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लोगों को ‘ओल्ड मॉन्क’ रम पिलाने वाले कपिल मोहन नहीं रहे, जानिए उनके बारे में सब कुछ

रम का नाम लेते ही जिस ब्रांड का नाम सबसे पहले आता है वो है ओल्ड मॉन्क रम। ओल्ड मॉन्क रम की सफलता के पीछे जिस व्यक्ति का हाथ था, वे थे ब्रिगेडियर कपिल मोहन। ६ जनवरी को ओल्ड मॉन्क रम की निर्माता कंपनी मोहन मीकिन के चेयरमैन कपिल मोहन का निधन ह्दयाघात से मोहन नगर (गाजियाबाद) में हो गया। वे 88 साल के थे।

‘ओल्ड मॉन्क’ दिसंबर 1954 में लॉन्च की गयी थी। एक समय ऐसा भी था, जब यह पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली रम बन गई थी। शराब की दुनिया में अपनी एक खास जगह बनाने वाली ओल्ड मॉन्क पहली ऐसी रम थी, जो भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में सबसे बड़ी ब्रैंड बन गई थी।

आइए जानते है भारत के सबसे पहले शराब कारोबारी परिवार से आने वाले कपिल मोहन की सफलता की कहानी।

ओल्ड मॉन्क रम बनने की कहानी की शुरूआत आजादी से पहले सन 1885 में होती है। जलियावाला बाग हत्याकांड वाले जनरल डायर के पिता एडवर्ड डायर ने साल 1885 में हिमाचल के कसौली में एक शराब कंपनी खोली थी जिसका नाम था डायर ब्रियुरी। आजादी के बाद इस कंपनी को एएन मोहन ने खरीद लिया और इस कंपनी का नाम बदलकर मोहन मीकिन लिमिटेड कर दिया। कपिल मोहन इन्हीं एएन मोहन के बेटे थे।

कपिल मोहन भारतीय सेना में थे। वे सेना में ब्रिगेडियर के पद से रिटायर्ड हुए थे। भारतीय सेना में उनकी सेवाओं के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल के अवार्ड से नवाजा गया था। सेना से रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने मोहन मीकिन लिमिटेड कंपनी की संभाली। कपिल मोहन ने चेयरमैन बनने के बाद कंपनी में कई सारे बदलाव किए जिससे न सिर्फ कंपनी बल्कि ओल्ड मॉन्क रम भारत का सबसे मशहूर ब्रांड बन गया।

70 के दशक के शुरुआत में अपने बड़े भाई वी आर मोहन की मौत के बाद उन्हें इस कंपनी की जिम्मेदारी मिली और चौकोर मोटे शीशे की बोतल में पैक डार्क रम एक वैश्विक ब्रांड के तौर पर उभरा। 2000 के दशक के मध्य तक यह देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला शराब ब्रांड था जिसे मिलिट्री कैंटीनों का संरक्षण हासिल था। ओल्ड मॉन्क ने अपना दबदबा बनाए रखा हालांकि विजय माल्या के नेतृत्व वाले यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह और दूसरी कंपनियों से प्रतिस्‍पर्धा मिलने की वजह से दूसरे ब्रांड मसलन गोल्डन ईगल की हालत खस्ता हो गई। हालांकि मार्केटिंग की कोशिशों के बजाय ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया से बाजार पर इन ब्रांडों का दबदबा फिर से कायम होता दिख रहा है।

मोहन ने 2012 में एक साक्षात्कार में कहा था, ‘हम विज्ञापन नहीं देते हैं और जब तक मैं इस कंपनी का नेतृत्व करूंगा तब तक हम विज्ञापन नहीं देंगे। मेरे विज्ञापन का सबसे बेहतर तरीका उत्पाद है। जब यह आपके पास होगा और आप इसका स्वाद लेंगे तब आप इस अंतर को समझेंगे और खुद ही इसके बारे में बताएंगे। यही सबसे बेहतर विज्ञापन है।’

मोहन हिमाचल प्रदेश के सोलन में नगर समिति के अध्यक्ष थे जहां कंपनी शराब तैयार करती है। ओल्ड मॉन्क और दूसरे ब्रांडों की सफलता का एक राज सोलन के प्राकृतिक झरने से निकला हुआ पानी था जिसका इस्तेमाल 150 साल पहले भी होता था जब शराब बनाने वाली फैक्टरी पहली बार लगाई गई थी। उनके करीबी लोगों का कहना है कि पद्मश्री पुरस्कार पाने वाले मोहन किसी भी बदलाव के विरुद्ध थे और वह चीजों को परंपरागत तरीके से करना चाहते थे।

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