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मुझे खरीरदार चाहिये…

सुनो, सुनो, सुनो। भाई, बंधु, मित्रो सुनो।दुनियावालों सुनो। सभी देशों के राष्ट्रध्यक्षों सुनो। संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य देशों के नायक सुनो। विश्व बैंक, मुद्रा कोष, विश्व व्यापार संगठन, वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम के सदस्यों सुनो। जी-7, जी-8, जी-10, आसिआन, आसिआन डेवलेपमेंट बैंक वालों सुनो। अमेरिका सुनो, चीन सुनो, जापान सुनो, रूस सुनो, फ्रांस सुनो, जर्मनी सुनो, सउदी अरब सुनो, स्वीडन सुनो, इंग्लैंड सुनो, इजरायल सुनो, ईरान सुनो, यू0ए0ई0 सुनो। पूँजीपतियों सुनो, काॅरपोरेट जगत के सी0ई0ओ0 सुनो, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निदेशकों सुनो।

मैं दुनिया के एक ऐसे लोकतांत्रिक देश का प्रथम निर्वाचित ‘‘चैकीदार सह प्रधानसेवक हूँ, जो अपने देश के अर्थतंत्र की संरचनाओं को बेचना चाहता हूँ। मैं देश की नदियों को बेचना चाहता हूँ।

मैं अपने देश के सार्वजनिक क्षेत्र के नवरत्नों को बेचना चाहता हूँ। मैं अपने देश के सर्वाजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेचना चाहता हूँ। मैं अपने वैज्ञानिक संस्थानों, शोध संस्थानों को बेचना चाहता हूँ। मै अपनी देश की कृषि योग्य जमीनों को बेचना चाहता हूँ। मैं अपने देश के जंगलों-पहाड़ों को बेचना चाहता हूँ। मैं अपनी देश की गरीबी बेचना चाहता हूँ। मैं अपने संस्कृति को बेचना चाहता हूँ।  मैं अपने देशज विश्व विद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों को बेचना चाहता हूँ। मैं अपने देश की सामाजिक विविधता को बेचना चाहता हूँ। मैं अपने देश के ऐताहासिक धरोहरों एवं प्राचीन स्थापत्य कला एवं शैली को बेचना चाहता हूँ।

आओ, आओ। सब मिलकर आओ। दक्षिण से आओ, उत्तर से आओ, पश्चिम से आओ, पूरब से आओ, यूरोप से आओ, अफ्रिका से आओ, एशिया से आओ। आओ जल्दी आओ। पैसा लाओ, शेयर लाओ, टेक्नोलाजी लाओ, विशेषज्ञ लाओ, पी0आर0ओ0 लाओ, परामर्शी लाओ, मेरे  देश के वैभव को खरीद ले जाओ। हमारे उन वैभवों को खरीद ले जाओ, हमारे उन धरोहरों को खरीद ले जाओ, हमारी उन सांस्कृतिक विरासतों को खरीद ले जाओ, हमारे उन खेत-खद्यानों, हमारे जंगल- नदि, तालाब, पोखर, आहर, पईन को खरीद ले जाओ, जिसको हमारे पुरखों ने बड़े ही जतन से बचाकर हमें हमारी नई पीढ़ी के लिये सौपा है। आओ हमारे ज्ञान-विज्ञान को ले जाओ। हमारे साहित्य को ले जाओ।

आओ वालमार्ट आओ। आओ एमेजन आओ। आओ फोर्टिस आओ। आओ रिलायन्स बंधुओं आओ। अडानी बंधुओं आओ। नीरव मोदी तुम भी आओ। विजय मालया तुम भी आ जाओ। ललित मोदी तुम भी आओ। आई.बी.एम. आओ। निर्वाचित चैकिदार -सह-प्रधान सेवक के आह्नवान पर आओ। आओ, न केवल मेरे धरोहरो को खरीदो, मेरे देशज नवरत्नों को खरीदो, न केवल हमारी नदियों को खरीदो, न केवल हमारे खद्यानों को खरीदो, न हमारे कृषि योग्य जमीनों को खरीदो। न केवल हमारे गरीबों के सस्ते श्रम के खरीदो। बल्कि आप अपना स्टार्ट अप शुरू करो। आओ, हम सुनिश्चित करेंगे कि आपके द्वारा खरीदी जानेवाली वस्तुओं के लिये हम अपने संवैधानिक प्रावधानो को भी संशोधित करेंगे, बदलेंगे। आओ हमें अपेक्षा है कि आप हमें हमारे संविधान में भी संसोधन करने में हमारी मदद जरूर करेंगे।

आप शीघ्र आयेंगे। मुझे यकीन है कि भारतरूपी एक नव लोकतांत्रिक राष्ट्र के निवार्चित चैकिदार -सह- प्रधान सेवक के कंधे से कंधा मिलाकर हमारे साथ चलेंगे। धन्यवाद।

ग़ालिब जनसरोकार से जुड़े सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता है।

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