+91 943 029 3163 info@biharkhojkhabar.com
BREAKING NEWS

नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति पद के लिए अमिताभ बच्चन का नाम सोच रहे हैं: अमर सिंह

Amar Singhकभी अभिनेता अमिताभ बच्चन के बेहद करीबी रहे राजनेता अमर सिंह ने एक बार फिर उन पर निशाना साधा है। न्यूज़ चैनल इंडिया 24×7 के संपादक वासिंद्र मिश्र के साथ ‘सियासत’ कार्यक्रम में अमर सिंह ने अमिताभ बच्चन को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए।

मुलायम सिंह यादव के भी करीबी रहे अमर सिंह ने दावा किया कि बोफोर्स घोटाले की आंच से बचाने के लिए उन्होंने अमिताभ की मदद की। अमर सिंह के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए अमिताभ के नाम पर विचार कर रहे हैं। इस खास बातचीत में अमर सिंह ने अमिताभ से जुड़े कई पहलुओं पर बेबाकी से अपनी राय रखी। पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-

वासिंद्र मिश्र – हम लोग चर्चा कर रहे थे नरेंद्र मोदी की वर्किंग स्टाइल की जिसमें नरेंद्र मोदी को लेकर उनके मंत्री भी असहज हैं, तो इसके दो संकेत मिलते हैं अधिनायकवाद है या डिक्टेटरशिप है।

अमर सिंह – नहीं, ऐसा नहीं है। हम जिस नरेंद्र मोदी को जानते हैं वो बहुत ही सहज हैं, बहुत सरल हैं। होता क्या है कि आपके जीवन की प्रासंगिकता और प्राथमिकताएं बदल जाती हैं, जब आपके जीवन का स्पेक्ट्रम बदलता है, और आप घिर जाते हैं। नरेंद्र मोदी जी से मैं जब-जब भी मिला, सार्वजनिक समारोंहों में कई बार मिल गया तो हर बार रुककर पूछा कि भैया आपका स्वास्थ्य कैसा है? मुझे सुखद आश्चर्य हुआ, जब किरण मजूमदार शॉ ने मुझसे ये बताया की पीएम मोदी उनसे कह रहे थे कि येचुरी और अमर सिंह भले ही हमारी पार्टी में नहीं हैं, लेकिन मेरी उनसे सदैव मित्रता रही है। हमारा उनका परिचय अरुण जेटली जी ने कराया। जब संजय जोशी के कार्यकाल में केशुभाई से द्वंद के बाद जब दिल्ली में उनका प्रवास था तो, मुझे जेटली जी का फोन आया कि नरेंद्र मोदी जी मुझसे मिलना चाहते हैं और उनके घर पर भोज में हम लोग तीन लोग थे मिले, और इंडियन एक्सप्रेस का जखीरा आया और उसने अगले दिन हेडलाइन बनाई कि केसरिया रंगों से रंगा अमर सिंह का हाथ, लेकिन हमने इसकी कोई परवाह भी नहीं की।

वासिंद्र मिश्र – इसका कारण क्या था? उस समय उनको जरूरत थी दिल्ली के नेताओं की, अरुण जेटली की और आपकी?

अमर सिंह – ऐसा कुछ नहीं था, मैं बताऊं कोई काम नहीं था। मोदी जी सलमान खान के साथ पतंग उड़ा रहे थे। आज मैं आपको बता रहा हूं कि ऑन रिकॉर्ड हैं ये सारी बातें, कि अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड का मैं उपाध्यक्ष था उस वक्त और पा नाम की फिल्म बनी और अमिताभ बच्चन ने कहा कि काश इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिल जाता और उन्हें मिला। कांग्रेस के साथ उनके गतिरोध के बावजूद कांग्रेस के कार्यकाल में ही उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। उस वक्त प्रियरंजन दास सूचना प्रसारण मंत्री थे और उन्होंने कहा कि ये टैक्स फ्री हो जाए। तो वृंदा करात और प्रकाश करात जी से मैंने बात की तो पश्चिम बंगाल में पा फिल्म टैक्स फ्री हुई, येदियुरप्पा जी से बात की तो कर्नाटक मे पा टैक्स फ्री हुई। इसी संदर्भ मे संजय भावसर हमारे और मोदी जी के बीच में समन्वय कर रहे थे, और वो अभी हैं।

ये सभी बातें मैं ऑन रिकॉर्ड बोल रहा हूं और काट दें संजय भावसर ये बात। मोदी जी से हमने बात की और मोदी जी से अमिताभ बच्चन का परिचय मैंने करवाया पा फिल्म के टैक्स एक्जम्पशन के लिए। मोदी जी ने फिल्म देखी और फिल्म टैक्स फ्री हो गई। टैक्स फ्री होने लायक पिक्चर भी थी पा। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप गुजरात के पर्यटन का प्रचार कर दीजिए, तो अमिताभ बच्चन असहज हो गए और बोले कि अमर सिंह जी ये तो पॉलिटिकल हो गया आपने मुझे कहां फंसा दिया, और ये मैं चुनौती देता हूं कि अमिताभ बच्चन खंडन करें कि उन्होंने ये बात नहीं कही। मैंने कहा कि ये बताईये की वहां पर जो गिर का जो शेर है उसमें सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष क्या है? द्वारका के मंदिर में और कच्छ के रेगिस्तान में। तो, अगर मायावती हमको अपना शत्रु मानती हैं और ताजमहल के प्रचार के लिए अगर वो आपसे कहें तो आप नेशनल आईकन हैं तो आपको ताजमहल का भी प्रचार करना चाहिए। तो गिर का शेर, द्वारका का मंदिर और कच्छ का रण इसका प्रचार आप करें और इसमें कुछ नहीं है और इस बात पर मैं कायम रहा। जब इस मसले पर उन पर हमला हुआ तो मैंने सोनिया जी को पत्र लिखा कि कम से कम आप इस बात का ध्यान रखिए कि ये उस हरिवंश राय और तेजी बच्चन के बेटे हैं, और हमने सिम्बॉयोसिस के परिसर में ये पंक्ति पढ़ी कि बैर कराते मंदिर-मस्ज़िद, मेल कराती मधुशाला। तो हमने कहा कि धर्म निरपेक्षता के बारे में ऐसी पंक्तियों की रचना करने वाला रचयिता हरिवंश राय बच्चन, उनकी रचना ये भी है और अमिताभ बच्चन भी हैं। तो ये सांप्रदायिक कैसे हो सकते है, ये धर्म निरपेक्ष हैं। उसके बाद जनार्दन द्विवेदी का बयान आया कि अमिताभ बच्चन के बारे में कोई बयान ना दिया जाए। क्योंकि हमने वही तथ्य सार्वजनिक बयान में कहे जो व्यक्तिगत रूप से अमिताभ बच्चन को कहा था, उसके बाद वो विवाद ठहरा।

वासिंद्र मिश्र – लेकिन, अमिताभ के बारे में उनका जो असली चेहरा था, असली व्यक्तित्व था उसका अहसास आपको कब हुआ? क्योंकि, जिस तरीके से अमिताभ और उनका परिवार आपके परिवार के साथ, आपके बच्चों के साथ हमने देखा है दिल्ली से लेकर लखनऊ तक और लखनऊ से लेकर बाराबंकी तक।

अमर सिंह – देखिए, अमिताभ बच्चन की कुंडली में ही विवाद है और अच्छे ज्योतिष से उनको मिलना चाहिए। बोफोर्स का विवाद हुआ तो चंद्रशेखर जी ने, सुब्रमण्यम स्वामी जी ने कानून मंत्री के रूप में अमिताभ बच्चन की मदद की। चंद्रशेखर जी के कहने से वित्त मंत्री रहे यशवंत सिंह और सुब्रमण्यम स्वामी ने अमिताभ की मदद की, नहीं तो ऐसी घेरा बंदी थी की। अरुण जेटली जी विश्वनाथ प्रताप सिंह के एडिशनल सॉलिसीटर जनरल के रूप में इनकी जांच करने गए थे स्विट्ज़रलैंड। अरुण जेटली जी के नाम से इनको लगता था कि जैसे कोई गरम तेल इनके ऊपर डाल रहा हो। अरुण जेटली और विश्वनाथ प्रताप सिंह इनके लिए बहुत ही विषाद का विषय होते थे और विश्वनाथ प्रताप के पलायन का या परिचित होने का और चंद्रशेखर जी के आगमन का सबसे बड़े लाभ पाने वाले अमिताभ ही थे और बाद की सरकारें इनको तंग ना करें इसके लिए फेरा बोर्ड के उन्नी नाम के एक व्यक्ति से चंद्रशेखर जी ने इनके पक्ष में एक निर्णय करवाया जो कि न्यायिक लगे और मसले को राजनीतिक रंग ना दिया जा सके।

वासिंद्र मिश्र – लेकिन, चंद्रशेखर जी ने आपके कहने पर किया होगा।

अमर सिंह – निश्चित रूप से मैं बीच में था, मुझे कोई कहने में लज्जा नहीं है लेकिन चंद्रशेखर जी की मृत्यु के बाद क्या अमिताभ बच्चन संवेदना के लिए एक बार भी चंद्रशेखर जी के घर गए? मैं जानना चाहूंगा अमिताभ बच्चन जी बता दें। तो, देखिए बोफोर्स के उस विवाद के बाद जिसमें उनके बालसखा राजीव गांधी भी उनके काम नहीं आए और चंद्रशेखर जी ने कहा की राजीव जी से जब वो रूष्ट हो गए और जब वो केयरटेकर प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने अमिताभ की मदद की। उन्होंने कहा कि कोई ये ना कहे कि राजीव गांधी के चलते वो मदद कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि हरिवंश राय बच्चन उनके गुरू रहे हैं लिहाजा वो अपने गुरु के बेटे की मदद कर रहे हैं, देश का बड़ा कलाकार है इसलिए मदद कर रहे हैं।

जब राजीव से हमारा मनभेद-मतभेद हो गया है तब हम अमिताभ की मदद कर रहे हैं। तो ये थे चंद्रशेखर और ये हैं अमिताभ बच्चन। बोफोर्स के विवाद के बाद बाराबंकी की जमीन का विवाद सामने आया जब वो किसान बन गए थे और मायावती ने मुकदमा कर दिया था। तीसरी बात सीके पीठावाला नाम का एक व्यक्ति जिससे उन्होंने अप्रवासी भारतीय के रूप में चैनल चलाते हुए 50 करोड़ रुपए लिए और जिसको उन्होंने हस्तलिखित प्रनोट दिया की तुम्हें लेना है और हमें देना है। और जिसको उनहोंने हस्तलिखित प्रनोट दिया की तुम्हें लेना है और हमें देना है वो आज भी विद्यमान है, पूरे देश में घूमता रहा उसको सहारा की मदद से पचास करोड़ रुपए का भुगतान हुआ। उसने कहा कि मुझे अमिताभ के पैसे मिल गए लेकिन पता नहीं इस बात की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा था पता नहीं, वो जांच हुई कि नहीं। तो, वो पचास करोड़ रुपया जो अमिताभ का बकाया था उसे सहारा ने क्यों दिया। और अगर सहारा ने दिया तो सहारा का हर पैसा अब सेबी की मिल्कियत है तो क्या वो पचास करोड़ जो सहारा ने उनको दिया वो ब्याज समेत वो सेबी को वापस करेंगे अमिताभ बच्चन? और क्या सहारा ने वो पैसा पीठावाला को देने से पहले आरबीआई से स्वीकृति ली, तो क्या फेरा और फेमा के उल्लंघन का केस बनता है? तो मैं ये समझता हूं कि मैं अमिताभ का हितैषी हूं और उम्मीद करता हूं की हर मुश्किल की तरह वो इस मुसीबत से भी निकलेंगे। क्योंकि मैने सुना है नरेंद्र मोदी जी देश के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए अमिताभ बच्चन का नाम सोच रहे हैं। तो देश के भावी राष्ट्रपति का जो संभावित उम्मीदवार है उसको क्लीनचिट रहना चाहिए।

तो, वो दिन आ रहा है तो उससे पहले ये स्पष्ट होना चाहिए कि और मैं ये इसलिए भी कह रहा हूं कि अमिताभ के अंधे मोह के चलते मैंने जसवंत सिंह जी की सेवा ली थी जब वो वित्त मंत्री थे। और एक महिला अधिकारी जिसका नाम अभी मुझे याद नहीं है वो मुंबई में थीं और उनके दफ्तर में जाकर मैंने रुष्ट होकर बात की, मैंने उनसे कहा कि अमिताभ बच्चन ने पैसे नहीं दिए हैं और आप देश के इतने बड़े कलाकार को परेशान ना करें। हमने कहा अमिताभ बच्चन ने पैसा नहीं दिया क्योंकि अमिताभ ने मुझसे कहा कि मैंने पैसा नहीं दिया। कालान्तर में मुझे पता चला कि उनके लिए सहारा ने पैसा दिया। लेकिन सहारा ने अगर आरबीआई की स्वीकृति से पैसा दिया है, अगर लीगल चैनल से पैसा दिया है तो फिर कोई मामला ही नहीं है।

अमिताभ जैसे बोफोर्स से निकले, जैसे वो दौलतपुर में सुप्रीम कोर्ट में केजी बालाकृष्णन के हथौड़े से निकले, मायावती के उत्पात के बावजूद, वैसे ही वो प्रवर्तन निदेशालय की जांच से जो आजकल बंद हो गई होगी या फाइल हुई होगी उससे भी बाहर निकलेंगे। और अगर नहीं निकलेंगे तो उन्हें राष्ट्रपति भवन की जगह उनको पता नहीं कहां जाना पड़े और जो उनको पद्मभूषण और तमाम अलंकरण जो मिले हैं, जिनके बारे में वो ट्वीट करते हैं की उनके परिवार को सबसे ज्यादा मिला है, वो सब वापस भी करना पड़ सकता है। तो, मैं उनके लिए बहुत चिंतित हूं। मैं चाहता हूं की हमारे पुराने मित्र, बड़े भाई, सदी के महानायक, आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इनक्रेडिबल इंडिया के संभावित संवाहक अपने को शुचिता और शुद्धता से युक्त कर लें ताकि आने वाले सारे बड़े-बड़े पद से अलंकृत हों सुशोभित हों, हमें बुरा तो नहीं लगेगा बल्कि अच्छा लगेगा, मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।

Bihar Khoj Khabar About Bihar Khoj Khabar
Bihar Khoj Khabar is a premier News Portal Website. It contains news of National, International, State Label and lots More..

Bihar Khoj Khabar
About the Author
Bihar Khoj Khabar is a premier News Portal Website. It contains news of National, International, State Label and lots More..

Related Posts

  1. अजय कुमार

    उचित है भाजपा का ऐसा सोचना क्योंकि भाजपा अपने बुरे पर किसी मनपसंद व्यक्ति को इस सर्वोच्च पद पर आसीन नहीं करवा सकती है या कम से कम निर्विरोध निर्वाचित तो नहीं ही करवा सकती तो ऐसे में अमिताभ बच्चन जैसे गैर राजनीतिक एवं राजनीतिक रूप से मुक एवं बधिर व्यक्ति को इस पद पर आसीन करना भाजपा के लिए मुफीद रहेगा।

Leave a Reply

*