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गांजे की आदत ने मुझे ‘इंटेलीजेंट’ बनाया: नसीर

हिंदी फिल्म इंडस्‍ट्री में 100 से भी ज्यादा फिल्‍मों में अपने शानदार अभिनय का लोहा मनवा चुके महान अभिनेता नसीरूद्दीन शाह आज अपना 68वां जन्‍मदिन मना रहे हैं। वे एक ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से आर्ट फिल्‍मों के साथ-साथ कॉमर्शियल फिल्मों में खास पहचान बनाई।

20 जुलाई 1949 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्में नसीरूद्दीन शाह ने अपनी पढ़ाई अजमेर से की। वहीं उन्होंने अपना ग्रेजुएशन 1971 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से किया। उन्होंने दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया। फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न, पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।

नसीर ने अपनी आत्मकथा लिखने की सोची। वे अकसर अपने विचारों को कागज पर उतारते थे। जब उन्होंने सौ पन्ने लिख लिए, तो उसे लेकर वे अपने दोस्त इतिहासकार रामचंद्र गुहा के पास पहुंचें।

गुहा ने शाह को प्रेरित किया और कहा कि इसे किसी प्रकाशक के पास भेजें। इस तरह नसीर की आत्मकथा प्रकाशित हुई। इस आत्मकथा ‘एंड देन वन डे’ में कई ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में लोग कम जानते हैं, जबकि वे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। इस आत्मकथा की शुरुआत नसीर के बचपन से हुई है और अंत रत्ना पाठक के साथ शादी और बेटी हिबा की वापसी से हुई है।

नसीर के रिश्ते उनके पिता के साथ बहुत अच्छे और सहज नहीं थे। उनके पिता यह नहीं चाहते थे कि नसीर पढ़ाई छोड़कर सिनेमा की दुनिया में आयें, इसलिए वे हमेशा नाराज रहते थे। शाह ने लिखा है कि जब मैं पिता बना तो उन्हें ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सका।

नसीर ने मात्र 19 वर्ष की उम्र में शादी कर ली थी। उन्होंने एक पाकिस्तानी युवती परवीन से शादी कर ली, जो उस वक्त 34 साल की थीं और उनके साथ अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ती थीं। शादी के मात्र 10 महीने बाद ही उनकी पत्नी ने एक बेटी हिबा को जन्म दिया, लेकिन इनकी शादी चल नहीं पायी और परवीन बेटी के साथ भारत छोड़कर चलीं गयीं।

नसीर ने अपनी आत्मकथा में हर बात को ईमानदारी से लिखा है। उन्होंने अपनी बेटी के साथ रिश्तों को भी सहजता से बताया है। किस तरह वे अपनी शादी और पितृत्व को बोझ समझते थे, जिसके कारण उनकी पत्नी उन्हें छोड़ बच्ची के साथ चली गयी और वे अपनी बेटी से 12 वर्षों तक नहीं मिले। हालांकि इस आत्मकथा में इस बात का भी उल्लेख है कि जब हिबा वापस आयीं, तो उनके अपने पिता के साथ कैसे संबंध थे।

नसीर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि गांजे की आदत ने उन्हें ‘इंटेलीजेंट’ बनाया। उन्होंने कहा कि स्मोकिंग की आदत ने उनपर हमेशा सकारात्मक प्रभाव डाला। वे गांजा का सेवन करते थे इस बात को बेबाकी से स्वीकार करने के कारण उनकी आलोचना भी हुई है, लेकिन उनका कहना है कि मैं किसी को इसके लिए प्रेरित नहीं करता कि आप भी गांजा पीयें। मैंने बस अपनी बात कही है।

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