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हिन्द स्वराज ने मेरे जीवन को बदल दिया: तेनजिन सुन्दु

‘ए एन सिन्हा  समाज अध्ययन संस्थान ‘में बिहार भूदान यज्ञ कमिटी और समुदाय के सौजन्य से “हिंसा और युद्ध के खिलाफ खड़ी गांधी की शिक्षा पद्धति” पर एक अंतराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

सत्र का विषय प्रवेश करते हुइ करते हुए भूदान यज्ञ कमिटी के अध्यक्ष कुमार शुभमूर्ति  ने कहा, “आज कि शिक्षा प्रणाली में हिंसा निहित है वह उसकी सामग्री और प्रक्रिया दोनों में है। महात्मा गांधी ने इस विषय पर काफी विचार किया और कई प्रयोग किये और अंत में उन्होंने देश के सामने बुनियादी तालीम की अवधारणा रखी। साथ ही बुनियादी तालीम की इस अवधारणा को उन्होंने अपने सत्याग्रह की अवधारणा से ज्यादा कीमती बताया।”

‌कुमार शुभमूर्ति ने आगे बताया  कहा, “हिंसा के विरुद्ध जो जर्मन शिक्षाविद डॉ ग्रेगाँर बाजटेसिक ने इस बात पर जोर दिया उच्च शिक्षा में हो रहे खर्च को कम करने के लिए जोर दिया जिससे निम्न आय के लोग शिक्षा प्राप्त कर सके।  जबतक समाज में बदलाव नही होगा तबतक शिक्षा में बदलाव नहीं होगा।”

‌कनाडा से आए भारतीय मूल के विद्वान (मैकमास्टर विधालय) रामशंकर सिंह ( जो कनाडा में गांधी दर्शन का प्रचार प्रसार करते है ने कहा,  “छात्रों को रचनात्मक सामाजिक सक्रियता बढ़ाई जानी चाहिए विशेषकर छात्रों के नेतृत्व गुण को प्रोत्साहित करना चाहिए।”

‌शिक्षाविद डुनु राय ने गांधी की शिक्षा व्यवस्था को स्वच्छ्ता अभियान से जोड़ा। इस सत्र में बात रखते हुए तेनजिन सुन्दु ने कहा, “हिन्द स्वराज ने मेरे जीवन को बदल दिया।साथ ही मैंने हिन्द स्वराज को कई तिब्बती लोगों को पढ़ाया है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में मानवीय मूल्यों को स्थापित करने के लिए लगातार संघर्ष करते रहना चाहिए।”

आस्ट्रेलिया से आए एडवर्ड जिनका शिक्षा और साहित्य में अच्छा काम है।उन्होंने  बच्चों को 14 वर्ष तक किसी भी प्रतिद्वंदिता से अलग रखकर शिक्षा देने की प्रक्रिया पर बल दिया।
एडवर्ड ने बताया कि डेनमार्क और फिनलैंड में 15 वर्ष तक बच्चे बिना कोई परीक्षा दिए ही बच्चे पढ़ते है। इस पढाई में खेल और गीत के साथ प्रकृति से सम्पर्क का महत्वपूर्ण स्थान है।

‌सेमिनार में बिहार सरकार के वित्तमंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा पद्धति गरीब विरोधी है। गरीबी को कायम रखने और इसकी खाई को चौड़ा करने में इस शिक्षा पद्धति का बड़ा हाथ है।

‌उषा किरण खान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में जब हिंसा का बोलबाला है इस कारण अब गांधी के विचारो से शिक्षा देने पर जोर दिया जाना चाहिए।

‌कार्यक्रम दो सत्र में सम्पन हुआ पहले सत्र की अध्यक्षता प्रो ऐन के चौधरी और दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ शंकर प्रसाद ने किया।

‌कार्यक्रम का संचालन कल्पना शास्त्री ने किया। इस एक दिवसीय सेमिनार में शिक्षा से सम्बंधित कई प्रस्ताव पारित किए गए। सेमिनार के अंत में दलाई लामा के जीवन पर आधारित एक फिल्म दिखाई गई।

‌कार्यक्रम को तेनजिन सुन्दु, वर्षा दास, डॉ राम सिंह,डॉ दुनू राय,डॉ ग्रेगार बाजटेसिक और प्रो एन के चौधरी ने संबोधित किया बिहार भूदान कमिटी , बिहार विद्यापीठ और ‘आसा ‘ के द्वारा आयोजित सेमनार में ए के राय ,अनीश अंकुर, रूपेश, अरशद अजमल सहित विभिन्न कॉलेजो के सैकड़ो छात्र उपस्थित थे।

विनीत कुमार की रिपोर्ट

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