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हेल्थ इंस्टिच्युट में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में विशेषज्ञों ने प्रस्तुत किए वैज्ञानिक-पत्र

पटना, 4 फ़रवरी। विकलांगों के पुनर्वास में निरंतर हो रहे वैज्ञानिक शोध तथा तकनीकी विकास से, पुनर्वास का चुनौतीपूर्ण कार्य अब धीरे-धीरे आसान होने लगा है। कृत्रिम-अंग निर्माण, श्रवण-यंत्र, स्पीच-थेरापी, फ़िज़ियोथेरापी, अकुपेशनलथेरापी, विशेष-शिक्षा समेत विकलांगता से संबंधित सभी क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में अनेक नए अनुसंधान हुए हैं और यंत्रों को उन्नत किया गया है, जिससे संसार के इस सबसे चुनौती-भरे कार्य को अब सहजता से किया जाना संभव हुआ है। अनुसंधान जारी है और निकट भविष्य में और भी उपलब्धियाँ सामने होंगी, जिससे विकलांगता की समस्या का स्थायी निदान हो सकेगा।

यह बातें भारतीय पुनर्वास संस्थान,नई दिल्ली तथा नेशनल इंस्टिच्युट औफ़ हियरिंग हैडिकैप्पड, मुंबई के सौजन्य से बेऊर स्थित इंडियन इंस्टिच्युट औफ़ हेल्थ एजुकेशन में, विगत शनिवार से आरंभ हुए दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण-कार्यक्रम ‘सी आर ई’ में अपने-अपने वैज्ञानिक-पत्र प्रस्तुत करते हुए, पुनर्वास-विशेषज्ञों ने कही। वरीय प्रोस्थेटिक-और्थोटिक विशेषज्ञा प्रो विधूप्रिया के के ने, अपना वैज्ञानिक-पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि, हाल के वर्षों में कृत्रिम-अंग निर्माण से लेकर कृत्रिम-कान के प्रत्यारोपण सहित अनेक तकनीकी विकास हुए हैं, जिनसे विकलांग-जनों का न केवल सार्थक पुनर्वास हुआ है, बल्कि उनका जीवन भी सहज और समाजोपयोगी सिद्ध हो रहा है।

‘विकलांगों के पुनर्वास में नए अनुसंधान” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण-कार्यशाला के समापन-समारोह की अध्यक्षता करते हुए, संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने विकलांगता निवारण की दिशा में पूरी दुनिया में हो रहे अनुसंधान और उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि, आज से दो दशक पहले तक विकलांगों के पुनर्वास के लिए जिस तकनीक का उपयोग होता था, वह गुज़रे ज़माने की बात हो चुकी है। नई तकनीक ने, आंशिक फलदाई और कष्ट-प्रद उस पुरानी तकनीक के दौर से निकाल कर पुनर्वास-पद्धति का पूरा स्वरूप बदल दिया है।

कार्यशाला में प्रो कपिलमुनि दूबे, प्रो कुमारी पूर्णिमा, प्रो सरिता तथा प्रो रणजीत कुमार समेत दर्जन भर विशेषज्ञों ने, पावर-पवाइंट से अपने वैज्ञानिक-पत्र प्रस्तुत किए। समापन समारोह में प्रशिक्षण-कार्यशाला के सभी तीस प्रतिभागियों को डा सुलभ द्वारा प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया। संस्थान के प्रशासी अधिकारी सूबेदार मेजर एस के झा ने अतिथियों का स्वागत तथा डा राजेश कुमार ने धन्यवाद-ज्ञापित किया। इस अवसर पर समद अली, विशेष शिक्षिकाएं वंदना झा, रजनी सिन्हा, आशा कुमारी, मीनाक्षी, रेखा कुमारी, कानपुर से आईं विनीता गुप्ता , निलिमा सिन्हा,प्रवीण कुमार, रणजीत कुमार झा तथा नवीन सिंह भी उपस्थित थे।

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