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NAPM ने दिया सुशील मोदी को चुनौती- मेधा पाटकर व उनके आंदोलन के फंडिंग के सम्बंध में दिए गए बयान को साबित करें

13 फरवरी, पटना। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) ने बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के द्वारा मेधा पाटकर के सम्बन्ध में दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे मानसिक दुराग्रह व दिवालियापन बताकर, उन्हें उनके द्वारा कही बात साबित करने की चुनौती देते हुए सार्वजनिक माफी मांगने को कहा है।

NAPM ने दो बच्चों व एक 8 वर्षीया बच्ची जिसकी बलात्कार के बाद निर्मम व बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई जिसके मुख्य आरोपी छोटू रवानी के उसके स्वजातीय भाजपा मंत्री के साथ संबंधों व संरक्षण देने के सम्बंध में जांच करने की भी मांग की है।

इधर मेधा पाटकर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बच्ची के साथ बलात्कार व निर्मम हत्या के मामले एवं आतंकी संलिप्तता में संदिग्ध रूप से गिरफ्तार युवकों की गिरफ्तारी के तरीकों पर गम्भीर सवाल उठाए हैं।

NAPM द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मेधा पाटकर संवैधानिक मूल्यों व अहिंसक संघर्षो में विश्वास रखने वाली दुनिया मे चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता है। सुशील मोदी राज्य के वित्त मंत्री है, उनकी ही केंद्र में सरकार है, ऐसे भ्रामक बयान के बजाय उन्हें अपने बयान के समर्थन में ठोस सबूत एवं तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए थे।

गौरतलब हो कि मेधा पाटकर जहां आंदोलन करती है वहाँ भी भाजपानित सरकार है और वहाँ के मुख्यमंत्री आज केंद्र में प्रधानमंत्री है जो पहले भी मेधा पाटकर के आंदोलन के सम्बंध में बार-बार जाँच कराकर थक चुके है।

हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मेधा पाटकर के आंदोलन के समर्थन में नर्मदा घाटी गए थे। श्री नीतीश कुमार भी अपने यहाँ चल रहे चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह सहित कई अन्य सार्वजनिक आयोजनों में उन्हें बतौर अतिथि आमंत्रित किए।

दूसरी तरफ NAPM ने सुशील मोदी द्वारा यह कहे जाने पर कि गिरफ्तार संदिग्ध युवकों ने आतंकवादी गतिविधियों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इस पर NAPM का कहना है कि पुलिस लॉकअप या पुलिस के समक्ष में दिए गए बयान कानूनन प्रमाणिक एवं सत्य नही माने जाते क्योकि पुलिस के द्वारा जबरन मानसिक व शारीरिक यातना के द्वारा भी जबरन बात कबूल करवाये जाते है।

दूसरी ओर NAPM का यह भी मानना है कि भारतीय कानून अनुसार कोई भी व्यक्ति तब तक दोषी नही माना जा सकता जब तक न्यायालय उन्हें दोषी करार न दे। ऐसी अनेक घटनाए हुई है जिसमे अल्पसंख्यको पर ऐसे आरोप झूठे साबित हुए है। लेकिन संवैधानिक पद पर बैठे सुशील मोदी मानसिक दुराग्रह व दिवालिएपन में ऐसा बयान दे रहे है। उनके पास यदि सबूत है तो पेश करें वरना सार्वजनिक रूप से माँफी मांगे।

विदित हो कि जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के बोध गया में आयोजित तीसरे राज्य सम्मेलन के समापन समारोह में बतौर अतिथि भाग लेने मेधा पाटकर 11 फरवरी को आयी थी। कार्यक्रम के समाप्ति के उपरांत गया में घटित इन दो घटनाओं का जिक्र स्थानीय लोगों व पीड़ित पक्षों ने अनुरोध करते हुए उनसे बताया कि आठ वर्षीया बच्ची तन्नू की निर्मम बलात्कार व हत्या तथा घायल दो मासूमों की जघन्य मामले को जानने के बाद भी पुलिस प्रशासन उनको सहयोग करने के बजाय मुहल्ला वालो पर उल्टे ही गम्भीर धाराओं के साथ केश दर्ज की है।

दूसरी घटना में संदिग्ध गिरफ्तार युवको को जो आतंकी को फंडिंग देने के नाम पर पकड़े गए जबकि वे खुद बेहद गरीब है गाड़ियों के मरम्मत कर पेट पालते है भला ये लोग कैसे कश्मीर में फंडिंग करते होंगे। जिसके बाद उनके परिजनों से मिलने मेधा पाटकर गयीं।

वहाँ जाने के बाद उन लोगों के परिजनों व मुहल्ला वासियों ने बताया कि गिरफ्तारी के सम्बंध में पुलिस ने सरकारी नियमों का पालन नही किया है। उनके परिजनों को गिरफ्तारी के बाद कहाँ रखा गया है नही बताया गया है। वहाँ मीडिया के लोग ही मदद कर बाते बताये कि थोड़ी देर में खबर आई कि पुलिस ने एक युवक को निजी मुचलके पर छोड़ दिया है।

आठ वर्षीय मासूम की निर्मम हत्या के परिजनों से भी मेधा पाटकर घण्टो बात की, पूरे मोहल्ले के लोग उनसे मिलकर आप बीती बताये। इस जघन्य बलात्कार व हत्या के बाद पुलिस आरोपीयों की पिटाई के बजाय रैफ पुलिस बल लगाकर मुहल्ले बालों पर बेतहासा पिटाई कराई है और उल्टे मुहल्ले वालों पर संगीन धाराओं के साथ केश दर्ज कर दिया है। लोगों के मन में डर और खौफ इतना है कि वे रैफ की पिटाई व उनके सामानों की हुई क्षति की शिकायत लिखवाने थाने नही जा रहे है। इस भय के पीछे सबकी आशंका छोटू रवानी के स्वजातीय भाजपा मंत्री के संरक्षण का था।

NAPM मासूम बच्ची के बलात्कारी व निर्मम हत्यारा छोटू रवानी के साथ वहां के उसके स्वजातीय भाजपा मंत्री के साथ सम्बन्धो और संरक्षण की सरकार से जांच कराने की मांग की है ।

इधर मेधा पाटकर ने बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन मामलों में गम्भीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

राज्य संयोजक मण्डल की तरफ से
आशीष रंजन, कामायनी स्वामी आनंद पटेल, शहीद कमाल, उदय, कासिफ, मणिलाल व महेन्द्र यादव

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