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पश्चिम बंगाल अब कहलाएगा ‘बांग्ला’ और ‘बंगाल’ !

पश्चिम बंगाल की विधानसभा ने राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव को पारित कर दिया है। अब ‘पश्चिम बंगाल’ का नाम बंगाली भाषा में ‘बांग्ला’ और अंग्रेज़ी में ‘बंगाल’ होगा। पारित हुए प्रस्ताव को अब केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से ...

IIT खड़गपुर की नयी पहल: पढ़ो, कमाओ, धन लौटाओ

केंद्र सरकार द्वारा बजट में की गयी कटौती का सामना कर रहे आइआइटी, खड़गपुर ने धनराशि जुटाने के लिए ‘पढ़ो, कमाओ, धन लौटाओ’ योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत छात्र यदि यह संकल्प लें कि वे नौकरी मिलने के बाद धनराशि दान करेंगे, तो उनकी फीस माफ कर दी जायेगी। इस योज...

जे. एम. बी का खूनी पंजा

जे. एम. बी का खूनी पंजा अब पश्चिम बंगाल की ओर फैल रहा है। मालदह जिला के वैष्णव नगर तथा कालियाचक पर उनकी नजर गड़ी हुई है। इन दो जगहों की ख्याति जाली नोट आने-जाने का रास्ता के रूप में भी है। जाली नोट के आने-जाने से लेकर अन्य तस्करी तक तमाम गतिविधि वैष्णवनगर तथा कालियाचक से संच...

सालबनी में माओवादी पोस्टर्स

सालबनी में माओवादी पोस्टर मिले हैं। पूछा गया है कि कोटेश्वर राव की हत्या क्यों की गई ? पिछले दिनों गोयालतोड़, बाघघोरा, चिलगोड़ा आदि स्थानों पर इसी तरह के पोस्टर्स मिले थे। पुलिस का कहना है कि यह केवल शरारत है। लेकिन घटनाओं को हल्के में लेना नहीं चाहिए। खासकर तब जब ममताजी घटनाओं ...

यक्ष प्रश्न

महाभारत में यक्ष के प्रसंग से हम अवगत हैं। यक्ष द्वारा पूछे जाने पर युधिष्ठिर ने बताया कि मनुष्य को सबसे अधिक अविश्वनीय चीज उसे अपनी मौत लगती है। दुनिया में संसदीय या गैर-संसदीय तानाशाह जो भी हुए हैं उनके लिए इस छोटी सी कहानी के अन्दर बहुत सारी शिक्षणीय बातें छिपी हैं। बशर्ते ...

नारदा टेप्स के तमाम आरोपी मंत्रिमंडल में

प० बंगाल के लोग तब आश्चर्यचकित रह गए, जब उन्होंने तमाम आरोपियों को राज्य के नए मंत्रिमंडल में पाया। वैसे नारदा टेप्स के बारे में तृणमूल का दृष्टिकोण कभी बहुत स्वच्छ नहीं रहा। प्रारंभ में उन्होंने कहा कि टेप्स जोड़े-तोड़े हुए हैं। फिर उन्होंने अनुदान के प्रश्न को उठाया। हाल में ममता...

तारा

मनसाराम हाँसदा से कोई कम जाँबाज नहीं थी तारा, लेकिन अन्त में उसका भी हस्र वही हुआ। वह भी एस० टी० एफ० के हत्थे चढ़ी। अब वह पुलिस द्वारा पूछताछ की प्रतीक्षा कर रही है। पति पत्नी साथ ही पकड़ाए थे। तारा भी कोटेश्वर राव की शिष्या थी और सांकराइल काण्ड में बराबर की हिस्सेदार। ...

जब तृणमूल से लड़े तृणमूल

मदन मित्र (कमरहटी) पराजित हुए तो मात्र 4200 मतों से। उनकी हार की वजह की समीक्षा करने के लिए एक बैठक बुलाई गई, जहाँ तृणमूल वाले आपस में लड़ पड़े। एक और गोपाल साहा, देसरी ओर गौतम साहा। शीघ्र ही मामला मारपीट में तब्दील हुआ। सभा में उपस्थित ज्योतिप्रिय मलिक आदि ने हंगामा करनेवालो...

कांग्रेस-वाम गठबंध से चूक कहाँ हुई, क्या गठबंधन सही में बन पाया था ?

प्रारम्भ में इस गठबंधन के साथ ऐसे-ऐसे शर्त लगाए गए कि शक पैदा हो गया कि गठबंधन बन भी पाएगा तो चल पाएगा की नहीं। कांग्रेस ने अपने शर्त लगाए। उनकी देखा-देखी पार्टियाँ जैसे आर.एस.पी, फारबर्ड ब्लॉक आदि शर्त लगाने से नहीं चुकी। इनमें सर्वाधिक त्याग सी.पी.एम ने किया। वे,...

आश्चर्य करने की क्या बात है ?

आज जिस घटना को लेकर डायमंड हारबर में उथल-पुथल हो रहा है, उसमें जन अदालत की अवधारणा प्रमुखता रखती है। जब द्वितीय महायुद्ध के बाद एशिया के बड़े भूखण्ड पर मुक्ति के लिए युद्ध चल रहा था, तब गरीब जनता को न्याय मुहैया कराने के लिए इस अवधारणा को लागू किया गया था। ...