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लालू के पद्मावती के विरोधियों को समर्थन का क्या है मायने !

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद वक्त की नब्ज पकड़ना खूब जानते हैं। उन्हें मालूम है कि कब क्या बोलना चाहिए। राजद सुप्रीमो जब भी किसी विवादास्पद मुद्दे पर बयान देते हैं, तो वह हवा का रूख भांपकर ही देते हैं। लालू यादव ने संजय लीला भंसाली की विवादों में फंसी फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर कुछ ऐसा ही कहा है।

लालू यादव ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में यह कहकर विरोधियों के विरोध को हवा दे दी है कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए। जबकि, उन्हीं के बेटे तेजस्वी यादव ने उपमुख्यमंत्री रहते वक्त गरजते हुए यह कहा था कि संजय लीला भंसाली चाहें, तो वह बिहार में आकर फिल्म की शूटिंग कर सकते हैं। उस वक्त राजस्थान में भंसाली की फिल्म के सेट को तोड़ दिया गया था और शूटिंग बाधित हो गयी थी।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिये बयान में लालू यादव ने कहा कि जो लोग जो लोग ‘पद्मावती’ फिल्म का विरोध कर रहे हैं वो सही हैं। इतिहास को बदलने की कोशिश नहीं करना चाहिए। रानी पद्मावती का जीवन गौरवशाली और सम्मानजनक रहा है। वे राजस्थान के इतिहास की एक अहम् कड़ी है और उनके भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहिए।

मालूम हो कि जनवरी में करनी सेना के कार्यकर्ताओं पर राजस्थान में पद्मावती फिल्म के सेट पर तोड़ फोड़ के अलावा संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट का भी आरोप लगा था। उस वक्त लालू यादव ने ट्वीट कर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए लिखा था कि बिहार होता तो भाजपाई मीडियावाला जातिवाद और जंगलराज का रायता फैला कर बिहार को बदनाम कर रहा होता। बीजेपी शासित प्रदेश है तो इस सब चुप है।

संजय लीला भंसाली के साथ विवाद के बाद लालू से एक कदम आगे बढ़ते हुए तेजस्वी यादव नें भंसाली को बिहार के वैशाली में आकर फिल्म की शूटिंग का न्योता दिया था। तेजस्वी ने ट्वीट किया था कि मैं बालीवुड को निमंत्रण देता हूं कि वह ऐतिहासिक, महिमापूर्ण और सांस्कृतिक रूप से धनी विकासशील बिहार में आएं और फिल्म का निर्माण करें। हमलोग हर तरह की सहायता हर हाल में देगें।

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