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लोहिया गैर कांग्रेस की बात करते थे अब गैर संघवाद के खिलाफ होना पड़ेगा- शेखर गुप्ता से नीतीश की बातचीत

nitish kumarपिछले दिनों वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता एक कार्यक्रम में शिरकत करने पटना आये थे। उस कार्यक्रम में उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश का साक्षात्कार किया था। पटना के मौर्या होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने शेखर गुप्ता से कई मुद्दों पर बातचीत की।

शेखर गुप्ता- मैं बाहरी व्यक्ति हूं, बिहारी नहीं। लेकिन मैंने बिहार की जनता से गहरी राजनीति सीखी है। यहां का हर व्यक्ति पोलिटिकल पंडित होता है। लेकिन इसके बावजूद बिहार में इतना असमानता क्यों है ? बिहार इतना पीछे क्यों है?

नीतीश कुमार- बिहार के लोगों में राजनीतिक चेतना परंपरागत है। लेकिन यहां दूसरे विषयों पर भी खूब चर्चा होती है। यहां के लोग राजनीति पर भी खूब बात करते हैं। चुनाव के वक्त लोग राजनीति पर बहस करते ही हैं।

इसका कारण यह भी हो सकता है कि बिहार ऐतिहासिक तौर पर राजनीति का केंद्र रहा है। यह राज्य सदियों से सत्ता का केंद्र रहा है। यहां मगध साम्राज्य था। उसके प्रभाव की सीमा वर्तमान भारत से भी बड़ी थी। यहां के लोगों में राजनीतिक चेतना शुरू से रही है।

दूसरा पहलू असमानता का है। इसलिए असमानता के खिलाफ आवाज भी यहां से उठती रही है। अंग्रेजों के जमाने में तो असमानता तो सरकारी स्तर पर बरती ही गयी, आजादी मिलने के बाद जो बिहार था उस दौरान भी यहां कम निवेश हुआ। इस पिछडेपन में कुछ लोगों के पास संपत्ति बढ़ती चली गयी जबकि कुछ लोग गरीबी के निचले स्तर पर ही रहे। तो अब मौजूदा हालात में इसका एक मात्र उपाय है कि हम न्याय के साथ विकास के रास्ते पर चलें। हम इसी की कोशिश कर रहे हैं, और समाधान भी यही है।

शेखर गुप्ता- 2005 के चुनाव के दौरान लालू जी कहते थे की लाठी मे तेल पिलाइए। लेकिन आपने कहा कि कलम को स्याही पिलाइए। इस बार दरभंगा में आपने कहा कि अंग्रेजी नहीं आने से हीन भावना आती है। अब आप बिहार में अंग्रेजी सिखाने पर जोर दे रहे हैं। ये बात आपके दिमाग में कहां से आई ?

नीतीश कुमार- जब हम कोई राय बनाते हैं तो लोगों की इच्छा अध्ययन करते हैं। लोगों के बीच जा कर हम लोगों की भावना समझते हैं। युवा पीढी में यह भावना आ रही है। हमारे लोग आंग्रेजी समझते हैं पर बोल नहीं पाते। देश में अंग्रेजी बोलने वालों का प्रभाव बढ जाता है। अंग्रेजी नहीं बोलने से हीन भावना आती है। इसलिए हमने तय किया है कि हम कम्युनिकेशन स्किल बढ़ाने की दिशा में काम करें। हम कम्प्युटर और कम्युनिकेशन स्किल देना चाहते हैं। पहले फेज में योजना है कि हरेक ब्लाक में एक सेंटर खोलें।

शेखर गुप्ता- आप ने बिहार में शराब पर पाबंदी लगा दी। पर पश्चिम के कुछ देशों से ले कर गुजरात तक में जहां भी शराब पर पाबन्दी लगी वहां शराब माफिया ताकतवर हो गये !

नीतीश कुमार- बिहार का जनमानस शराबबंदी के पक्ष में है। जब हमने रोक लगाने का फैसला लिया तो हमने काफी अध्ययन किया। हमें जनता का सपोर्ट है। अब तो बिहार के इस कदम से देश के अन्य राज्यों में भी शराब पर पाबंदी की मांग उठने लगी है। हम तो कहते हैं कि अन्य राज्य भी शराबबंदी के बिहार माडल को अपनायें।

शेखर गुप्ता- पांच वर्षों बाद जब हम चुनाव कवर करने बिहार आयेंगे तो कैसा होगा बिहार ?

नीतीश कुमार- आप पिछली बार 2005 में चुनाव के दौरान आये थे तो लिखा था कि बिहार में जुगनू की रौशनी के अलावा कुछ नहीं। पर अब रौशनी है। 2005 तक कोई सोच नहीं सकता था कि गांव में बोतलबंद पानी मिल सकता है। लेकिन अब किसी भी गांव में जाइए बोतलबंद पानी मिल जाता है। कोई सोच नहीं सकता था कि ऐसा परिवर्तन होगा यहां। अब जा के देखिए देहात में भी लोग आपका स्वागत कोल्ड ड्रिंक्स से करते हैं। बुनियादी सुविधायें बढ़ी हैं। हमने सात निश्चय साझा कार्यक्रम के रूप में लिया है। महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दे चुके हैं। कल के बिहार की आप कल्पना कर लीजिए। गांव-गांव तक नल का पानी पहुंचायेंगे। जल्द ही लोक शिकायत अधिनियम लागू होगा। सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगों की शिकायतों को निश्चित समय में निवारण हो। हम अपने तमाम वादे पूरे करने में लगे हैं।

शेखर गुप्ता- आप ने दो बार कोआलिशन से सरकार चलाई। एक बार दिल्ली और पटना में और अब फिर दूसरी बार पटना में आरजेडी के साथ। इन दोनों में कौन सा कोआलिशन आसान था।

नीतीश कुमार– जब भाजपा के साथ कोई जाना नहीं चाहता था, तब हमने अलायंस किया। हमने तीन मुद्दे तय किये थे। 370, कॉमन सिविल कोड थोपने नहीं देंगे। इसे अटल जी मानते थे। पालिसी पर भी सब ठीक था। लेकिन वे लोग जिनके नाम पर( आडवाणी का नाम लिये बगैर) नारे लगाते थे, उनको धरोहर के रूप में अंदर रख दिया गया। वे देश की युनिटी के खिलाफ क्यों है। आप बताइए कि फ्रीडम के मूवमेंट उनका क्या रोल है।

हम फ्रीडम फाइटर के बेटे हैं पर उनकी क्या भूमिका है आजादी की लड़ाई में। एक बात स्पष्ट है कि इनकी कोई भूमिका नहीं है। तिरंगे में इनकी क्या भूमिका है ! और वही तिरंगा लहराने की बहस करते हैं।

अब जो मौजूदा अलायंस है उसमें कोई परेशानी नहीं। हर चीज में पारदर्शिता है। महागठबंधन का साझा कार्यक्रम चल रहा है। न्याय के साथ विकास उसी आधार पर चल रहा है। किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं, हमें कोई परेशानी नहीं। परेशानी तो वहां है। शिवसेना की क्या स्थिति है ? उस गठबंधन की क्या स्थिति है ?

आप पत्रकार हैं आप बेहतर जानते हैं। खुद भाजपा के अंदर की हालत आप जानते हैं। अब सीधे दो धूरी होगी। एक तरफ संघ, बीजेपी और दूसरी तरफ सबको मिलना होगा। एक जमाने में लोहिया गैर कांग्रेस की बात करते थे अब गैर संघवाद के खिलाफ होना पड़ेगा। सबको साथ आना पड़ेगा। क्योंकि लोकतंत्र पर खतरा बढ़ता जा रहा है।

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