+91 943 029 3163 info@biharkhojkhabar.com

हमारी धरती के लिए यह बहुत खतरनाक समय है

stephen-hawkingकैंब्रिज के एक भौतिक शास्त्री के रूप में मुझे खासा विशेषाधिकार मिले हुए हैं। विश्वविख्यात विश्वविद्यालय के कारण इस शहर को भी एक खास दर्जा हासिल है। यहां की वैज्ञानिक बिरादरी भी अपने आप में उच्च नैतिक और बौद्धिक मूल्यों वाली है, जिसका हिस्सा बनने का मौका मुझे मेरी युवावस्था की शुरुआत में ही मिल गया। यह भी इसी बिरादरी के एक समूह का सच है कि वह गाहे-बगाहे खुद को किसी शिखर से कम नहीं समझता और मुगालते में रहता है। एक भौतिक शास्त्री के रूप मैंने काफी समय इनके साथ बिताया है। यहां कहना पड़ता है कि मेरी किताबों से मुझे मिला सेलेब्रिटी का दर्जा हो या बीमारी से मिला अकेलापन, मुझे यही लगता कि मेरा कल्पना-लोक पहले से ज्यादा विशाल होता जा रहा है।

अमेरिका और ब्रिटेन के उदाहरण सामने हैं। दोनों ही देशों में कुलीन वर्ग का अस्वीकार किसी और के लिए कुछ भी हो, मुझे अपने करीब लगता है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ की सदस्यता से इनकार का मामला हो या अमेरिकियों का डोनाल्ड ट्रंप को गले लगाना, कोई संदेह नहीं कि इसके पीछे नेतृत्व की ओर से मिली उपेक्षा के कारण पनपी नाराजगी रही होगी। इस बात से तो सब सहमत होंगे कि यह वही क्षण होते हैं, जब उपेक्षित लोग भी कुलीनों को नकारने के लिए खडे़ हो जाते हैं। अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ब्रेग्जिट या ट्रंप की जीत पर अभिजन क्या और कैसे रिएक्ट करता है।

भूमंडलीकरण के आर्थिक असर और तेजी से चल रहे प्रौद्योगिक परिवर्तन को लेकर चिंताएं समझी जा सकती हैं। तकनीक के बढ़ते प्रयोग ने पारंपरिक उद्योगों में रोजगार के अवसर पहले ही सीमित कर दिए हैं। हम उस विश्व में रह रहे हैं, जहां आर्थिक खाई लगातार बढ़ रही है। एक ऐसा विश्व, जहां लोग स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग की बात भूलकर यह सोचें कि उनके जीवकोपार्जन के रास्ते बंद होते जा रहे हैं। ऐसे में, इस बात पर आश्चर्य क्यों हो कि वे जिस नए की तलाश कर रहे हैं, ट्रंप और ब्रेग्जिट उसे उसके असली प्रतिनिधि दिखाई देते हैं।

यह इंटरनेट और सोशल मीडिया के वैश्वीकरण के उस अनचाहे असर का प्रतिफल भी है, जिसने अतीत की अपेक्षा सब कुछ जस का तस सामने दिखा दिया है। मेरे लिए संवाद की खातिर तकनीकी का इस्तेमाल एक सुखद और सकारात्मक अनुभव है। शायद इसके बिना मैं वह सब न कर पाता, जो कर पाया। लेकिन इसका एक और भी मतलब है। इसके कारण हर वह सच सामने है, जिसका दिखना उतना जरूरी नहीं। हर हाथ में फोन तो है, भले पानी न हो। इस फोन ने चमक भी दिखाई है, विभेद की खाई भी बढ़ाई है। नतीजे सीधे सपाट हैं। उसी चमक को देख हमारे ग्रामीण गरीब बड़ी-बड़ी उम्मीदें लेकर झुंड के झुंड शहरों और कस्बों की ओर पलायन कर रहे हैं और हर दिन एक नए मायाजाल में उलझते चले जा रहे हैं।

मेरे लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय है कि हम सब एक साथ नए तरीके से कैसे काम करें? हमारी प्रजातियों के लिए यह जरूरी है। जलवायु परिवर्तन, खाद्यान्न उत्पादन, बढ़ती जनसंख्या, दूसरी प्रजातियों की बर्बादी, संक्रामक रोग और महासागरों का अम्लीकरण जैसे तमाम महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ये बताते हैं कि हम मानवता के विकास के सबसे बुरे दौर में हैं। हमारे पास अपने ग्रह को नष्ट करने की तकनीकी तो मौजूद है, पर हम वह नहीं तलाश पाए, जो ऐसा होने से बचा सके। संभव है, कुछ सौ वर्षों में हम नक्षत्रों के आसपास भी अपनी कॉलोनी बना और बसा ले जाएं, मगर फिलहाल हमारे पास एक ग्रह पृथ्वी है और सबसे बड़ी जरूरत इसे बचाने के लिए मिलकर काम करने की है।

ऐसा करने के लिए हमें तमाम देशों के अंदर और बाहर की सभी बाधाएं तोड़नी होंगी। ऐसे समय में, जब सिर्फ नौकरी ही नहीं, उद्योगों की संभावनाएं भी क्षीण हो रही हों, हमारी जिम्मेदारी है कि लोगों को नए विश्व के लिए तैयार करें। इसके लिए लोगों की आर्थिक मदद करनी होगी। किसी भी तरह से पलायन रोकना होगा। हम यह कर सकते हैं। मैं अपनी प्रजातियों के भविष्य को लेकर बहुत आशावादी हूं। लेकिन जरूरी होगा कि लंदन से लेकर हॉवर्ड, कैंब्रिज से लेकर हॉलीवुड तक के विद्वान अतीत से सबक लें।

स्टीफन हॉकिन्स, प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री
साभार: द गार्जियन

Bihar Khoj Khabar
About the Author
Bihar Khoj Khabar is a premier News Portal Website. It contains news of National, International, State Label and lots More..

Related Posts

Leave a Reply

*