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बंगाल क्यों और कैसे जीता रसगुल्ले की जंग ?

रसगुल्ले को लेकर जारी जंग ख़त्म हो गई है और इस जंग में ओडिशा को हराते हुए पश्चिम बंगाल ने जीत दर्ज की है.

ज्योग्राफ़िकल इंडिकेशंस (जीआई) रजिस्टरी ने ऐलान किया है कि रोसोगुल्ला (जिसे रसगुल्ला भी कहा जाता है) बंगाल में हुआ था ना कि ओडिशा में.

रसगुल्ला पश्चिम बंगाल ने दिया या फिर ओडिशा ने, ये बहस दोनों राज्यों के बीच पिछले ढाई साल से चल रही थी और विवाद तो और भी पुराना है.

कोलकाता में पेटेंट एंड डिजाइन के डिप्टी कंट्रोलर संजय भट्टाचार्य ने कहा, ”इसका निपटारा जीआई एक्ट के तहत किया गया है जो उत्पादों को किसी भौगोलिक लोकेशन या फिर समुदाय या समाज से जोड़ते हैं.”

हालांकि ये भी ख़बर है कि रोसोगुल्ला नहीं बल्कि बंगाली रोसोगुल्ला का जीआई पश्चिम बंगाल को मिला है.

इस साइट ने ट्रेड मार्क्स एंड जीआई के असिस्टेंट रजिस्ट्रार चिन्नराजा जी नायडू के हवाले से कहा है कि कानूनी लड़ाई में बंगाल की जीत और ओडिशा की हार की ख़बर गलत है. उन्होंने कहा कि ये टैग बंगलार रोसोगुल्ला के लिए जारी किया गया है.

हालांकि ख़बर आने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया था, ”हम सभी के लिए मीठी ख़बर. हम काफ़ी खुश हैं और इस बात पर गर्व है कि बंगाल को रोसोगुल्ला के लिए जीआई दर्जा मिल गया है.”

लेकिन पश्चिम बंगाल ने रसगुल्ले की जंग जीती कैसे? उसे किसने विजेता करार दिया? कौन सा उत्पाद किस राज्य के खाते में आएगा, ये कैसे तय होता है? और ज्योग्राफ़िकल इंडिकेशंस होता क्या है?

इन सभी सवालों के जवाब ये रहे-

ज्योग्राफ़िकल इंडिकेशंस (जीआई) एक नाम या चिन्ह होता है जो किसी उत्पाद ख़ास से जुड़ा होता है. इसका ताल्लुक़ किसी भौगोलिक क्षेत्र (जैसे कस्बा, शहर, इलाका या देश) से होता है.

विश्व स्वास्थ्य संस्थान (डब्ल्यूटीओ) का सदस्य होने के नाते भारत ने ज्योग्राफ़िकल इंडिकेशंस ऑफ़ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट 1999 को साल 2003 में 15 सितंबर को अपनाया था.

जीआई टैग का मतलब ये है कि अधिकृत यूज़र के अलावा कोई उत्पाद के मशहूर नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकता. भारत में जीआई टैग पाने वाला पहला उत्पाद दार्जलिंग चाय थी. साल 2004-05 में उसे ये कामयाबी मिली थी.

वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइज़ेशन (WIPO) के मुताबिक ज्यॉग्राफ़िकल इंडिकेशन वो साइन है जो उत्पाद पर होता है और ये बताता है कि वो एक ख़ास क्षेत्र से ताल्लुक़ रखता है और साथ ही उसकी विशेषताएं क्या हैं.

जीआई टैग के मायने ऐसा साइन होने से है, जो ये बताए कि उत्पाद या चीज़ सबसे पहले कहां आई थी.

रोसोगुल्ला के लिए ये लड़ाई साल 2015 में तब शुरू हुई थी, जब उड़ीसा ने कहा था कि एक से ज़्यादा समिति कह चुकी है कि रोसोगुल्ला के 600 साल पहले से मौजूद होने के पर्याप्त सबूत हैं.

ओडिशा का ये भी कहना था कि ऐतिहासिक रिसर्च के मुताबिक रसगुल्ला का जन्म पुरी में हुआ था. साथ ही इसका पहला अवतार खीर मोहाना था जो बाद में पहला रसगुल्ला कहलाया.

इसकी प्रतिक्रिया में पश्चिम बंगाल सरकार ने 19वीं सदी के इतिहास का हवाला देते हुए कहा था कि रोसोगुल्ला सबसे पहला नबीन चंद्र दास ने साल 1868 में बनाया था.

साभार: बीबीसी हिंदी

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