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समाज की बौद्धिक-विकलांगता शारीरिक विकलांगता से अधिक ख़तरनाक: न्यायमूर्ति

भारतीय समाज में बहुत तेज़ी से बौद्धिक-विकलांगता बढ़ रही है। यह किसी की शारीरिक विकलांगता से अधिक ख़तरनाक है। लोग स्वार्थी और भ्रष्ट होते जा रहे हैं। व्यक्ति अपनी बौद्धिक-शक्ति का समाज के हित के विरुद्ध और निहायत स्वार्थ में दुरुपयोग कर रहा है। विकलांग जनों के विषय में भी हमारी सोंच नकारात्मक है। बौद्धिक सामर्थ्य का उचित प्रयोग कर हीं हम समाज को उन्नत कर सकते हैं।

यह बातें गत बुधवार को, भारतीय पुनर्वास परिषद के सौजन्य से बेउर स्थित इंडियन इंस्टिच्युट औफ़ हेल्थ एजुकेशन ऐंड रिसर्च में आयोजित ५ दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद ने कही। श्री प्रसाद ने कहा कि, विकलांग बच्चों की क्षमता का आकलन और मूल्याँकन तथा उनकी विशेष शिक्षा के लिए आज से आरंभ हो रहे विशेष सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यशाला का लाभ तभी है, जब हम सकारात्मक सोंच के साथ प्रशिक्षण पूरा करें और उसका उपयोग समाज के हित में करें।

समारोह के मुख्य अतिथि और पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा एस एन पी सिन्हा ने कहा कि, स्वयं को नियमित रूप से शिक्षित करनेवाले शिक्षक हीं विद्यार्थियों को सही शिक्षा दे सकता है। इसलिए शिक्षकों एवं अन्य पुनर्वास कर्मियों को भी अपनी शिक्षा को निरंतर अद्यतन करते रहना चाहिए।

मगध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मेजर बलबीर सिंह ‘भसीन’ ने प्रतिभागी विशेष शिक्षकों और पुनर्वास कर्मियों का उत्साह-वर्द्धन करते हुए कहा कि, हर एक व्यक्ति को स्वयं और अपने कार्यों पर विश्वास होना चाहिए। निष्ठा और विश्वास से किए गए कार्य अवश्य सफल होते हैं।

सभा की अध्यक्षता करते हुए, संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने कहा कि, भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा नियमित अंतराल पर इस ‘सतत पुनर्वास शिक्षण’ कार्यक्रम के संचालन का उद्देश्य यही है कि, विकलांगता के क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी पुनर्वास-कर्मी और विशेष शिक्षक, इस तकनीक में तेज़ी से हो रही वैज्ञानिक उन्नति से अवगत होते रहें, ताकि वैज्ञानिक-उपलब्धियों का लाभ समाज को अविलंब प्राप्त हो। इस कार्यशाला का विषय “विशेष शिक्षा में शैक्षिक आकलन और मूल्याँकन” है, जिसमें इसकी तकनीक में हुए विकास से विशेषज्ञों को अवगत कराया जाएगा।

अतिथियों का स्वागत संस्थान के विशेष शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो कपिलमुनि दूबे ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन प्रशासी अधिकारी सूबेदार मेजर एस के झा ने किया। मंच का संचालन किया प्रो संतोष कुमार सिंह ने। इस अवसर पर प्रो विधुप्रिया के के, प्रो रणजीत कुमार, विशेष-शिक्षिका सरिता कुमारी, अंजु सिन्हा, डा नवनीत कुमार, कृष्णा कुमार तथा प्रो समिता झा समेत बड़ी संख्या में संस्थान के शिक्षक, प्रतिभागी और छात्रगण उपस्थित थे।

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