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सुलभ की कहानियाँ समाज में घट रही घटनाओं की रिपोर्टिंग है: मृदुला सिन्हा

पटना, 23 जून । डा सुलभ की कहानियां समाज में निरंतर हो रही घटानाओं की रिपोर्ताज है। इनकी कहानियों में जीवन के अनेक रस मिलते हैं। ये एक अत्यंत सवेदनशील और समर्थ कथाकार हैं। यह उद्गार गोवा की महामहिम राज्यपाल और विदुषी लेखिका डा मृदुला सिन्हा ने, बिहार हिंदी साहित्य सम्म...

संत कवि कबीर की वाणी में तल्ख़ी, पर गहरा मर्म छिपा है

पटना, 13 जून । बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में आज संत कवि कबीर की जयंती मनाई गई । वक्ताओं ने संत कवि को सद्गुरु और महान आध्यात्मिक चिंतक के रूप में याद किया। समारोह का उद्घाटन करते हुए, वीर कुँवर सिंह विश्व विद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा नंद जी दूबे ने कहा कि,कबीर को...

हमारे समय में शेक्सपीयर-एक रिपोर्ट

पटना,10 जून महान नाटककार शेक्सपीयर की चौथी पुण्यशताब्दी वर्ष के अवसर पर हिंसा के विरुद्ध संस्कृतिकर्मी (रंगकर्मियों-कलाकारों का साझा मंच) एवं बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के संयुक्त आयोजन हमारे समय में शेक्सपीयर विषय पर परिचर्चा का आयोजन आज सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम को सम्बोधि...

ज़िंदगी रंगों का खेल…

ख़्वाब हैं तो खवाइशें भी उड़ान है तो आसमान भी सच्चाई है तो सकारात्मकता भी दृढ़ता है तो स्थिरता भी सोच है तो गहराई भी मंज़िले हैं तो रास्ते भी सफ़र है तो कारवाँ भी है । नफ़रते हैं तो दोस्त भी हैं….     ऐ ज़िंदगी तेरा फ़लसफ़ा भी अजीब है – मुश्किलें हैं तो उनका...

साहित्य सम्मेलन का 38वां महाधिवेशन 29-30 जुलाई को

पटना, 27 मई। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का 38वां महाधिवेशन आगामी 29-30 जुलाई को आयोजित होगा। दो दिवसीय इस अधिवेशन मे देश भर से सैकडों साहित्यकार एवं विद्वान भाग लेंगे। दो दर्जन से अधिक विद्यानों को बिहार के मुर्द्धन्य साहित्यकारों के नाम से नामित अलंकारणों से सम्...

समय सजग कवि हैं विनय: रविभूषण

माॅल में कबूतर भारतीय भाषाओं में संभवतः अकेली पुस्तक होगी जिसकी सभी कविताएं बाजार केंद्रित हैं। संग्रह की 38 कविताओं में से 15 में माॅल की चर्चा है। माॅल आखिर है क्या और बाजार आखिर है क्या? बाजार पहले बाजार में था अब बाजार में नहीं है। वह टीवी एड के जरिए बेडरूम में आया, ...

दूसरा शनिवार में युवा शायर अविनाश अमन की गजलें

किसी शहर की गतिशीलता मापनी हो तो उसका एक रास्ता अदब की दुनिया में शेरों शायरी से होकर भी गुजरता है। पटना शहर की बात करें तो इस तरह की गतिशीलता को बनाए रखने में यहां के कुछ युवा साथियों की पहल पर ‘दूसरा शनिवार’ नामक कार्यक्रम ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हर महीने की दूसरी शनिव...

नई चेतना की शुरुआत साहित्यकार ही करते हैंः शैवाल

‘खूंटे में बंधा आदमी’ शीर्षक पुस्तक ने मुझे प्रेरित किया। जिस परिस्थिति में राजनीति में मैं आया था उस समय की परिस्थितियों से मिलता-जुलता है इन कहानियों का परिवेश। 50-60 के दशक में दुनिया भर के देशों में लोगों का जीवन स्तर बहुत निम्न स्तर का था, दूभर था। आज लोगों मे...

अपने गुलाम पर फ़िदा था अलाउद्दीन खिलजी, बधिया कराकर बना लिया प्रेमी

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती ने एक बार फिर अल्लाउद्दीन खिलजी को सुर्ख़ियों में ला दिया है। दिल्ली सल्तनत के दूसरे शासक अल्लाउद्दीन खिलजी ने 1296 से 1316 तक दिल्ली पर हुकूमत किया था। इतिहास में खिलजी का चाहे जो भी स्थान हो लेकिन साहित्य में खिलजी एक क्रूर खलनायक है जो राजप...

एक दोपहर ‘बज़्म-ए-सुख़न’ के नाम

इक ज़रा सी सुख़न-फ़हमी अगर दे दे ख़ुदा, ज़िन्दगी का लुत्फ़ ग़ालिब की तरफ़दारी में है! तो ले चलते हैं आपको ज़िन्दगी के लुत्फ़ और ग़ालिब की तरफ़दारी के लिए लेख्य-मंजूषा की प्रस्तुति “बज़्म-ए-सुख़न” में, जिसकी सदारत मशहूर शायर जनाब क़ासिम ख़ुर्शीद साहब  और निजामत जनाब अस्तित्व अंकुर ...