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हेल्थ इंस्टिच्युट में लगाया गया निःशुल्क फ़िज़ियोथेरापी शिविर

पटना, 8 सितम्बर। विश्व की दस प्रतिशत आबादी किसी न किसी ऐसी बीमारी से ग्रस्त है, जिसे फ़िज़ियोथेरापी का आवश्यकता है। यह आँकड़ा स्वयं स्पष्ट करता है कि, दुनिया में फ़िज़ियोथेरापी चिकित्सा-पद्धति की अहमीयत क्या है और कितनी बड़ी संख्या में, संसार को प्रशिक्षित फ़िज़ियो-विशेषज्ञों की ज़रूरत है। भारत के ग्रामीण-क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहाँ फ़िज़ियोथेरापिस्टो की कमी है, और लकवा से पीड़ित लोग अथवा पोलियो-ग्रस्त बच्चों को उनके हाल पर छोड़ दिया जा रहा है। जहाँ एक ओर, फ़िज़ियोथेरापी की सहायता से लकवा से पीड़ित व्यक्तियों को अपने पैरों पर खड़ा किया जा सकता है, इसके अभाव में खाट पर हीं दम तोड़ रहे हैं। आवश्यकता है कि, इस पद्धति का तेज़ी से विकास हो, लोगों में जागरूकता आए तथा राज्य के प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य-केंद्र और उपकेंद्र पर प्रशिक्षित फ़िज़ियोथेरापिस्टों की नियुक्ति सुनिश्चचित की जाए।

यह बातें आज यहाँ इंडियन एशोसिएशन औफ़ फ़िज़ियोथेरापी की बिहार शाखा की ओर से, इंडियन इंस्टिच्युट औफ़ हेल्थ एजुकेशन ऐंड रिसर्च में, विश्व फ़िज़ियोथेरापी दिवस पर आयोजित ‘फ़िज़ियोथेरापी-सप्ताह’ का उद्घाटन करते हुए, संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने कही। डा सुलभ ने कहा कि, आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में सर्वाधिक तेज़ी से बढ़ रही इस चिकित्सा-पद्धति से शारीरिक-पीड़ा और विकलांगता की समस्याओं में क्रांतिकारी हस्तक्षेप हुआ है और पीड़ित-समुदाय को विना किसी दुष्प्रभाव के अचंभित करने वाले लाभ मिल रहे हैं।

सभा की अध्यक्षता करते हुए, एशोसिएशन के प्रांतीय संयोजक डा नरेंद्र कुमार सिन्हा ने बिहार में फ़िज़ियोथेरापी-काऊँशिल की स्थापना पर बल दिया। उन्होंने कहा कि, विगत 30 वर्षों से यह संघ और बिहार के फ़िज़ियोथेरापिस्ट अनवरत संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि, शीघ्र हीं केंद्र में तथा राज्य में भी फ़िज़ियोथेरापी-काऊँशिल गठित कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि, फ़िज़ियोथेरापी का स्तर भी , मेडिकल और डेंटल के स्तर का है। इसकी स्वीकृति सरकार दे चुकी है।

डा उदय शंकर प्रसाद ने कहा कि, मेडिसिन से ही चिकित्सा नही होती। भारत में अनेक ऐसी पद्धतियाँ पूर्व काल से हीं विकसित थी, जिन पद्धतियों से अनेक रोगों के उपचार, दवा के विना किए जाते थे। फ़िज़ियोथेरापी एक ऐसी सुविकसित और वैज्ञानिक चिकित्सा-पद्धति है, जिसमें दवा के प्रयोग नही होते।

वरिष्ठ फ़िज़ियोथेरापिस्ट डा अनुप कुमार गुप्ता, डा निरंजन कुमार, डा संजीत कुमार, डा देवव्रत, डा राजेश कुमार, डा ख़ालिद अंजुम खान तथा डा अनमोल कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

अतिथियों का स्वागत डा उमा शंकर सिंह, ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन संस्थान के प्रशासी अधिकारी एस के झा ने किया।

इस अवसर पर, संस्थान परिसर में एक निःशुल्क फ़िजियोथेरापी-शिविर भी लगाया गया, जिसमें डेढ़ सौ से अधिक व्यक्तियों की जाँच की गई तथा ज़रूरत-मंद मरीज़ों की फ़िज़ियोथेरापी की गई।

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