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पद्मश्री गजेन्द्र नारायण सिंह

स्वातंत्र्येतर बिहार में संगीतकला की दशा और दिशा आजादी से पूर्व की स्थिति क्या थी, इस का जायजा लिए बगैर आजादी के पैंसठ वर्षों में बिहार में कला विशेषकर संगीत की क्या हालत रही उसे हम नहीं समझ सकते। 20वीं सदी के पूर्वार्द्ध तक समाज में कलापोषकों और आश्रयदाताओं का एक वर्ग विशेष ह...

‘आम आदमी की जिन्दगी’ और माओवादी

माओवादी प्रवक्ता ”अभय“ ने पार्टी की केन्द्रीय कमिटी की ओर से जारी किए गए एक बयान में (3.10.2013, आनन्द बाजार पत्रिका) भारत के कई प्रदेशों में मुख्यमंत्रियों को एक ही लाठी से हांक दिया है। इन मुख्यमंत्रियों के नाम इस प्रकार हैं- ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल), रमन सिंह (छत...

मनुष्य मवेशी नहीं है

व्यक्ति और वर्ग को समार्थक समझना, स्वयं की इच्छा और जनता की इच्छा को समार्थक समझना- ये सारे माओवादियों के पुराने रोग हैं। शायद अब इन्हें रोग कहना उचित नहीं, अब ये उनके ”सिद्धांत“ हैं। इन सिद्धांतों के तहत वे व्यक्ति विशेष की हत्या करते हैं, जनता पर दबाव डालकर ”चुनाव व...

कानू सान्याल हमारे बीच जीवित हैं

पश्चिम बंगाल सरकार ने ”शारदा चिट फंड“ कांड के बाद एक ”आर्थिक सुरक्षा योजना“की शुरूआत की है। इस योजना के तहत कम रोजगार करने वाले लोग छोटी राशि की बचत कर पाएंगे और उन्हें उस राशि पर ब्याज भी मिलेगा। वे एक खास रकम से अधिक बचत योजना के तहत जमा नहीं कर पाएंगे और कम समय अवधि तक ह...

त्यागमूर्ति सर गणेशदत्त सिंह

एक बार की मधुर स्मृति है। एक बार जयप्रकाशजी और मैं स्वर्गीय सर गणेशदत्त सिंह से मिलने गया था। सर गणेश ऐसा त्यागी सपूत बिहार ने दूसरा नहीं पैदा किया, ऐसा बिना हिचक से कहा जा सकता है। जब तक वह मिनिस्टर रहे, अपने मामूली खर्चे के अतिरिक्त उन्होंने एक-एक पैसा दान में दे दि...

समृद्ध अतीत, उदास वर्तमान

सचेपि मे अभ्य पुत्त! वेसालि साहांर दस्सथ एंवमहं तं मत्तं न दस्सामीति। (आर्य पुत्रों! यदि वैशाली का जनपद भी आप हमें दें, तो भी मैं इस महान भात को नहीं दूंगी-अंबपाली) -महापरिनिर्वाण सूत्रा 50 चारों ओर एक घना-सा सन्नाटा घिर आया था- कभी-कभी हवा के झोंके से पत्ते खड़खड़ा उठते...

मैं एक औरत

मर्जी ईह आस्कोई एवं संजय कुमार लिखित कविता की यह कुछ पंक्तियां हैं जिसके इर्द-गिर्द आज के बिहारी समाज की महिलाओं की अपेक्षा अभिलाषा, आक्रोश, प्रतिवाद के स्वर को समझा जा सकता है। अवसर था बिहार दिवस 2013 के अवसर पर गांधी मैदान मुख्य मंच से प्रस्तुत गीत नाटिका (बैले) ‘‘मैं एक औरत’’।...

माता का ह्दय

– प्रेमचंद माधवी की आंखों में सारा संसार अंधेरा हो रहा था।  कोई अपना मददगार दिखाई न देता था। कहीं आशा की झलक न थी। उस निर्धन घर में वह अकेली पडी रोती थी और कोई आंसू पोंछने वाला न था। उसके पति को मरे हुए २२ वर्ष हो गए थे। घर में कोई सम्पत्ति न थी। उसने न-जाने किन तकलीफों ...

राजद सांसद जगदानंद सिंह से अमित कुमार की बातचीत

सांसद जगदानंद सिंह राजद के एक प्रमुख स्तंभ रहे हैं। लालू प्रसाद के चारा घोटाला मामले में जेल जाने के बाद राजद में उत्पन्न हुई परिस्थितियों को लेकर युवा पत्रकार अमित कुमार ने उनसे बातचीत की। इसका संक्षिप्त स्वरूप दिल्ली से प्रकाशित पाक्षिक ‘हलचल और हालचाल’ में प्रकाशित हो चुका है।...

कठपुतली कॉलोनी: मोहल्ला है या मायानगरी?

कठपुतली के तमाशे और जादू के खेल को भारत में पारंपरिक मनोरंजन की मशहूर विधाओं में गिना जाता है. दिल्ली में ही कठपुतली कलाकारों का एक ऐसा इलाका है जहाँ कला की इस शैली से रूबरू हुआ जा सकता है. यहाँ रहने वाले हजारों कठपुतली कलाकार इस दम तोड़ती कला को बचाने के लिए हर मुमकिन को...