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हेल्थ इंस्टिच्युट में महिलाओं की फ़िज़ियोथेरापी पर आयोजित हुई कार्यशाला

पटना, 30 मार्च। गर्भवती महिलाएँ व्यायाम करना नहीं छोड़ें। यदि पहले से नहीं करती हों तो किसी प्रशिक्षित फ़िज़ियोथेरापिसट से परामर्श लेकर आरंभ करें। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से भ्रूण का उचित विकास होता है। शरीर की पेशियाँ मज़बूत रहती है, जिससे गर्भाशय और उससे जुड़ी सभी पेशियाँ शक्तिशाली और लचीली बनती है, जिसके कारण गर्भ-पात की आशंका नहीं रहती और शिशु के जन्म में भी बाधा नही आती।

यह बातें गत गुरुवार को, इंडियन इंस्टिच्युट औफ़ हेल्थ एजुकेशन ऐंड रिसर्च, बेउर में, महिला-दिवस के प्रसंग में “रोल औफ़ फ़िज़ियोथेरापी एट वेरियस स्टेजेज औफ़ ए वोमेंज लाइफ़” पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के स्त्री-रोग विभाग में सहायक प्राध्यापिका डा मोनिका अनंत ने कही। उन्होंने कहा कि, शिशु के जन्म के पश्चात भी व्यायाम जारी रखना चाहिए। व्यायाम से पेशियों में आई शिथिलता दूर होती है और शरीर पुनः अपनी पुरानी अवस्था में लौट सकता है। यह महिलाओं के शारीरिक-सौष्टभ के लिए हीं नहीं, उनके स्वास्थ्य और भावनात्मक उन्नति के लिए भी आवश्यक है।

आयुर्विज्ञान संस्थान के स्नायुरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा गुंजन कुमार ने अपना विज्ञानिक पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि, देश में लगभग तीन करोड़ लोग नयूरोलौजिकल समस्याओं से ग्रस्त हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या भी पुरुषों से कम नहीं है। ये समस्याएँ तनाव और मानसिक अवसाद के कारण अधिक है, गहरा मानसिक दबाव और रक्त-चाप से मस्तिष्क-घात और लकवा का ख़तरा होता है। यदि कोई लकवा-ग्रस्त हो जाए तो उसे अविलंब कुशल चिकित्सकों और फ़िजियोथेरापिस्ट का मार्ग-दर्शन प्राप्त करना चाहिए। समय रहते फ़िज़ियोथेरापी आरंभ हो जाने से अधिक लाभ मिलता है।

एम्स की वरीय फ़िजोयोथेरापिस्ट डा रीना श्रीवास्तव ने कहा कि, गर्भवती होना कोई बीमारी नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए एक ख़ूबसूरत अहसास है। यह स्त्री-मन की पूर्णता की यात्रा है। इससे शरीर का कोई नुक़सान नही होता। किसी कुशल फ़िज़ियोथेरापिसट का मार्ग-दर्शन लेकर नियमित व्यायाम के माध्यम से अपना तथा गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है। डा श्रीवास्तव ने महिलाओं से संबंधित समस्याओं, विशेष कर गर्भावस्था के दौरान आवश्यक फ़िज़ियोथेरापी की तकनीक से फ़िज़ियोथेरापी के प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित किया।

प्रशिक्षण सत्र में हेल्थ इंस्टिच्युट के पुनर्वास विभाग के अध्यक्ष डा अनूप कुमार गुप्ता तथा इस कार्यशाला की समन्वयक और प्राध्यापिका डा दर्शप्रीत कौर ने भी अपने पत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं, अंशु सिंह, ऋचा राय, ख़ुशबू कुमारी, सुरभी तथा मुकुंद को पुरस्कृत किया गया। इसके पूर्व कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने किया।

कार्यशाला में डा नवनीत कुमार झा समेत ९६ प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्हें प्रशिक्षण का प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।

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