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हमारे शहरों को सूखा प्रभावित होने से बचाने में ऐसे मददगार साबित हो सकता है इजरायल

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामन नेतन्याहू अपने छह दिवसीय दौरे पर भारत में हैं. इस दौरे पर भारत और इजरायल के बीच कई तरह के समझौते होंगे, इनमें से एक सबसे अहम समझौता जो हो सकता है कि वह पेयजल को लेकर है. भारत एक उभरता हुआ देश है और दिन प्रति दिन यहां पर पीने के पानी की डिमांड बढ़ रही है, लेकिन इसे मुहैया कराने के तरीके नहीं. एक रिपोर्ट की मानें, तो 2030 तक भारत की पेयजल में डिमांड सप्लाई से कहीं ज्यादा पहुंच जाएगी. लेकिन इस कमी को दूर करने में इजरायल ही हमारी मदद कर सकता है.

क्या है परेशानी?

भारत में ग्राउंड लेवल का पानी काफी तेजी से कम हो रहा है. आज के समय में भारत, अमेरिका और चीन से भी ज्यादा मात्रा में ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल करता है. लेकिन स्थिति दर्शाती है कि करीब 29 फीसदी क्षेत्र में भारत की इस समय स्थिति ठीक नहीं है. जिसका सीधा असर भारत की खेती पर पड़ सकता है. 2009 में नासा ने भी कहा था कि भारत के पंजाब, हरियाणा और राजस्थान इस समय काफी खराब परिस्थिति से गुजर रहे हैं.

क्या इजरायल होगा मददगार?

इस मामले में इजरायल भारत का मददगार साबित हो सकता है. क्योंकि करीब 10 साल पहले वहां भी इसी तरह की समस्या थी. लेकिन एक दशक में ही इजरायल ने अपने आप को पानी की कमी वाले देश से हटाकर खुद को सरप्लस वाले देशों में शामिल कर लिया है. चीन, जापान और कनाडा ने भी अपने देशों की इस समस्या का दूर करने के लिए इजरायल की मदद मांगी है.

कहां और कैसे काम आएगा इजरायल?

– रिपोर्ट की मानें, तो भारत और इजरायल की कुछ एजेंसियां इस बाबत काम कर रही हैं कि किस तरह भारत के किसानों को मदद की जाए. इसके तहत जिस विषय पर काम हो रहा है उसमें करीब 65 फीसदी पानी की बचत के साथ दस गुना फसल पैदा करना सबसे अहम है. इस प्रोजेक्ट के तहत अभी इस्तेमाल किए जाने वाले पानी का 90 फीसदी ग्राउंडवाटर बचाया जा सकता है.

– इजरायल दुनिया के कुछ ऐसे देशों में शामिल है जो कि समुद्री पानी को पीने के पानी योग्य बनाता हो. पीएम मोदी ने अपने इजरायली दौरे पर ऐसी ही एक गाड़ी से फिल्टर पानी को पिया भी था. उम्मीद जताई जा रही है कि इजरायली पीएम अपने दौरे पर पीएम मोदी को वही जीप गिफ्ट भी दे सकते हैं.

– इसके अलावा सोलर पावर के उपयोग से किस तरह पीने के पानी की मात्रा बढ़ाई जाए इस क्षेत्र में भी इजरायल ने काफी काम किया है. भारत भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काफी काम कर रहा है इस लिहाज से इजरायल भारत की मदद कर सकता है.

केपटाउन भी झेल रहा ऐसी समस्या

दक्षिण अफ्रीका का दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाला केपटाउन भी आज के समय में इसी समस्या से जूझ रहा है. इसी समस्या का सामना करने के लिए इजरायल में हर जगह पोस्टर लगे हैं कि कृप्या फ्लश का प्रयोग मत कीजिए, क्योंकि उससे करीब पांच दिन का पीने का पानी खराब होता है.

आपको बता दें कि केपटाउन में एक परिवार को 87 लीटर प्रति दिन से अधिक पानी खर्च करने पर मनाही है. यही कारण है कि लंबे क्रिकेट दौरे पर गई हुई भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को नहाने के लिए सिर्फ 2 मिनट शॉवर का प्रयोग करने को कहा था.

साभार: आजतक

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