॅरपोरेट्स के निदेशक मंडलों के हुए सामाजिक सर्वे का उल्लेख किया। जिसमें 46 प्रतिशत बनिया, 44 प्रतिशत ब्राहण और 3 प्रतिशत ओबीसी पाए गए। इसमें दलित, आदिवासी का प्रतिशत शून्य पाया गया। उन्होंने लोहिया की उस उक्ति को कोट किया जिसमें उन्होंने कहा था कि इस देश के दिमाग पर ब्राहण का राज्य है और जेब पर बनिया का।

संतोष ने कहा कि नए समाज को बनाने के लिए इस पारंपरिक वर्चस्व को खत्म करना होगा और सामाजिक न्याय की लड़ाई को ज्ञान और धन के न्यायपूर्ण बंटवारे की ओर केंद्रित करना पड़ेगा। उन्होंने नक्षत्र मालाकार की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने ही यह आह्वान किया था कि ‘जेल, फांसी, नरक सब कबूल है लेकिन गैर बराबरी नहीं। उन्होंने जेपी के समर कैंप षिविर में दो तरह के भोजन की व्यवस्था पर सवाल किया था कि यह दुहरापन नहीं चलेगा। अगर आप मुक्ति चाहते हैं तो उस नारे को अपने जीवन का हिस्सा बनाना पड़ेगा। संतोष ने कहा कि संकीर्ण शुद्ध जातिवादसबसे खतरनाक है उससे मुक्ति के बगैर इस समाज का विकास संभव नहीं है।

‘मास मीडिया’ और ‘जन मीडिया’ के संपादक अनिल चमड़िया ने भाजपा की सोच में निहित सांप्रदायिकता को टारगेट करते हुए कहा कि आजादी के दौर में एक ऐसी धारा भी थी जो अंग्रेजों को नहीं भगाना चाहती थी। गोलवलकर आह्वान कर रहे थे कि ब्रिटिश के खिलाफ लड़ने में हिन्दुओं को अपनी शक्ति जाया नहीं करनी है। अंदर आपके दुश्मन हैं। दुश्मन की शिनाख्त वे मुसमलान, क्रिष्चियन और कम्युनिस्ट के रूप कर रहे थे। एक देश के भीतर हिंदू राष्ट बनाने की बात वे कर रहे थे। श्री चमड़िया ने कहा कि सत्य आपकी चेतना को एक खास दिशा देते हैं।

वाइरस जिस तरह कम्यूटर को नष्ट कर देते हैं। उसकी तरह खंडित विचार व्यक्ति की चेतना को। सावरकर राजनीति का हिन्दूकरण और हिन्दुओं का का सैन्यीकरण करना चाहते थे। अनिल ने कहा कि धर्म के रूप में कई तरह के शेड़स हैं जिसका भाजपा अलग-अलग स्तरों पर प्रयोग कर रही है। यह अकारण नहीं कि सहारनपुर की घटना एक इवेेंट बनकर रह जा रही है, वह आंदोलन की एक धारा नहीं बन पा रही है। उन्होंने माना कि आज कई तरह से अंगूठा काटने की विधियां दफ्तरों, कार्यालयों में ईजाद हो गई हैं। उन्होंने गुजरात की चर्चा करते हुए कहा कि आरक्षण का संबंध सांप्रदायिक दंगों से क्यांे जुड़ जाता है? सांप्रदायिक दंगे यह एहसास कराने की कोषिष करते हैं कि हम सारे के सारे हिंदू हैं।

मुस्लिम समाज में अशरफों के खिलाफ कलम चलाने वाले चर्चित लेखक खालिद अंसारी ने कहा कि आजादी के पहले कई तरह की ताकतें संघर्ष कर रही थीं। मुसलमानों के अंदर दो धाराएं थीं-मुस्लिम लीग और मोमिन कान्फ्रेंस। मुस्लिम लीग अशरफ मुसलमानों का संगठन था जो दो राष्ट्र का समर्थन कर रहा था और मोमिन कॉन्फ्रेंस दो राष्ट्र के सिद्धांत का विरोध कर रही थी।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पुराने मुस्लिम लीगी मुसलमान कांग्रेस के साथ जुड़ गए। पसमांदा, दलित और आदिवासी मुसलमानों ने पाकिस्तान बनने का विरोध किया, तब से भारत की राजनीति में उनका पूरी तरह से वर्चस्व है और वह आज तक जारी है। जमाते इस्लामी, आॅल इंडिया पर्सनल लाॅ बोर्ड- इन सभी संस्थाओं पर इन्हीं 12 % सवर्ण मुसलमानों का कब्जा है।

पीपुल्स आफ इंडिया के अनुसार भारत में मुसलमानों की 705 जातियां हैं। इनमें से 15-20 % ऐसी जातियां हैं जिन्होंने सारे इंस्टीच्यूषन पर कब्जा जमा रखा है। उन्होंने कहा कि जाति दक्षिण एशिया के सभी धर्मों और क्षेत्रों की समस्या है। दंगे होते हैं साल तीन साल पर। कष्मीर में हिंसा फौरी जिंदगी बन गई है। इस पर सेकूलर खेमा कोई चर्चा नहीं करता। आज देख लीजिए मुजफ्फरनगर गुजरात में जहां भी दंगे होते हैं वहां पसमांदा ही क्यों मारे जाते हैं? उन्होंने कहा कि दंगे की भी भारत में जाति होती है। हिन्दुत्व बढ़ती है तो उसकी एक बड़ी वजह मुस्लिम सांप्रदायिकता है।

उन्होंने कहा कि 70 के बाद सेकुलरिजम आज का सवर्ण सेकुलरिजम है। आंबेडकर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कास्ट को नेशन कहते हैं आंबेडकर। गैंग्स कहते हैं वे जातियों कोे।सामाजिक न्याय की राजनीति को मुसलमानो के अंदर के ये ही गैंग्स प्रभावित कर रहे थे। अपने अंदर के जातिवाद को भी चुनौती देने की बात उन्होंने कही। राजीतिक सत्ता मिल गई तो उसको ये गैंग्स की तरह इस्तेमाल करते रहे। लोहियावादी 10 वर्ष तक शासन में रहे लेकिन उन्होंने लोहिया की रचनावली नहीं छापी, आंबेडकर की रचनावली नहीं छपी। उन्होंने कहा कि विचारों का प्रसार होगा तो अंगुलियां अपने उपर भी उठेंगी।

बनारस से आए मशहूर छात्र नेता सुनील यादव ने कहा कि आज ट्रम्प से लेकर सेकुलर राष्ट्र फ्रांस, टर्की आदि दुनिया के पैमाने पर दक्षिणपंथी ताकतों का उभार हुआ है।यह दमन चक्र कहीं धर्म के आधार पर तो कहीं जाति के आधार सभी जगह चल रहा है। भारत में विजेता की स्थिति में हैं ये शक्तियां। सहारनपुर में आर.एस.एस भाजपा हिन्दू मुस्लिम पोलराइजेशन के लिए दंगे करवाती है। यूपी में योगी की सरकार बनने के बाद मुसलमानों और दलितों के उपर हमले बढ़े हैं। वोट के्रे समय ये जातियां उनके लिए हिंदू हैं और बाद के दिनों में महज जातियां। इन्होंने संस्थाओं पर कब्जे की भी अजीब मुहिम चला रखी है।

उन्होंने सवाल उठाए कि क्या हम केवल हिन्दुत्व की बात करके, डेमोक्रेटिक स्टेट की बात करके उनका मुकाबला कर लेंगे। हमें इस पर भी गौर करना चाहिए। आर.एस.एस भाजपा सुसंगत तरीके से बढ़ रही है। सत्ता के विस्तार के लिए जो भी बिम्ब संभव हो सकते हैं वह उसका इस्तेमाल कर रही है। आज तिरंगे को लेकर माहौल बना दिया गया है। तिरंगे के प्रति आर.एस.एस का नजरिया क्या था। गाय के सवाल पर गौ गुंडे उन्माद फैला रहे हैं। अखलाक की हत्या कर रहे हैं।

दिल्ली से आए युवा पत्रकार अरविंद शेष ने लिखित पर्चे का पाठ किया। उन्होंने कहा कि चेतना के स्तर पर सशक्तिकरण की प्रक्रिया हमारे समाज में बहुत धीमी रही है। उन्होंने हिन्दू समाज की चेतना को प्रभावित कर रहे कई ढोंगी बाबाओं की पोल खोली और कहा कि ब्राहणवाद से निकलकर ही इंसाफ हासिल की जा सकती है। उन्होंने माना कि विचारधारा आगे तभी बढ़ती है जब वह समाज निर्माण में काम आए।

पंजाब से आए चर्चित युवा कवि गुरिंदर आजाद ने भारतीय राष्ट्रवाद पर ब्राहणवादी ताकतों और अंततः भगवा ताकतों की तेज होती गिरफ्त पर प्रकाष डालते हुए कहा कि यह देश आपका नहीं रहा। वह बहुत बड़ा राज्य का समूह बन गया। उन्होंने माना कि यह राष्टवाद हमारा नहीं है। भयानक डासवर्सिटी है भारत के राज्यों में। इस पूरी डायर्सिटी को राष्टवाद के डंडे से हांकने की कोषिषें हो रही हैं। जब स्टेट मजबूत ही नहीं रहेगा तो आप करेंगे क्या?

जे.एन.यू से आए संघर्षशील छात्र नेता प्रशांत निहाल ने वि.वि. स्पेस में सोशल जस्टिस आंदोलन और ब्राहणवादी मानसिकता से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि एम.फिल, पी.एच.डी में लिखित में 70 और भैवा में 30 अंक दिए जाते हैं। यहां सवर्ण अध्यापकों द्वारा दलित, ओबीसी छात्रों का भयानक डिसक्रिमिनेषन होता रहा है। मेरिट के नाम पर उत्पीड़न का पूरा एक पैकेज काम करता रहा है। उन्होंने कहा कि वि.वि. पाॅपुलर स्पेस है। जिस मीडिया माध्यम है किसी खास तरह की विचारधारा को प्रोपेगेट करने का, उसी तरह वि.वि. भी है।

एडवोकेट अलका वर्मा ने कहा कि दक्षिणपंथ का बढ़ता प्रभाव इस देश के लिए खतरा है। उनको रोकने वाली राजनीतिक ताकतें इतनी कमजोर कभी नहीं रहीं।

दलित दस्तक के संपादक अशोक दास ने कहा कि हम सब भगवाकरण को ढो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाए कि जिस भारत की बहुजन आबादी 80 % है क्या उसका भगवाकरण संभव है? हमें खुलकर अपने अंदर झांकने की जरूरत है। आखिर मुट्ठी भर लोग हमारे लिए क्यों चुनौती बने हुए हैं? हमें देखना होगा कि सत्ता वाले कौन लोग हैं?

गजेंद्र मांझी ने माना कि भगवाकरण की ये ताकतें किसानों और दलितों को बहुत चालाकी से अपने में समाहित कर रही हैं। उनसे निबटने का कार्यभार आज की सबसे बड़ी चुनौती है।

अपने स्वागत भाषण में भागलपुर से आए ‘न्याय मंच’ के मुकेश कुमार ने कहा कि हम बहुजन चैपाल में शामिल हैं और हमारे सामने मध्य प्रदेष के किसानों की लाषे हैं, दलित छात्र डीका की लाष मौजूद है, गौ आतंकियों द्वारा मारे गए लोगों की लाषे मौजूद हैं, बिहार झारखंड के किसानों की लाषें मौजूद हैं। उन्होंने कहा किसामाजिक न्याय के पूरे एजेंडे को मुखर करने का एक मौका है यह आयोजन। पूरे देश के स्तर पर इस तरह के कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू करने की बात उन्होंने कही।

मुश्तकीम सिद्यिकी ने कहा कि आज बहुजन दिमाग में आतंक डाल दिया गया है। सांप्रदायिकता प्रशासन तक में चली गई है। हाल ही में नवादा में एक खास धर्म के लोगों के उपर हिन्दुत्वादी गुंडे और प्रशासन ने जिस तरह के कहर बरपाए उस घटना में यह प्रवृत्ति खासतौर से दिखी। प्रषासन, मीडिया सब के सब भगवाकरण में रंग गए हैं। राम सेना और हिंदू सेना को ढोनेवाले कौन लोग हैं, उनपर मुख्यधारा का भगवा मीडिया क्यों चुप हैं? भीम सेना बनती है ये ही उसे गुनाहगार साबित करने में लग जाते हैं।

इंजीनियर हरिकेश्वर राम ने सवाल उठाया कि क्या हमारा स्टेट धर्मनिरपेक्ष है? कोर्ट में गीता को माध्यम मानकर शपथ क्यों ली जाती है। ओबीसी के लोग नारियल क्यों फोड़ते हैं? नीतीष मोतिहारी में बहुत बड़ा मंदिर बनवा रहे हैं। मनुवाद को हमलोग आज भी स्वीकार कर रहे हैं। एक बहुत बड़ी आबादी को भेदभाव के आधार पर नीचे रखा गया है। हम इस अन्याय और भेदभाव से मुक्त कैसे हों? सभी क्षेत्रों में निर्णायक जगहों पर संख्यानुपात में उनकी भागीदारी हो। आरक्षण दिए जाने के पीछे यही आधार रहा है। उन्होंने माना कि यह सीधे-सीधे मनुवाद और आंबेडकरवाद की लड़ाई है।

इस सत्र के अपने संक्षिप्त अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. ईश्वरी प्रसाद ने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा बढ़ क्यों रही है, इस सवाल के शिनाख्त करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह एक अजीब बिडंबना है कि नीतियों, सिद्धांतों और व्यवहार के स्तर पर आज सभी पार्टियां एक तरह का रोल प्ले कर रही हैं। हमें व्यापक फलक पर इन तमाम सवालों पर सोचना होगा तभी हम सही मायने में भारत के हो रहे इस भगवाकरण से निबटेंगे। इस सत्र को डाॅ. विनोद पाल, हीरा, नवनीत एवं मनीष ने भी संबोधित किया।

समारोह के दूसरे सत्र की अध्यक्षता इतिहासकार ओ.पी जायसवाल ने की। उन्होंने संक्षिप्त किंतु ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में आर.एस.एस और भाजपा की वैचारिक संकीर्णता पर रौषनी डाली। कहा कि ये बहुत कम पढे-लिखे लोग हैं जो झूठ बोलने में माहिर हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जो संस्थाएं खड़ी की गई थीं उसको वे एक-एक कर ध्वस्त कर रहे हैं और वहां आर.एस.एस. की नीतियों को लागू कर रहे हैं। इस सत्र में स्वागत वक्तव्य रिंकु ने दिया और संचालन मुकेश कुमार ने किया।

इस सत्र को को संबोधित करते हुए प्रो.रतनलालने कहा कि जब राज्यसता आततायी हो जाए तो उसे कान पकड़कर सिखाएं कि रास्ता इधर है। उन्होंने कहा कि आज चैथे खंभे में धूल लग गई है। राज्यसत्ता का हर प्रतिरोध पर दमन है, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला किया जा रहा है प्रजातांत्रिक संस्थाएं नष्ट की जा रही हैं और मीडिया सत्ता की दलाली में बिछी हुई है। बहुजन चौपाल के माध्यम से ही तरह की तानाशाही को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें हिन्दू राष्ट बनाना है, वर्णव्यवस्था को बनाये रखना है। वे 90 वर्ष से गंभीरता से अपने मिशन में लगे हैं । उन्हें 90 वर्ष लग गए नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने मेें। वे अपने एजेंडे पर डंटे हैं कि हमें हिन्दू राष्ट बनाना है। दूसरी ओर एक छद्म, फर्जी सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करने वालेलोग हैं जिन्होंने सामाजिक न्याय को शंकर की जटा की तरह अपने जटे में ही बांध लिया है। वे नहीं चाहते कि उनके जटे से सामाजिक न्याय की कोई दूसरी धारा फूटे।

भागलपुर से आए प्रो. के.के.मंडल ने कहा कि आज हम सब इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। भाजपा की सरकार राष्ट्रवाद को रिफाइंड करने की कोशिश कर रही है। उनके आइडियोलाॅग मानते हैं कि यह हिंदू राष्ट्र है। इसकी पुष्टि में वे पौराणिक ग्रंथों का हवाला देते हैं। उनकी भारतवर्ष की अवधारणा बिल्कुल निरर्थक है। ऋग्वेद 1028 मंडल में एक बार भी जनपद का इस्तेमाल नहीं है। वहां 10 बार राष्ट्र का संदर्भ आता है, यह राष्ट्र बीजेपी के राष्ट्र से अलग है। कुरु, पांचाल, ज्योग्रफी पहचान… यज्ञ संदर्भ है धार्मिक है। बौद्धायन धर्मसूत्र में मध्यदेष की बातें कही गई हैं। संगम तक भारत की अवधारणा करते हैं।

उन्होंने कहा कि पातंजलि और मनुस्मृति-दोनों टेक्स्ट में रेपेटिसन है। मगध क्षेत्र जहां राज्य का निर्माण हुआ, अरबनाइजेषन हुआ, उसी मगध इम्पायर में भारत की संकल्पना पहली बार आती है। मध्य गंगा घाटी में यह प्रयोग हो जाते हैं। यह क्षेत्र ब्राहणीकरण नाॅरम्स के खिलाफ है। डिसकोर्स में ऋग्वेद के 10वां मंडल में किकट शब्द है। ओबीसी मार्जिनल ग्रुप है। इसमें मार्जिनल ग्रुप को कोई स्पेस नहीं है। मुसलमान, ईसाई, बुुद्धिस्ट, उनकी राष्ट्रीय अवधारणा मं नहीं हैं। उनकी राष्ट्रीय अवधारणा मिथ है, फेक है उसको रिजेक्ट करना होगा। बुद्ध, आंबेडकर मध्यममार्ग की बात करते हैं।

सामाजिक न्याय की की चर्चा करते हुए श्री मंडल ने कहा कि आरक्षण को आज बड़े फलक पर ले जाने की जरूरत है। उन्होंने माना कि 30 साल से बिहार में पिछड़ों की सरकार है। लेकिन यहां का मार्जिनल ग्रुप कहां है? यहां रेप हो रहा है, बाथे के हत्यारे छूट रहे हैं ऐसे में किससे उम्मीद की जाए किसके खिलाफ लड़ेंगे। बी.पी.एस.सी के द्वारा सहायक प्रोफेसर की बहाली हो रही है उसमें जेनरल कैटोगरी में एक भी ओबीसी/एस-सी/एसटी के लोगों की नियुक्ति नहीं हो रही। आप सब में टाॅप कर रहे हैं और आपकी अपनी ही कोई कैटोगरी नहीं है।

अशोक भारती ने कहा कि जर्मन में जिसे फासीवाद कहते थे इटली में में उसे ही नाजीवाद कहा गया। और भारत में वही भगवाकरण है। उन्होंने माना कि भगवा सरकार तथाकथित राष्टवादी सरकार है। दलितों, आदिवासी नेताओं को खरीद कर अपने में शामिल करना उनकी माॅड्स अपरेंडी है। रामविलास पासवान से लेकर रामदास अठावले तक उनके साथ हैं। जो न्याय की बातंे करते थे उनको भी खरीद लिया। अति पिछड़ी जातियों के नेताओं को खरीदने की उनकी नीति है। वे इस देष के अल्पसंख्यक समुदाय को हर स्तर पर अपमानित करते हैं, उनके विरूद्ध झूठा और बुनियाद प्रचार करते रहे हैं ताकि उनको देश का दुश्मन साबित किया जा सके। अलग-अलग राज्यों में ताकतवर अगड़ी जातियां है।

पश्चिमी उतर प्रदेश में जाट,रेड्डी, कम्मा, मराठा, पटेल, गुज्जर हैं। वे इनके खिलाफ पिछड़ी अति पिछड़ी जातियों को गोलबंद करना चाहते हैं। मराठा में पटेलों के खिलाफ बाकी को करनेवाले हैं। वे सत्ता हाशिये की जातियों के माध्यम से प्राप्त करना चाहते हैं और उसकी कमान भूरा बाल वाली जातियों को सौंपते रहे हैं। उतर प्रदेश में क्या हुआ? पिछड़ा उप मुख्यमंत्री स्टूल पर बैठा है। वहां सत्ता अति पिछड़ों के नाम पर आयी और नेतृत्व भूरा बाल को दे दिया। ये जो कर रहे हैं वह दरअसल गाय, गोबर और गोमूत्र का दर्शन है। इसको अगर हमने समझ लिया तो अपना काम कर लिया। हमारा संकट यह है कि पिछड़े आपस में एक नहीं हो सकते। यह लड़ाइयां कई स्तरों पर लड़े जाने की जरूरत है। वे क्या कर रहे हैं, हमारी लड़ाई कैसे मजबूत होगी, इस पर हमें विचार करना है। संगठन और बिजनेस का ढांचा कैसे बनेगा हमें इस पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाजार पर कब्जा भूरा बाल वाली जातियों का है। जिस दिन आप इस बाजार से भूरा बाल को खदेड़ देंगे, उस दिन आपने एक बड़ी जंग जीत ली। जब तक आप उनकी बाजार खड़ी करते रहेंगे, मजबूत नहीं होंगेे। हमारा संकट यह है कि आज तक इनके कामों को प्रोत्साहित नहीं किया गया। कई बार प्रताड़ित होनेवाले लोग भी प्रताड़ित करनेवाले के दृष्टिकोण से सोचते हैं। हमारा हर काम पहचान और सम्मान के निमित्त बनना चाहिए।

जे.एन.यू से आए छात्र नेता मुलायम सिंह ने कहा कि आप सब गाय, गोरू और गंगा में मत फंसिए। प्रोग्राम क्या है इसे कैसे इनीसिएट करना है इसे जनता के बीच आयोजित करें। नीतियां क्या होंगी आर्थिक, सामाजिक इस पर मंथन कीजिए। सामाजिक न्याय की सरकारों के पास आज कोई बड़ा विस्तृत प्रोग्राम नहीं है। हमें अगले 50 साल तक के एजेंडे पर सोचना पड़ेगा। आपकी शिक्षा नीति कहां है? बहुजनों के अंदर चेतना का विस्तार। बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल पाई कि नहीं। अभी तक कोई एम्स क्यों नहीं बन पाया। हेल्थ पाॅलिसी, छोटी बीमारी तमाम लोग दवाओं के अभाव में मर रहे हैं। कांग्रेस, भाजपा, पड़ोसी देशों से संबंधों को लेकर आपकी पाॅलिसी नेषनल और और इंटरनेषनल ऐजेंडे शामिल हो सकते हैं।

हम कैसा समाज और दुनिया बनाना चाहते हैं। फूल, आंबेडकर जैसा सोचते हैं वैसा देश होगा। उन सपनों के देश में जाने के लिए ये बातें कितनी दूर तक सहायक होंगी। जिंदगी जीने से मरने तक बहुत सारी समस्याएं हैं। पार्टी प्रोग्राम विकसित करने पड़ेंगे। प्रोपेगैंडा कैसे करेंगे मीडिया, अल्टरनेटिव, सोशल, प्रिट जर्नल्स, मीडिया हमलोग भी तो हैं। आदमी का जब से कंठ खुला तब से मीडिया आई। लोगों तक अपना विजन कैसे ले जाएंगे। लोकेशन फिट करना पड़ेगा। रोडमैप पर आनेवाला वह स्थान कहां होगा। इसके लिए मेरी नजर में 7 फार्मूला हो सकता है। साहित्य जनेउधारियों का भी है। कस्ट से पाएं मुक्ति, उन्नति के साथ मंत्र, क्यों नहीं होती देवताओं की मूंछं, मिथक, अवतारवाद पुरातनपंथी गार्वेट के खिलाफ आपका मंथन से बुकलेट, 1 महीने 7 सेमिनार, कष्टों पर होगी चर्चा, कैसे होंगे बहुजन खुशहाल, सोशल एजेंडा, अपने इतिहास को जानें रेषनल इतिहास, आर्योें का इतिहास। कहा जाता है कि हमारे यहां उन्नत सभ्यताएं थीं। लेकिन इस पर किसी इतिहासकार ने कुछ नहीं लिखा। इसी कारण हमारा सबाॅल्टर्न इतिहास पिछड़ गया।

लखनउ से आए रिहाई मंच के साथी राजीव यादव ने कहा कि भगवा ताकतों से निबटने के लिए हमें हर स्तर पर तकनीक विकसित करनी होगी। भाजपा के समानांतर हमें देष प्रेम की नई परिभाषा गढ़नी पड़ेगी। उतर प्रदेश में भगवा शक्तियों की बड़ी जीत हासिल हुई है। उन्होंने भागीदारी आंदोलन की चर्चा की और कहा कि जब तक राजनीतिक ढांचे को आंदोलन नहीं समझेगा तो दलितों के हिन्दूकरण को नहीं रोका जाएगा। गोरखनाथ पीठ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कबीर और गोरखनाथ में एक समानता मिलती है।

शब्बीरपुर की घटना की चर्चा करते हुए राजीव ने कहा कि यहां भाजपा आंबेडकर को लेकर दलित मुसलमानों में विभाजन करने में कामयाब हुई। उन्होंने आतंकवाद के नाम पर मुस्लिम समाज के बेगुनाह लोगों को मीडिया, प्रशासन और भगवा गुंडे द्वारा फसाए जाने से संदर्भित कई घटनाक्रमों की चर्चा की। हाल ही बिहार के नवादा और यास्मीन नामक महिला से जुड़े संदर्भ भी उद्घाटित किए और कहा कि दरअसल हमें आज गिरिराज सिंह पर चिंतित होना चाहिए। जो बिहार को गुजरात बनाना चाहते हैं। मेरी मान्यता है कि इसी तरह के और सारे युवा चौपाल लगाई जाए।

जे.एन.यू. से आए बीरेंद्र कुमार ने बहुत सारगर्भित अंदाज में अपनी बातें रखीं। कहा कि जे.एन.यू में पढ़ता हूं पुलिस की नजर में मैं माओवादी हूं। अगर मुसलमान होता तो आतंकवादी भी हो जाता। उन्होंने इतिहास लेखन को लक्षित करते हुए कहा कि प्रगतिषील इतिहासकारों ने भी आदिवासियों के संघर्ष और विद्रोह को गायब करके देखा। पिछड़ों, दलितों का सवाल एक तरह का नहीं है। 2017 में हमें नए कंटेंट एवं नए कांटेस्ट में इनकी बात करनी होगी। बिहार, यूपी में फासीवाद का चरित्र सिर्फ कम्यूनल ही नहीं जातिवादी भी है। सामाजिक न्याय के पुरानी खिलाड़ी बिक गए, खप गए उनको त्याजिए। इसका रास्ता संघर्ष के मैदानों से ही निकलेगा। विपक्ष सड़कों, खेतों और खलिहानों में है। यही फासीवाद को नेस्तनाबूद करेगा। यह जो संकट गहराया है उसकी जड़ में निजीकरण , काॅरपोरेट, रामरथ, कमंडल, रणवीर सेना, आतंक आदि मुख्य रहे हैं।

पटना के सामाजिक राजनीतिक विमर्शों की एक अपूर्व कड़ी रहे डाॅ.पी.एन.पी पाल ने कहा कि आर.एस.एस और भाजपा कई स्तरों पर बहुजन समाज को अपने अंदर समाहित करने की कोशिशों में लगी है। उन्होंने कहा कि संघ के लोग संगठित हैं। इनका नेटवर्क हर क्षेत्रों में है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,सरस्वती विद्यामंदिर, स्वयंसेवक, सदस्य, बजरंग दल के पूर्णकालिक सदस्य, प्रकाषन सदस्य, मजदूर संघ इनके कामों को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा आषा राम बापू, मोरारी बापू, रामदेव आदि लाखों साधू संत के रूप में ठग उनके विचार को मजबूत करने में लगे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा बहुजन समाज आज भी हिंदू धर्म के सारे कर्मकांडों का वाहक बना हुआ है। वामपंथ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे हाषिए पर क्यों चले गए? इसलिए कि जाति और वर्ग के सवाल को उन्होंने ठीक से समझा नहीं। उसका हल नहीं निकाला। लोहिया समाजवादी एक विकल्प दे सकते थे, लेकिन वे इसमें कामयाब नहीं हुए। मध्य जातियों से आए तमात नेताओं का पतन परिवार में हो गया। उन्होंने कहा कि व्यापक सृजन के जो हाथ हैं वही जातियां वर्तमान फासीवाद का विकल्प खड़ा कर सकती हैं।

कोचस, रोहतास से आए डाॅ. विजय प्रकाश सिंह ने कहा कि आज गांवों और कस्बों के 15 से 30 साल के बहुजन समाज के बच्चों का हिंदू सेवा समिति द्वारा ब्रेनबाष किया जा रहा है। इस चुनौती से आपको निबटना होगा। आपको जिला, प्रखंड पंचायत तक जाना होगा इसके लिए मैन पावर, पैसा, बुद्धिजीवी और समय सब चीजों की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की धज्जियां इस देष की संस्थाओं ने हर हमेशे उड़ाई है। 2007 में सुखदेव थोराट एवं पाल एटवेल के एक सर्वे की चर्चा करते हुए डाॅ विजय ने कहा कि नामी प्राइवेट उद्योग कंपनियां में यह जातिवाद किस कदर हावी है इसको यह शोध सामने लाता है। सवर्ण, ओबीसी, दलित सब के माक्र्स, नाम पता अलग-अलग थे। कंपनियों में उंची जाति वालों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। ओबीसी एसटी पर कंपनियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि उनके यहां 500 एम आर आते हैं उनमें एक भी ओबीसी एमआर नहीं आए। उन्होंने माना कि किसी भी देश में हाषिए पर खड़े वर्ग को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक मूलभूत समस्याओं से पार पाने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना ही सामाजिक न्याय है। 70 वर्षों की आजादी में बाधा पैदा किया गया है। अनुसूचित जातियों को आरक्षण मिल रहा है। क्लास वन नौकरियों में वे 12 % सीट ओबीसी/एस-सी/एसटी के हैं। ओबीसी की 5 % सीटें नहीं भरी गईं। फिर भी उनकी छाती फट रही है कि हमारी मेरिट मारी जा रही है। कहां गई तुम्हारी मेरिट जहां सैकड़ों मामले न्यायालयों में लंबित हैं।

अजीत आर्यन ने बढ़ते भगवा हमले पर चिंता जताई। कहा कि परिवर्तन आना चाहिए। यह काम अलग-अलग तरीके और माध्यमों से लोग कर रहे हैं। मेरी कामना है कि यहां से कोई दिषा निकले। नई राजनीति निकले। लोहिया ने छोटी राजनीति की बात कही थी। जो जनता को रोज-ब-रोज शासन-प्रशासन के साथ झेलने पड़ते हैं। उसी को उन्होंने बड़ी राजनीति कही थी। जमीन के लोग इन बातों को नहीं समझते। आज की चुनौती है कि हम आप अपनी विश्वसनीयता उनके बीच बना पाएं।

नागपुर से आए रिसर्च स्काॅलर एवं प्रो. शरद जायसवाल ने भारत और खासकर उतर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुए दंगों के कारणों की बारीक तफ्तीश की। कहा कि आज पष्चिमी उतर प्रदेश का हर तीसरा गांव दंगे की चपेट में है। वहां आर.एस.एस अपना घृणित प्रयोग कर रहा है। मुसलमानों को नमाज नहीं पढ़ने दिया जाता और उनकी पुरानी मस्जिदों को किसी पौराणिक हिन्दू मंदिर साबित करके पुलिस प्रशासन की मदद से उस पर प्रतिबंध लगावा देती है। इसमें पूरी तरह मीडिया और प्रशासन उनकी सहयोगी की भूमिका में है। इधर के दिनों में एक नया पैटर्न देखने को आया है। वे कोई शारीरिक हमला नहीं करते। उनका पूरा मकसद साइकोलाॅजिकल अटैक का है। वे मानते हैं कि डेमाग्राफी को बदला जाए। यह प्रयोग गुजरात, कानपुर,बिहार आदि देश के दूसरे शहरों में तीव्रता से किए जा रहे हैं।

संभल में इसी तरह की घटना दिखाई दी। आर.एस.एस. ने एक लिस्ट जारी की है। सुदर्शन टीवी ने आधे घंट का एक एपिसोड बना दिया और वह मस्जिद विवादित हो गई। शेरपुर में घटना हुई। वहां मुसलमानों से जमकर लूट-पाट की गई। इसमें पुलिस भी शरीक रही। इस घटना पर विपक्ष की ओर से कोई आवाज नहीं उठी। सपा, बसपा, कांग्रेस किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जबकि वहां से 35 कि.मी. दूर देबवंद है।

बिहार के नवादा में हाल के दिनों में जो घटनाएं मुसलमानों के साथ घटीं, उसमें सत्ताधारी पार्टी के एक एम.एल.सी के घर को भी नहीं बक्षा गया। वहां डेढ़ सौ से उपर घरों पर हमला किया गया। कई दुकानें जला दी गईं। पीरो में हमला हुआ लालू जी ने कोई बयान नहीं दिया। बिहार में हाईकोर्ट का निर्णय है कि किसी धार्मिक कार्य में डीजे नहीं बजेगा।

इसी डीजे की वजह से ज्यादातर जगहों पर दंगे हो रहे हैं। हाईकोर्ट का निर्देश है बावजूद इसके बिहार में इन मौकों पर डीजे बज रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासक वर्ग बदलाव से बहुत डरता है। इसीलिए इस तरह की घटनाओं पर वह चुपी साधे रहती है। उन्होंने माना कि हाशिए के लोगों की दमन की प्रक्रिया में वि.वि. सिस्टम भी इन्वाॅल्व रहा है। जे.एन.यू से लेकर हैदराबाद तक की घटनाओं में इसे आप पाते हैं।

कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन गौतम कुमार प्रीतम ने किया।

अरुण आनंद की रिपोर्ट
संपर्कः 22 किदवईपुरी, पटना-800001
संपर्कः 7870868022

 

 

 

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