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एक दोपहर ‘बज़्म-ए-सुख़न’ के नाम

इक ज़रा सी सुख़न-फ़हमी अगर दे दे ख़ुदा, ज़िन्दगी का लुत्फ़ ग़ालिब की तरफ़दारी में है! तो ले चलते हैं आपको ज़िन्दगी के लुत्फ़ और ग़ालिब की तरफ़दारी के लिए लेख्य-मंजूषा की प्रस्तुति “बज़्म-ए-सुख़न” में, जिसकी सदारत मशहूर शायर जनाब क़ासिम ख़ुर्शीद साहब  और निजामत जनाब अस्तित्व अंकुर ...
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शहंशाह आलम की कुछ कविताएं

शहंशाह आलम हमारे समय पर लगातार रचनात्मक दस्तक देते हुए, ऐसे कवि हैं, जिनके सामने हिन्दी कविता ने कई करवट बदले हैं। कई दशकों से हम शहंशाह आलम को पढ़ रहे हैं और उनकी कविताओं से अपने समय के धुंध को समझने में मदद ले रहे हैं। उनकी कविताओं एक बेचैनी है, जो मनुष्य को कद्दावर और...

चन्द्रदेव सिंह की कवितायें

चन्द्रदेव सिंह की कवितायें भारतीय रेलवे में कार्यरत चन्द्रदेव सिंह, मूलतः गीतकार हैं। उन्होंने अपने गीतों में प्रकृति प्रेम और समाज में हो रहे क्षरण को खास तौर पर टारगेट किया है। उनके गीतों में मानवीय संबंधों के कई अनछूए पहलू उद्घाटित हुए हैं। वे रेलवे विभाग ...

राजमहल की पहाड़ी:भूगोल से इतिहास के पन्नो पर !

युवा कवि संजय पाण्डेय अलजजीरा, डॉयचे वेले और गल्फ न्यूज के लिए फ्रीलांसिंग करते हैं। इसके पहले वे राइटर्स और टेलीग्राफ में डेस्क एडिटर के तौर पर कार्य कर चुके हैं। प्रकृति से प्यार करने वाले संजय को पहाड़ों और जंगलों में घूमना अच्छा लगता है। राजमहल, झारखण्ड के रहने वाले स...

तिहाड़ और संसद

भ्रष्ट राजनीति एवं राजनीतिज्ञों के प्रतिरोधस्वरूप अभी थोड़ा-बहुत ‘तिहाड़’ संसद में बैठा है कभी बहुत-कुछ संसद तिहाड़ में कब बैठेगी ? तिहाड़ से संसद में जाने की बहुत-सी तरकीबें हैं संसद से ‘तिहाड़’ में जाने की तरकीब कब निकाली जाएगी ? लूट-पाट व झूठ-फरेब के आरामगाह एयर एयरकंडीशन्ड आलीश...

विश्वजीत सेन की कविताएं

पटना के कवि सम्मेलन में बहुत देर तक खींचातानी चलती रही कि मंच पर कौन बैठेगा और कौन नहीं एक कवि कह रहे थे कि फलां के मंच पर होने की स्थिति में वह मंच पर चढ़ नहीं सकते और फलां भी ऐसा कि मंच से उतरने का नाम ही न ले- बाहर दोपहर, सवारी को लेकर चिंतित रिक्शावाले और हम लगभग स...

संजय कुमार कुदन सेंसुअस और बेचैन करने वाले कवि हैं – आलोकधन्वा

‘संजय कुमार कुदन अपने समय के कवि होने के साथ-साथ शाश्वतता के भी कवि हैं। जिसमें समय तो झांकता ही है शायरी के हमेशा से जो बड़े सवाल हैं उनसे भी रूबरू होते हैं। इसके साथ-साथ संजय कुमार की कविताएं वामपंथ की ओर झुकी हुइ हैं ” ये बातें चर्चित कवि व मनोचिकत्सक व...