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लालू अपना रहे वर्षों पुराना फॉर्मूला !

बिहार में महागठबंधन सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। नीतीश कुमार के घर जो जदयू विधायकों की बैठक हुई लेकिन उसमें सिर्फ़ कल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर ही चर्चा हुई। कयास लगाया जा रहा था कि इस बैठक में जदयू की तरफ़ से कुछ कड़े फ़ैसले लिए जा सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

वहीं दूसरी ओर आज आरजेडी विधायकों की एक बैठक लालू प्रसाद यादव के आवास १० सर्कुलर रोड पर हुई। आरजेडी ने कहा है कि वो अपने पुराने फ़ैसले पर कायम हैं। वहां भी चर्चा राष्ट्रपति चुनाव पर ही हुई हांलाकि इस बैठक का मकसद राष्ट्रपति चुनाव बताया गया।

राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि लालू वर्षों पुराना फॉर्मूला अपना रहे हैं। मालूम हो कि
लालू प्रसाद यादव 1990 के दौरान जब वह मुख्यमंत्री थे, तो समूचा विपक्ष चारा घोटाले के आरोप में उनसे इस्तीफे की मांग कर रहा था, लेकिन लालू प्रसाद ने तब तक इस्तीफा नहीं दिया, जब तक कि कोर्ट ने उनके खिलाफ ऑर्डर जारी नहीं कर दिया।

लालू प्रसाद ने 1997 में कोर्ट द्वारा उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी किए जाने के बाद इस्तीफा दिया था। मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सत्ता सौंप दी थी। इस समय लालू अपनी इसी पुरानी रणनीति पर काम करते हुए नजर आ रहे हैं। दो दशक बाद आज उनकी पार्टी लगभग उसी स्थिति से गुजर रही है लेकिन इस बार सरकार गठबंधन की है।

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