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फिल्म समीक्षा: रनिंग शादी.कॉम

अमित राय की फिल्‍म ‘रनिंग शादी’ की कहानी का आधा हिस्‍सा बिहार में है। पटना जंक्‍शन और गांधी मैदान-मौर्या होटल के गोलंबर के एरियल शॉट के अलावा पटना किसी और शहर या सेट पर है। अमित राय और उनकी टीम पटना(बिहार) को फिल्‍म में रचने में चूक गई है। संवादों में भाषा और लहजे की भिन्‍नता है।...

फिल्म समीक्षा: जॉली एलएलबी 2

सुभाष कपूर लौटे हैं। इस बार वे फिर से जॉली के साथ आए हैं। यहां जगदीश त्‍यागी नहीं,जगदीश्‍वर मिश्रा हैं। व्‍यक्ति बदलने से जॉली के मिजाज और व्‍यवहार में अधिक फर्क नहीं आया है। लखनऊ में वकालत कर रहे जगदीश्‍वर मिश्रा उर्फ जॉली असफल वकील हैं। मुंशी के बेटे जगदीश्‍वर मिश्र...

फिल्म समीक्षा: अलिफ

जैगम इमाम ने अपनी पिछली फिल्‍म ‘दोजख’ की तरह ही ‘अलिफ’ में बनारस की जमीन और मिट्टी रखी है। उन्‍होंने बनारस के एक मुस्लिम मोहल्‍ले के बालक अलिफ की कहानी चुनी है। अलिफ बेहद जहीन बालक है। शरारती दोस्‍त शकील के साथ वह एक मदरसे में पढ़ता है। कुरान की पढ़ाई के अलावा उनकी जि...

फिल्म समीक्षा: काबिल

राकेश रोशन बदले की कहानियां फिल्मों में लाते रहे हैं। ‘खून भरी मांग’ और ‘करण-अर्जुन’ में उन्होंने इस फॉर्मूले को सफलता से अपनाया था। उनकी फिल्मों में विलेन और हीरो की टक्कर और अंत में हीरो की जीत सुनिश्वित होती है। हिंदी फिल्मों के दर्शकों का बड़ा समूह ऐसी फिल्में खूब पसंद ...

फिल्म समीक्षा: रईस

फिल्म के नायक शाह रुख खान हों और उस फिल्म के निर्देशक राहुल ढोलकिया तो हमारी यानी दर्शकों की अपेक्षाएं बढ़ ही जाती हैं। इस फिल्म के प्रचार और इंटरव्यू में शाह रुख खान ने बार-बार कहा कि ‘रईस’ में राहुल(रियलिज्‍म) और मेरी(कमर्शियल) दुनिया का मेल है। ‘रईस’ की यही खूबी और खामी है ...

फिल्म समीक्षा: हरामखोर

ऐसी नहीं होती हैं हिंदी फ़िल्में। श्लोक शर्मा की ‘हरामखोर’ को किसी प्रचलित श्रेणी में डाल पाना मुश्किल है। हिंदी फिल्मों में हो रहे साहसी प्रयोगों का एक नमूना है ‘हरामखोर’। यही वजह है कि यह फिल्म फेस्टिवलों में सराहना पाने के बावजूद केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) में लंबे...

फिल्म समीक्षा: कहानी 2: दुर्गा रानी सिंह

चार सालों से ज्यादा समय बीत गया। मार्च 2012 में सीमित बजट में सुजॉय घोष ने ‘कहानी’ निर्देशित की थी। पति की तलाश में कोलकाता में भटकती गर्भवती महिला की रोमांचक कहानी ने दर्शकों को रोमांचित किया था। अभी दिसंबर में सुजॉय घोष की ‘कहानी 2’ आई है। इस फिल्म का पूरा शीर्षक...

फिल्म समीक्षा: मोह माया मनी

मुनीष भारद्वाज ने महानगरीय समाज के एक युवा दंपति अमन और दिव्या को केंद्र में रख कर पारिवारिक और सामाजिक विसंगतियों को जाहिर किया है। अमन और दिव्या दिल्ली में रहते हैं। दिव्या के पास चैनल की अच्छी नौकरी है। वह जिम्मेदार पद पर है। अमन रियल स्टेट एजेंट है। वह कमीशन और उलटफेर के धंधे...

फिल्म समीक्षा: डियर जिंदगी

हम सभी की जिंदगी जितनी आसान दिखती है, उतनी होती नहीं है। हम सभी की उलझनें हैं,ग्रंथियां हैं,दिक्कतें हैं…हम सभी पूरी जिंदगी उन्‍हें सुलझाते रहते हैं। खुश रहने की कोशिश करते हैं। अनसुलझी गुत्थियों से एडजस्ट कर लेते हैं। बाहर से सब कुछ शांत, सुचारू और स्थिर लगता है,लेकिन अंदर...

फिल्म समीक्षा: फाॅर्स 2

अभिनय देव की ‘फोर्स 2’ की कहानी पिछली फिल्म से बिल्‍कुल अलग दिशा में आगे बढ़ती है। पिछली फिल्म में पुलिस अधिकारी यशवर्द्धन की बीवी का देहांत हो गया था। फिल्म का अंत जहां हुआ था, उससे लगा था कि अगर भविष्य में सीक्वल आया तो फिर से मुंबई और पुलिस महकमे की कहा...