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भारत को स्वतंत्र कराने वाली भाषा है हिंदी: प्रो सिद्धेश्वर प्रसाद

पटना, 14 सितम्बर। यदि महात्मा गाँधी न होते तो ‘हिंदी’ भारत की राज भाषा नही बन पाती। यह भारत को स्वतंत्र कराने वाली भाषा है। देश को स्वतंत्रता किसी और भाषा के माध्यम से नही मिल सकती थी। हमें हिंदी पर गर्व करना चाहिए। यह बातें आज यहाँ हिंदी दिवस पर, बिहार हिंदी साहित...

गाँव-क़स्बों के साहित्यकार भी सम्मानित होंगे साहित्य सम्मेलन के आगामी महाधिवेशन में

बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का दो दिवसीय 38वाँ महाधिवेशन आगामी 9सितम्बर से आरंभ हो रहा है। महात्मा गाँधी के चंपारण-सत्याग्रह के शताब्दी-वर्ष को समर्पित इस महाधिवेशन का उद्घाटन 9 सितम्बर को ११ बजे किया जाएगा। तीन वैचारिक-सत्रों के अतिरिक्त 9 सितम्बर की संध्या कवि-सम्मेलन ...

‘स्वाधीन कलम’ के स्वाभिमानी और राष्ट्रवादी कवि थे नेपाली

‘मेरा धन है स्वाधीन कलम’ के अमर रचनाकार, कविवर गोपाल सिंह नेपाली, विलक्षण प्रतिभा के स्वाभिमानी और राष्ट्रवादी कवि थे। वे प्रेम और स्फूरण के अमर गायक थे। उनके गीतों में देश-भक्ति और सारस्वत श्रींगार था। वे सही अर्थों में गीतों के राज कुमार थे। उनकी लेखनी से गीतो...

कविता गोष्ठी: बारह युवा कवियों ने पढ़ी अपनी रचनाएँ

साहित्यिक संस्था समन्वय द्वारा युवा कवियों का काव्य पाठ राजधानी के फ़्रेज़र रोड स्थित टेक्नो हेरल्ड में आयोजित किया गया। उक्त युवा कविता गोष्ठी में बारह कवियों ने अपनी रचनाएँ पढ़ी। कार्यक्रम की शुरुआत में सुशील ने युवा कवियों का स्वागत करते हुए आज के कठिन समय में रचनाधर्मित...

श्रावणी-गीतों की मूसलाधार-वर्षा में भीगता रहा साहित्य सम्मेलन

बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन आज गए शाम तक महिलाओं की कजरी और श्रावणी-गीतों की मूसलाधार-वर्षा में भीगता रहा। आज मंच पर भी महिलाओं का आधिपत्य था और उन्होंने सिद्ध किया कि, अवसर मिले तो वो भी किसी से कम नहीं। सुप्रतिष्ठ कवयित्री और हिंदी प्रगति समिति की उपाध्यक्ष डा शा...

भारत और भारती के महान सेवक और उन्नायक थे मैथिली शरण गुप्त: प्रो सिद्धेश्वर प्रसाद

‘साकेत’, ‘यशोधरा’ महाकाव्यों के महान रचयिता तथा स्वतंत्रता-आंदोलन के प्रखर सेनानी राष्ट्र-कवि मैथिली शरण गुप्त मातृभूमि ‘भारत’ और राष्ट्र-भाषा ‘भारती’ के अनन्य सेवक और उन्नायक थे। वे भारत के ऐसे अकेले कवि थे, जिन्ह...

मुंशी प्रेमचंद समग्र भारतीय मूल्यों के प्रतिनिधि साहित्यकार हैं: प्रो अमरनाथ

प्रेमचंद समग्र भारतीय मूल्यों एवं संस्कृति के प्रतिनिधि कठाकार हैं। अपने साहित्य में उन्होंने पारंपरिक भारतीय चिंतन-धारा, सामाजिक-जीवन तथा समकालिक नव राष्ट्रीय चेतना-संघर्ष का जीवंत आकलन और चित्रण किया है। वे इसीलिए कथा-सम्राट हैं। यह विचार आज यहाँ साहित्य सम्मेलन में कथा-सम्र...

जन्म शताब्दी: देश में फ़ासीवाद के खतरे को सबसे पहले पहचान लिया था मुक्तिबोध ने

” मुक्तिबोध जनता के ने मध्यमवर्गीय लोगों से ये आग्रह किया कि अपनी सीमाओं से आगे जाकर व्यापक जनता के संघर्ष में शामिल हों। मुक्तिबोध वैसे लेखक नहीं थे जो सृजनात्मक कार्यों के साथ-साथ संगठनात्मक कामों में भाग लिया करते थे। प्रगतिशील लेखक संघ की उज्जैन यून...

डॉ मेहता को साहित्य सम्मेलन ने दिया वृक्ष-बंधु’ की उपाधि

पर्यावरण-साहित्य, पर्यावरण संरक्षण तथा वृक्षारोपण में डॉ मेहता नगेंद्र सिंह का अवदान न केवल अत्यंत मूल्यवान बल्कि अतुल्य है। पर्यावरण-साहित्य के माध्यम से इन्होंने हिंदी-साहित्य की भी स्तुत्य-सेवा की है। डॉ मेहता ने वृक्षों को संसार का गर्ल-पान कर प्राण-वायु प्रदान कर मानवजाति का...

सुलभ की कहानियाँ समाज में घट रही घटनाओं की रिपोर्टिंग है: मृदुला सिन्हा

पटना, 23 जून । डा सुलभ की कहानियां समाज में निरंतर हो रही घटानाओं की रिपोर्ताज है। इनकी कहानियों में जीवन के अनेक रस मिलते हैं। ये एक अत्यंत सवेदनशील और समर्थ कथाकार हैं। यह उद्गार गोवा की महामहिम राज्यपाल और विदुषी लेखिका डा मृदुला सिन्हा ने, बिहार हिंदी साहित्य सम्म...