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राम निहोरा की बात लालू ने मानी होती, तो आज जेल में न होते !

राजद सुप्रीमो लालू यादव चारा घोटाला मामले में जेल में बंद हैं। पिछले 19 वर्षों से चल रहा यह मामला इतिहास की एक ऐसी घटना है, जिसकी चर्चा वर्षों तक होगी। चारा घोटाले से जुड़े मामले में बहुत सारी ऐसी बातें हैं, जिनसे पता चलता है कि लालू प्रसाद ने अगर वक्त रहते कार्रवाई की होती तो उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि राम निहोरा यादव नाम के एक कार्यकर्त्ता ने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को एक खुला पत्र लिखकर उन्हें आगाह किया था कि उनके नाम पर डॉ राणा पशुपालन विभाग में उगाही कर रहे हैं। राम निहोरा ने उस पत्र में उन सभी बातों का जिक्र किया था, जिनसे लालू प्रसाद को सावधान होने की जरूरत थी। लेकिन लालू प्रसाद ने परवाह नहीं की।

इस पत्र ने बिहार की राजनीति में तूफान ला दिया था और पत्र लिखने वाले कार्यकर्ता के हिम्मत की चारों ओर चर्चा हुई थी। लालू को लिखा गया पत्र इतना महत्वपूर्ण था कि उसे सबूत के तौर पर घोटाले में जांच एजेंसियों ने भी रखा। इतना ही नहीं, हाल में चारा घोटाला 64ए/96 मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने अपने फैसले में लिखा है कि आर के राणा खुद और लालू प्रसाद के नाम पर उगाही करते थे।

डॉ राणा के इन कारनामों की जानकारी सिर्फ उनके कार्यकर्ता ने ही उन तक नहीं पहुंचाई थी वरन पशुपालन विभाग में लूट की कहानी से कई लोग, जिनमें पत्रकार और राजनेता भी थे, अवगत थे।

मालूम हो कि राम निहोरा यादव पटना जिला के जनता दल के सक्रिय कार्यकर्ता थे। राम निहोरा यादव ने मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के नाम खुला पत्र जारी कर डॉ. आर के राणा के एक-एक कारनामे को सार्वजनिक किया था। इतना ही नहीं पत्र सामने आने के बाद लोगों ने राम निहोरा यादव की लालू के डर की वजह से तारीफ तक नहीं की। उन दिनों लालू के सामने सच कहने की हिम्मत किसी में नहीं थी। ऐसे में निहोरा यादव ने पूरी बात को पत्र के रूप में छपवाकर मुख्यमंत्री तक पहुंचाया था।

राम निहोरा यादव ने पत्र में लालू प्रसाद को संबोधित करते हुए लिखा था, यदि डॉ. राणा के यहां छापेमारी की जाये, तो पचास लाख रुपया उसके घर से नकद निकल सकता है। यह सारा रुपया आपके नाम यानी मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के नाम पर दलाली में पशुपालन माफियाओं से वसूल कर रखा गया है।’

आगे निहोरा ने लिखा था कि डॉ. राणा ने वेटनरी कैंपस में बीस वर्षों से लूट मचाया और अब आप का नाम बेचकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को लूट रहे हैं। आपका नाम लेकर पूरे बिहार में राणा और उसके लोग अराजकता फैला रहे हैं और पैसे की वसूली कर रहे हैं। उसका प्रभाव पशुपालन माफिया में आपकी व्यक्तिगत कमजोरी के चलते बढ़ा हुआ है।

निहोरा ने लिखा कि विधानसभा की निवेदन समिति ने 1989 में डॉ. राणा को पटना जिला से हटाने तथा निगरानी विभाग से जांच कराने का निर्देश दिया, लेकिन वह ठंडा पड़ गया है।

निहोरा ने लिखा था, ‘माननीय मुख्यमंत्री लालू प्रसाद जी। डॉ. राणा यह प्रचार कर रहा है कि आपका निजी मकान पटना के शेखपुरा में 15 लाख का तथा आपके गांव फुलवरिया में पांच लाख का उसने ही बनवाया है।

अपने पत्र में निहोरा ने यह भी लिखा कि विधायकों को मंत्री बनाने के नाम पर राणा ठग रहा है और बिहार भवन, दिल्ली में रहकर आपके नाम पर लटर-पटर और उलूर-जुलूर कर रहा है।

निहोरा यादव राजद सुप्रीमो से पूछा था कि आप डॉ. राणा को अपने साथ कैसे रखे हैं, लोगों को आश्चर्य हो रहा है। आपके नाम पर कई तरह का दलाली का धंधा शुरू किया है। लोग दबी जुबान में बोल रहे हैं कि क्या कारण है कि लालू जी चुप हैं।

काश ! लालू प्रसाद ने अपने कर्मठ कार्यकर्त्ता राम निहोरा यादव की बातों पर ध्यान दिया होता तो आज उन्हें यह दिन देखना नहीं पड़ता।

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