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महान चिकित्सक ही नहीं,साहित्यिक साधु-पुरुष थे डॉ श्रीनिवास

पटना, 30 दिसम्बर। बिहार में हृदय-रोग चिकित्सा के जनक तथा इंदिरा गाँधी हृदय रोग संस्थान के संस्थापक-निदेशक डा श्रीनिवास एक महान चिकित्सक ही नही, आध्यात्मिक और साहित्यिक पुरुष थे। उनका व्यक्तित्व ऋषि-तुल्य साधु का था। वे कला,साहित्य और संगीत के आग्रही तथा उनके पोषक-उन्नायक थे। चिकित्सा-शास्त्र पर हीं नहीं, धर्म-अध्यात्म, दर्शन और साहित्य पर भी उन्होंने पुस्तकें लिखी। वे कोमल हृदय के अत्यंत भावुक, अनुरागी और सबके प्रिय व्यक्ति थे। सेवा,त्याग और वलिदान की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी थी। वे रोगियों को निःशुल्क सेवाएँ देते थे। निर्धन और बीमारों की सेवा वे ईश्वर की पूजा की तरह करते थे। वे एक श्रद्धास्पद और अनुकरणीय व्यक्तित्व थे।

यह बातें आज यहाँ साहित्य सम्मेलन में डा श्रीनिवास की 98वीं जयंती पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। डा सुलभ ने कहा कि, उनका सारस्वत व्यक्तित्व सहज हीं आकर्षित करता था। वे धार्मिक-एकता और समन्वय के पक्षधर थे और उदाहरण भी। उन्होंने अपने बड़े पुत्र का नाम उस्मान तथा दूसरे पुत्र का नाम आइंस्टाइन रखा था।

समारोह के मुख्य अतिथि और शिक्षाविद प्रो नवल किशोर चौधरी ने कहा कि, चिकित्सा-विज्ञान में, विशेष रूप से हृदय-रोग के क्षेत्र में उनका योगदान ऐतिहासिक था। वे केवल टन और मन के रोगों के ही नही बल्कि आत्मा के भी चिकित्सक थे।

अतिथियों का स्वागत करते हुए, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद ने कहा कि, डा श्रीनिवास संगीत से अगाध प्रेम रखते थे। जब भी भेंट होती वे गाना सुनाने का आग्रह करते, और आनंद विभोर होकर सुनते। वे मानव-शरीर में देव थे।

सम्मेलन के साहित्य मंत्री डा शिववंश पांडेय डा श्रीनिवास के पुत्र ताण्डव आइंस्टाइन समदर्शी, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा मधु वर्मा, डा कल्याणी कुसुम सिंह, डा मेहता नगेंद्र सिंह, ओम् प्रकाश पाण्डेय प्रकाश, बच्चा ठाकुर, डा विनय कुमार विष्णुपुरी, श्रीकांत सत्यदर्शी, राज कुमार प्रेमी, ई आंन्द किशोर मिश्र, डा आर प्रवेश तथा सुनील कुमार दूबे ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर आचार्य आनंद किशोर शास्त्री, सागरिका राय, शालिनी पाण्डेय, अंजुला कुमारी, जगदीश प्रसाद राय, आनंद मोहन झा, नेहाल कुमार सिंह, राज किशोर झा, ज्ञानेश्वर शर्मा, पं गणेश झा, सुधांशु कुमार तथा पवन कुमार मिश्र समेत बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे। मंच का संचालन सम्मेलन के अर्थमंत्री योगेन्द्र प्रसाद मिश्र ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन प्रबंध मंत्री कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

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