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वह बिहारी लेखक जिसे गूगल ने किया याद

गूगल ने सबको हैरान करते हुए आज एक ऐसे बिहारी उर्दू लेखक को अपना डूडल बनाया है जिसे बिहार के लोग ही नहीं जानते हैं। नालंदा जिले के अस्थावां के देसना गांव में पैदा हुए अब्दुल कावी देसनवी न सिर्फ उर्दू भाषा के जानकार बल्कि बड़े लेखक भी थे। मुहम्मद इकबाल, मिर्जा गालिब और अब्दुल कलाम आजाद पर लिखी उनकी बिबिलोग्राफी काफी मशहूर हैं।

जावेद अख्तर और इकबाल मसूद जैसे शायरों को मार्गदर्शन देने वाले अब्दुल कावी देसनवी 1 नवंबर 1930 को हुआ था। उनके पिता सैयद मोहम्मद सईद रजा थे जो उर्दू, अरबी और फारसी भाषाओं के प्रोफेसर थे। यही वजह रही कि अब्दुल कावी देसनवी को बचपन से ही भाषाओं का अच्छा ज्ञान रहा।

गूगल ने दसनवी के लिए ट्वीट किया है, he wrote about those, who wrote about love and life. इसका मायने है- उन्होंने उन लोगों के बारे में लिखा, जिन्होंने मुहब्बत और जिंदगी के बारे में लिखा।

यह इशारा गालिब और इकबाल की तरफ है। अब्दुल कावी देसनवी के यूं तो कई प्रसिद्ध कृतियां हैं, लेकिन ‘हयात-ए-अबुल कलाम आजाद’ का उर्दू साहित्य में अलग ही स्थान है। ये किताब स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद के जीवन पर लिखी गई थी, जिसे साल 2000 में प्रकाशित किया गया था।

मुंबई में पढाई पूरी करने के बाद देसनवी ने 1961 में भोपाल के सैफ़िया कॉलेज में व्याख्याता की नौकरी कर ली। 1979 से 1984 तक मजलिस ए आम अंजुमन तरक़्की ए उर्दू (हिन्द) के चुने हुए मेम्बर रहे। 1978 से 1979 के दौरान ऑल इंडिया रेडियो भोपाल के प्रोग्राम एडवाईज़री कमिटी के मेम्बर भी रहे। 1977 से 1985 के बीच चार साल बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ़ स्टाडीज़ उर्दू, पर्शयन एैंड अरेबिक के चेयरमैन रहे।

1980 से 1982 तक बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी के आर्ट फ़ैकल्टी के डीन रहे और साथ ही बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी के इसक्युटिव कांसिल के मेम्बर भी (1980–1982) के दौरान रहे इसके बाद 1983 से 1985 तक सैफ़िया कॉलेज भोपाल के प्रिंसपल रहे।

2011 में वृद्ध अवस्था से जुड़ी बीमारियों के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। 7 जुलाई 2011 को उनका निधन हो गया। उनकी कालजयी रचनाओं और उर्दू साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा।

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